इंदौर
वार्ड आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका हाई कोर्ट ने शुक्रवार को खारिज कर दी। याचिका में कहा था कि वार्ड आरक्षण में रोटेशन पद्धति का पालन नहीं किया गया है। जो वार्ड पूर्व में जिस वर्ग के लिए आरक्षित थे, उन्हें दोबारा उसी वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया है। इस वजह से उस वार्ड में रहने वाले दूसरे वर्ग के लोगों को प्रतिनिधित्व का मौका नहीं मिल पा रहा है।
याचिका में वार्ड आरक्षण निरस्त करते हुए इसे रोटेशन पद्धति से करने के आदेश देने की मांग की गई थी। याचिका एडवोकेट विभोर खंडेलवाल के माध्यम से दायर की थी। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने शासन को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा था। शुक्रवार को याचिका में अंतिम बहस हुई।
शासन की तरफ से तर्क रखा गया कि वार्ड आरक्षण मेें कोई अनियमितता नहीं है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा विस्तृत आदेश जारी किया जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद समस्त हाई कोर्ट में विचाराधीन याचिकाएं स्वत: ही समाप्त हो गई थीं।
इसलिए अब इस तरह की याचिकाओं पर विचार करने का कोई मतलब नहीं है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अब इस मामले में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता उमेश गजांकुश ने पैरवी की।

