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सरकार में बैठे लोग गलत बयानी करके सांप्रदायिक माहौल खराब न करें : नारी चेतना मंच

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नाम भाषागत होते हैं , किसी भी धर्म का व्यक्ति कोई भी नाम रख सकता है .
सांप्रदायिक आधार पर आजीविका का अधिकार नहीं छीना जा सकता

रीवा 24 अगस्त . नारी चेतना मंच ने एक विज्ञप्ति जारी करके प्रदेश में सांप्रदायिक माहौल खराब करने के लिए सरकार में बैठे कुछ लोगों को जिम्मेदार ठहराया है . इंदौर में एक चूड़ी बेचने वाले को केवल इसलिए भीड़ हिंसा का शिकार होना पड़ा कि वह ऐसे इलाके में चूड़ियां बेचने के लिए फेरी लगा रहा था जहां दूसरे समुदाय के लोग रहते हैं . नारी चेतना मंच ने कहा है कि लोगों को धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव किया जाना और प्रताड़ित किया जाना सरासर गलत है .

सांप्रदायिक आधार पर आजीविका का अधिकार छीना नहीं जा सकता है . चूड़ीवाला किसी को जबरदस्ती चूड़ी नहीं पहना रहा था बल्कि उसके साथ इसलिए गलत व्यवहार किया गया क्योंकि वह दूसरे संप्रदाय का था . मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में घर-घर जाकर चूड़ी पहनाने वाले तस्लीम नामक व्यक्ति को स्थानीय कुछ शरारती लोगों ने यह आरोप लगाकर उसके साथ बुरी तरह मारपीट की है कि वह हिंदू नाम रख कर चूड़ियां बेंच रहा है . प्रदेश में मॉब लिंचिंग की इस तरह की घटना कानून व्यवस्था पर बहुत बड़ा सवाल है . कानून की धज्जियां उड़ाते हुए एक निहत्थे व्यक्ति को सांप्रदायिक आधार पर मारपीट किया जाना सरासर अत्याचार है .

नारी चेतना मंच ने कहा कि यह अत्यंत आक्रोश एवं चिंता का विषय है कि इस संबंध में प्रदेश के गृह मंत्री डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा अत्यंत विवादित बयान देकर माहौल खराब करते नजर आ रहे हैं . डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा ने गृह मंत्री पद पर रहते हुए भाषागत नामों को सांप्रदायिक नजरिए से देखा है . एक तरह से यह घटनाक्रम सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का गंदा खेल है जो मध्य प्रदेश के गृह मंत्री पद पर बैठे व्यक्ति की पद और गरिमा के सर्वदा विपरीत है . गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा के हवाले बताया गया है कि तस्लीम नामक चूड़ी बेचने वाले व्यक्ति के पास दो अलग-अलग आधार कार्ड मिले हैं . एक व्यक्ति के दो आधार कार्ड कैसे बन गए इसकी जांच अवश्य होना चाहिए . लेकिन प्रदेश के गृह मंत्री को यह समझने की जरूरत है कि कोई भी नाम भाषागत होते हैं . नारी चेतना मंच ने कहा कि किसी भी नाम का धर्म से कोई ताल्लुक नहीं होता है .

नाम व्यक्ति की पहचान और संबोधन है , जिससे कोई व्यक्ति जाना जाता है . दिवंगत फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार का मूल नाम युसूफ था लेकिन वह दिलीप कुमार के नाम से प्रसिद्ध रहे . डॉ राम मनोहर लोहिया ने राम इकबाल सिंह को पीरों का गांधी कहा था . इसी तरह बहुत सारे नाम देखने को मिलते हैं जो हमारे सांप्रदायिक सद्भाव को मजबूत बनाते हैं . नारी चेतना मंच ने कहा कि चूड़ीवाला तस्लीम क्या वास्तव में नाम बदलकर चूड़ी बेचने और पहनाने का काम कर रहा था ? लेकिन उसका मुसलमान होकर चूड़ी बेचना कोई अपराध नहीं है . देश में कोई भी धंधा करने वाला आमतौर पर अपनी जाति धर्म के बारे में साइन बोर्ड नहीं लगाता है . यदि तस्लीम के द्वारा नाम बदलकर चूड़ियां बेची जा रही थी तो उसकी वजह जानने की जरूरत है . नारी चेतना मंच ने कहा कि चूड़ियां बेचने और पहनाते समय उसके द्वारा यदि कोई गलत व्यवहार किया गया है तो निश्चित रूप से उसके ऊपर उचित कानूनी कार्यवाही होना चाहिए लेकिन इसे सांप्रदायिक रूप देना किसी भी दृष्टि से उचित नजर नहीं आता है . प्रदेश के गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा के द्वारा इस संबंध में जिस तरीके से पत्रकार वार्ता करके माहौल को शांत करने के बजाय गंदा करने का प्रयास किया है वह अत्यंत दुखद दुर्भाग्यपूर्ण है . उनके द्वारा प्रदेश के गृह मंत्री के पद पर बैठकर नामों का धार्मिक विभाजन किया जाना अत्यंत आपत्तिजनक बात है .

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