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डॉक्टर नदारद, वार्ड बॉय के उपचार से मरीज की मौत; परिजनों ने हंगामा कर थाने में दी शिकायत
शहडोल जिला प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के प्रभार का जिला होने के बावजूद यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पाली रोड स्थित एक निजी अस्पताल में उपचार में भारी लापरवाही का मामला सामने आया। यहां डॉक्टर की अनुपस्थिति में कथित तौर पर वार्ड बॉय और स्टाफ द्वारा इलाज किए जाने के बाद एक मरीज की मौत हो गई। इस घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने कोतवाली पहुंचकर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता दिनेश कुमार जैन ने पुलिस को बताया कि उनके परिजन कमलेश जैन, निवासी गुरुनानक चौक, को 16 दिसंबर की रात करीब 11.30 बजे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मरीज को इमरजेंसी कक्ष में ले जाया गया, जहां मौजूद एक युवक ने स्वयं को चिकित्सक बताकर उपचार शुरू कर दिया। वहीं, अस्पताल की एक महिला स्टाफ द्वारा दवाइयां लिखी गईं। आरोप है कि उस समय अस्पताल में कोई योग्य डॉक्टर मौजूद नहीं था।
परिजनों का कहना है कि इलाज के दौरान मरीज की हालत बिगड़ने लगी और उसे घबराहट होने पर भी समय पर सीपीआर नहीं दिया गया। उचित और तत्काल चिकित्सा सहायता के अभाव में कुछ ही देर बाद कमलेश जैन की मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि मरीज का इलाज वार्ड बॉय द्वारा किया गया, जो सीधे तौर पर लापरवाही और नियमों का उल्लंघन है।
घटना के बाद अस्पताल परिसर में हंगामे की स्थिति बन गई। परिजन तत्काल कोतवाली पहुंचे और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। उपनिरीक्षक उपेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि शिकायत स्वीकार कर ली गई है और जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आखिरी वक्त तक अकेले रहे, मौत की खबर सुनकर भी नहीं पहुंचे रिश्तेदार; पुलिस ने कराया दाह संस्कार
इंदौर में दिल झकझोर कर देने वाला मामला सामने आया है। एक दिन पहले जिस पति पत्नी के शव पुलिस ने उनके घर से बरामद किए, उनके अंतिम संस्कार के लिए परिवार के लोग ही नहीं आए। उन्होंने पुलिस अफसरों से आग्रह किया कि वे अंतिम संस्कार करवा दें। दोनों के शव पुलिस ने बदबू आने के बाद बरामद किए थे।
इंदौर के लसुड़िया क्षेत्र में मिले पति-पत्नी के शव को लेने उनके रिश्तेदार भी नहीं आए। पुलिस ने मृतक कन्हैयालाल के भाई से संपर्क किया था, लेकिन उन्होंने पुलिस अफसरों के सामने खुद आने में असमर्थता जताई और कहा कि वे खुद दोनों का दाह संस्कार करवा दें। कन्हैयालाल का परिवार आजमगढ़ उत्तर प्रदेश में रहता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह प्राकृतिक बताई गई।
पहले पति की मौत हुई थी
कन्हैयालाल और उनकी पत्नी स्मृति दोनों मकान में अकेले रहते थे। उनकी कोई संतान भी नहीं थी। जांच में कन्हैयालाल का शव दस से बारह दिन का पाया गया, जबकि स्मृति की मौत चार-पांच दिन पहले हुई थी। पुलिस यह अंदाजा लगा रही है कि पति की मौत के बाद स्मृति ने अपने रिश्तेदारों से संपर्क किया होगा, लेकिन कोई नहीं आया, तो वह शव के साथ ही कमरे में रही होगी। पुलिस ने उनके मोबाइल भी जब्त किए हैं, ताकि यह पता चल सके कि उन्होंने अंतिम बार किससे बात की थी।
आस-पड़ोसियों से भी ज्यादा बात नहीं
पड़ोसियों ने बताया कि एसआईआर फॉर्म के लिए कर्मचारी आए थे तो उन्होंने स्मृति से संपर्क किया था। तभी उन्हें देखा था। उसके बाद वह नजर नहीं आई। घर का दरवाजा भी अक्सर बंद ही रहता था। दूधवाले को भी स्मृति ने दूध देने मना कर दिया था। गुरुवार सुबह जब घर से बदबू आई तो रहवासियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने दोनों के शव बरामद किए थे। शुक्रवार को दोनों का अंतिम संस्कार करवा दिया गया।
मीनाक्षी सिंह ने जातिवाद को लेकर दे दिया बड़ा बयान
मध्य प्रदेश में आईएएस अधिकारियों से जुड़े विवादों की कड़ी अभी थमी भी नहीं थी कि एक नया मामला सामने आ गया है। आईएएस अधिकारी मीनाक्षी सिंह के एक बयान ने सियासी और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उनके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिस पर सवर्ण समाज की ओर से नाराजगी भी जताई जा रही है।
‘बच्चों को अपनी जातिगत पहचान बताना जरूरी’
भोपाल के अंबेडकर पार्क में पिछले दिनों आयोजित अजाक्स (AJAKS) के सम्मेलन को संबोधित करते हुए मीनाक्षी सिंह ने कहा कि संगठन को केवल मंच तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे समाज और परिवार तक ले जाना होगा। उन्होंने कहा कि समाज को जोड़ने की शुरुआत घर से होती है और इसके लिए बच्चों को यह बताया जाना चाहिए कि वे किस समुदाय से आते हैं। उन्होंने मंच से यह भी कहा कि बच्चों को यह जानकारी होनी चाहिए कि वे आदिवासी या एससी समुदाय से जुड़े हैं और अपनी जातिगत पहचान को समझना जरूरी है।
हिल स्टेशन पचमढ़ी से भी ठंडा रहा इंदौर, पारा 4.1°C तक गिरा, दिसम्बर में सबसे कम तापमान
इंदौर में दिन में भले ही सामान्य से एक डिग्री तापमान ज्यादा रहा, लेकिन रात में कड़ाके की ठंड पड़ी। प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी से भी ज्यादा न्यूनतम तापमान इंदौर का रहा। गुरुवार रात शहर का न्यूनतम तापमान 4.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इस वर्ष के दिसम्बर माह का यह सबसे न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया।
सामान्यतः यह माना जा है कि अच्छी बारिश हुई है तो ठण्ड भी अधिक रहेगी, इस साल जून से अक्टूबर माह के अंत तक बारिश होती रही। नवंबर माह अपने साथ ठंड को लेकर ही आया। पिछले महीने 15 नवम्बर को न्यूनतम तापमान 6.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था जो दशक का नवम्बर का सबसे ठण्डा दिन था।
मौसम विभाग के अनुसार दिसम्बर माह में अभी तक बीते सभी दिनों में न्यूनतम तापमान सामान्य से लगातार कम ही दर्ज हो रहा है। दिसम्बर में चल रही शीत लहर से लग रहा है कि कही 27 दिसम्बर 1936 का रिकॉर्ड 1.1 डिग्री सेल्सियस का रिकार्ड न टूट जाए। इसी वर्ष 11 दिसंबर को न्यूनतम तापमान 4. 5 डिग्री सेल्सियस दर्ज गया था तभी से यह अहसास हो गया था कि ठण्ड इस साल कोई नया रिकार्ड ही कायम करेगी।
इंदौर पचमढ़ी से ठंडा
पिछली रात इंदौर पचमढ़ी से अधिक ठंडा रहा। प्रदेश ने न्यूनतम तापमान वाले नगरों में इंदौर 4.1 डिग्री सेल्सियस के दूसरे स्थान पर था।पहले स्थान पर शिवपुरी था, जहां 4 डिग्री तापमान रहा जबकि पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 5. 6 डिग्री दर्ज किया गया।
मौसम विभाग के अनुसार रात में ठंडी हवा की गति अधिक रह रही। बीती रात हवा की गति 11 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार थी ,दृश्यता 1500 मीटर थी। मौसम विभाग के अनुसार पहाड़ियों पर हो रही बर्फ़बारी का प्रभाव नगर के मौसम पर दिख रहा है इस कारण पचमढ़ी से इंदौर ठंडा रह रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार ठण्ड के साथ शहर की हवा ही प्रदूषित होती जा रही है 18 दिसबंर को नगर का एक्यूआई 153 दर्ज किया गया था। इस माह में 12 दिसम्बर को यह 300 था। शहर की सड़कों पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट के बजाय निजी वाहनों पर निर्भरता अधिक होने से वाहनों के प्रदूषण का करीब पचपन प्रतिशत योगदान है। पर्यावरणविद ओ पी जोशी का कहना है शहर के घटते पेड़ो की संख्या भी एक वजह है। प्रदूषण से सर्दी और खांसी के मरीज बढ़ रहे है , वायरल बुखार से कई लोग पीड़ित है।
इंदौर में कब-कब बना न्यूनतम तापमान का रिकार्ड
न्यूनतम तापमान तारीख
डिग्री सेल्सियस
1.1 27-12-1936
2.4 14-12-1964
3.1 28-12-1983
3.3 24-12-1955
3.6 31-12-1990
3.9 27-12-1983
4.1 18-12-2025
4.3 20-12-1961
4.5 11-12-2025
4.5 17-12-1963
4.8 31-12-1977
कड़ाके की सर्दी से कांपा मालवा-निमाड़ में पारा लुढ़का, ग्वालियर-चंबल में कोहरा बना आफत
मध्यप्रदेश में कड़ाके की सर्दी और घने कोहरे का असर लगातार बना हुआ है। मालवा-निमाड़ अंचल में सबसे ज्यादा ठंड पड़ रही है, जहां कई शहरों में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। वहीं ग्वालियर-चंबल, रीवा और सागर संभाग में घने कोहरे के कारण दृश्यता घटकर 1 किलोमीटर से भी कम रह गई है।
इन जिलों में घना कोहरा, विजिबिलिटी घटेगी
मौसम विभाग के मुताबिक शुक्रवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में घने कोहरे का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा भोपाल, शाजापुर, इंदौर, उज्जैन, राजगढ़, देवास, सीहोर, रायसेन और विदिशा में भी कोहरा छाए रहने की संभावना है। इन जिलों में दृश्यता 1 से 4 किलोमीटर के बीच रह सकती है।
कल्याणपुर सबसे ठंडा, पारा 3.5 डिग्री तक लुढ़का
बुधवार-गुरुवार की रात तापमान में और गिरावट दर्ज की गई। भोपाल में न्यूनतम तापमान 5.4 डिग्री, इंदौर में 4.5, ग्वालियर में 9.3, उज्जैन में 7.3 और जबलपुर में 9.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। प्रदेश में सबसे ठंडा इलाका शहडोल जिले का कल्याणपुर रहा, जहां न्यूनतम तापमान 3.5 डिग्री तक पहुंच गया। मालवा-निमाड़ के इंदौर, उज्जैन, मंदसौर और शाजापुर में भी तापमान 5 डिग्री से नीचे बना हुआ है।
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कोहरे से यातायात प्रभावित
घने कोहरे का सीधा असर रेल सेवाओं पर भी पड़ा है। दिल्ली से इंदौर और भोपाल आने वाली अधिकांश ट्रेनें 30 मिनट से लेकर 5 घंटे तक की देरी से चल रही हैं। गुरुवार को पंजाब मेल, शताब्दी एक्सप्रेस, झेलम एक्सप्रेस, सचखंड, मालवा, छत्तीसगढ़, कोल्हापुर सुपरफास्ट और मंगला लक्षद्वीप एक्सप्रेस जैसी कई प्रमुख ट्रेनें प्रभावित रहीं। ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन रेलवे स्टेशनों पर भी ट्रेनों के देर से पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। शुक्रवार सुबह भी कोहरे के चलते कई ट्रेनें अपने तय समय से पीछे रहीं। कोहरे की वजह से हवाई यातायात भी प्रभावित हुआ है। भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट से दिल्ली, मुंबई, गोवा और बेंगलुरु जाने वाली फ्लाइट्स में देरी दर्ज की गई। गुरुवार को कई उड़ानें 20 मिनट से लेकर एक घंटे तक देर से रवाना हुईं।
नवंबर में ही दिखा सर्दी का रिकॉर्ड असर
इस साल सर्दी ने नवंबर में ही रिकॉर्ड तोड़ दिया। भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली, जो 1931 के बाद सबसे लंबा दौर माना जा रहा है। 17 नवंबर की रात तापमान 5.2 डिग्री तक गिर गया, जो अब तक का रिकॉर्ड है। वहीं इंदौर में भी पारा 6.4 डिग्री तक लुढ़का, जो 25 साल में सबसे ठंडी रात रही। मौसम विभाग का कहना है कि दिसंबर और जनवरी ठंड के लिहाज से सबसे अहम महीने होते हैं और इस दौरान उत्तर भारत से आने वाली सर्द हवाओं का असर प्रदेश में सबसे ज्यादा देखने को मिलता है।
ग्वालियर-चंबल में कोहरा बना आफत
मध्यप्रदेश में कड़ाके की सर्दी और घने कोहरे का असर लगातार बना हुआ है। मालवा-निमाड़ अंचल में सबसे ज्यादा ठंड पड़ रही है, जहां कई शहरों में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया।
वहीं ग्वालियर-चंबल, रीवा और सागर संभाग में घने कोहरे के कारण दृश्यता घटकर 1 किलोमीटर से भी कम रह गई है।
मध्यप्रदेश में कड़ाके की सर्दी का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश के मालवा-निमाड़ अंचल में ठंड ने लोगों की कंपकंपी बढ़ा दी है।
इंदौर और उज्जैन संभाग के कई इलाकों में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है, जिससे रात और सुबह का समय बेहद सर्द हो गया है।
वहीं प्रदेश के उत्तरी हिस्सों ग्वालियर-चंबल, रीवा और सागर संभाग में घना कोहरा लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है।
हालात ऐसे हैं कि सुबह के वक्त एक किलोमीटर से आगे कुछ भी साफ नजर नहीं आ रहा। शुक्रवार सुबह भी प्रदेश के 13 जिलों में कोहरे का असर बना रहा।
इन जिलों में घना कोहरा, विजिबिलिटी घटेगी
मौसम विभाग के मुताबिक शुक्रवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में घने कोहरे का अलर्ट जारी किया गया है।
इसके अलावा भोपाल, शाजापुर, इंदौर, उज्जैन, राजगढ़, देवास, सीहोर, रायसेन और विदिशा में भी कोहरा छाए रहने की संभावना है। इन जिलों में दृश्यता 1 से 4 किलोमीटर के बीच रह सकती है।
नवंबर में ही दिखा सर्दी का रिकॉर्ड असर
इस साल सर्दी ने नवंबर में ही रिकॉर्ड तोड़ दिया। भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली, जो 1931 के बाद सबसे लंबा दौर माना जा रहा है।
17 नवंबर की रात तापमान 5.2 डिग्री तक गिर गया, जो अब तक का रिकॉर्ड है। वहीं इंदौर में भी पारा 6.4 डिग्री तक लुढ़का, जो 25 साल में सबसे ठंडी रात रही।
मौसम विभाग का कहना है कि दिसंबर और जनवरी ठंड के लिहाज से सबसे अहम महीने होते हैं और इस दौरान उत्तर भारत से आने वाली सर्द हवाओं का असर प्रदेश में सबसे ज्यादा देखने को मिलता है।
कल्याणपुर सबसे ठंडा, पारा 3.5 डिग्री तक लुढ़का
बुधवार-गुरुवार की रात तापमान में और गिरावट दर्ज की गई। भोपाल में न्यूनतम तापमान 5.4 डिग्री, इंदौर में 4.5, ग्वालियर में 9.3, उज्जैन में 7.3 और जबलपुर में 9.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
प्रदेश में सबसे ठंडा इलाका शहडोल जिले का कल्याणपुर रहा, जहां न्यूनतम तापमान 3.5 डिग्री तक पहुंच गया। मालवा-निमाड़ के इंदौर, उज्जैन, मंदसौर और शाजापुर में भी तापमान 5 डिग्री से नीचे बना हुआ है।

