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धार के धैर्य की परीक्षा:बसंत पंचमी:भोजशाला में भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती,अक्षत और फूल के अलावा सभी पर प्रतिबंध

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दो रास्ते, लोहे की चादरों की ऊंची दीवार और निगरानी के लिए वॉच टॉवर

 धार में स्थित विवादित भोजशाला परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है. करीब 8000 से अधिक जवान तैनात किए गए हैं.पुलिस छावनी बने धार में एक अलग ही माहौल है। गलियों चौबारों में खाकी वर्दी में चहलकदमी करते पुलिस जवानों के बूट की गूंज है। संगीनों के साये में धार की भोजशाला है। चारों तरफ बैरिकेट, कंटीले तार लगा दिए गए हैं। आसपास में ड्रोन इधर-उधर मंडरा रहा है। घरों की छतों से लेकर गलियों तक आसपास से निगरानी हो रही है। अब बसंत की बयार और इबादत की गूंज के बीच शुक्रवार को धार के धैर्य की परीक्षा होगी। एक साथ नमाज और मां सरस्वती का पूजन संपन्न हो जाए और शहर की फिजा भी न बिगड़े यही सरकार की कोशिश है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से साफ कर दिया गया है कि बसंत पंचमी की पूजा और नमाज साथ-साथ होंगे। कोर्ट ने नमाज के दोपहर एक बजे से तीन बजे का समय तय किया है। साथ ही नमाज के लिए परिसर में अलग जगह और आने-जाने के लिए अलग से रास्ते बनाने का आदेश दिया है। भोजशाला परिसर में बसंत पंचमी पर हिंदुओं को ‘खास’ पूजा करने की इजाजत देने वाली याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा. बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन पड़ रही है और इस दिन जुमे की नमाज होती है. अब ऐसे में पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड में है और कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं.

वैसे यह पहली बार नहीं है, जब बसंत पंचमी के अवसर पर भोजशाला में इस तरह की स्थिति सामने आई हो, इससे पहले 2006, 2013 और 2016 में भी ऐसा ही हुआ था. उस दौरान भी क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण थे. बसंत पंचमी पर हिंदी संगठनों ने विशेष पूरा का आव्हान किया है. वहीं इस इन दिन जुमे की नमाज भी होगी.

अक्षत और फूल के अलावा सभी पर प्रतिबंध
एक अन्य प्रतिबंधित आदेश के तहत प्रशासन ने तय किया है कि भोजशाला में प्रवेश करने वाले दोनों समुदायों के लोग पूजन सामग्री अक्षत एवं फूल के अतिरिक्त अन्य कोई सामग्री (जैसे मोबाइल फोन, बैग, कैमरा, पानी की बोतल आदि) बिना सक्षम अनुमति के अपने साथ नहीं लेकर जा सकेंगे. कोई भी व्यक्ति घातक हथियार जैसे चाकू, छुरा, बल्लम, तलवार, लाठी और पिस्टल आदि अपने साथ लेकर नहीं चल सकेंगे. विस्फोटक पदार्थो को भी साथ लेकर चलने पर प्रतिबंध लगाया गया है.

डीजल-पेट्रोल की बिक्री पर बैन
पेट्रोलियम पदार्थ (पेट्रोल/डीजल/केरोसिन आदि) का बोतल, कैन या खुले रूप में बिक्री पर भी प्रतिबंध रहेगा. समाचार पत्रों, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया, व्हाट्सएप, फेसबुक या अन्य किसी माध्यम से धार्मिक उन्माद फैलाने वाली सामग्री का प्रचार-प्रसार पूर्ण रूप से प्रतिबंधित रहेगा. उल्लंघन की स्थिति में भारतीय न्याय संहिता एवं आई.टी. एक्ट के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी.

बिना अनुमति नहीं होंगे कार्यक्रम
आदेश अवधि में किसी भी प्रकार की रैली, जुलूस, धरना-प्रदर्शन या आयोजन हेतु संबंधित अनुविभागीय दण्डाधिकारी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा. अनुमति हेतु प्रस्तुत सूचना में निम्नलिखित समूह का नाम, प्रस्तावित गतिविधियों का स्वरूप, आयोजन का मार्ग, प्रतिभागियों की अनुमानित संख्या व आयोजन हेतु उत्तरदायी व्यक्ति का नाम, पता एवं व्यवस्था की जानकारी देना अनिवार्य होगा. यह आदेश कानून व्यवस्था में लगे लोक सेवकों, ड्यूटी पर तैनात पुलिस बल और विशेष रूप से अधिकृत व्यक्तियों पर लागू नहीं होगा.

जारी है जांच अभियान
धार जिले में ज्वलनशील पदार्थ पेट्रोल-डीजल के अवैध बिक्री की रोकथाम हेतु गठित विभिन्न जांच दलों द्वारा सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है. बसंत पंचमी के अवसर पर शराब की बिक्री पर भी रोक लगाई गई है. धार में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से अपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्तियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है. अभी तक 4526 लोगों से तकरीबन 40 करोड़ रुपये से अधिक का बाउंड ओवर करवाया गया है.

लगातार हो रही दोनों समुदायों की बैठकें
पुलिस अधीक्षक मंयक अवस्थी ने बताया कि धार में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने और साम्प्रदायिक सौहार्द का वातावरण कायम रखने के लिए आपसी संवाद का दौर लगातार जारी है. क्षेत्र में नागरिकों के साथ जिला प्रशासन और पुलिस द्वारा लगातार बैठकें आयोजित की गई है. अभी तक मोहल्ला समिति की 31 बैठकें एवं मुस्लिम समुदाय के साथ कुल 21 बैठकें की जा चुकी हैं.

भारी संख्या में पुलिस बल तैनात
धार क्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए है. चौकस निगरानी रखी जा रही है. धार में 6461 पुलिस अधिकारियों और कर्मियों की नियुक्ति की गई है. इसमें पुलिस अधीक्षक स्तर के 13, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के 25, उप पुलिस अधीक्षक/नगर पुलिस अधीक्षक स्तर के 67, नगर निरीक्षक स्तर के 107, उपनिरीक्षक/सहायक उपनिरीक्षक स्तर के 393, प्रधान आरक्षक/आरक्षक स्तर के 4375 अधिकारी/कर्मी तैनात किए गए हैं. क्षेत्र में कुल 933 महिला बल भी तैनात हैं. वहीं कुल 8 आरएएफ प्लाटुन की तैनाती भी की गई है. इसके साथ ही लगभग डेढ़ से दो हजार और पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों की तैनाती और की जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट से जारी आदेश के बाद अब भोजशाला में पूजा और नमाज दोनों होंगी। प्रशासन को दोनों ही धार्मिक रूप से करवाना ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसको लेकर एक माह पहले से ही तैयारी शुरू कर दी गई थी। प्रशासनिक अमले ने विशेष सुरक्षा रणनीति तैयार की है। भोजशाला और उसके आसपास के क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया है, ताकि शांति और व्यवस्था बनी रहे। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए भोजशाला के मुख्य प्रवेश मार्ग पर जिगजैग बैरिकेडिंग की गई है। दर्शन के लिए आने व जाने के दो अलग-अलग मार्ग तैयार किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, परिसर के पिछले हिस्से यानी विक्रम नगर गेट से लकड़ी पीठे तक लोहे की चादरों की एक ऊंची और मजबूत दीवार खड़ी की गई है। निगरानी के लिए ऊंचे वॉच टॉवर बनाए गए हैं, जहां से पुलिस जवान दूर तक नजर रख सकेंगे।

कमिश्नर पहुंचे किया निरीक्षण
इंदौर संभाग कमिश्नर डॉ. सुदामा खाड़े, कलेक्टर प्रियंक मिश्रा भोजशाला परिसर पहुंचे, जहां पर तैयारियों का निरीक्षण करते हुए कमिश्नर खाड़े ने आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इधर इंदौर आईजी अनुराग सिंह, दो डीआईजी ग्रामीण सहित पुलिसबल को लेकर शहर में पैदल ही भ्रमण पर निकले। पुलिस अधिकारियों ने सबसे पहले शोभायात्रा मार्ग का निरीक्षण किया। साथ ही इस तय रूट से नजदीक लगे संवेदनशील मोहल्लों में भी भ्रमण कर पैदल मार्च किया। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिसबल भी मौजूद रहा।

10 से अधिक लोग जिलाबदर
जिला दंडाधिकारी प्रियंक मिश्रा द्वारा पुलिस अधीक्षक जिला से प्राप्त प्रस्ताव अनुसार जिले में कानून व्यवस्था एवं शांति बनाए रखने को दृष्टिगत रखते हुए अनावेदकगण इसरार उर्फ आमिन पिता कल्लु उर्फ कालु उर्फ मुख्तियार, राज पिता मुकेश वसुनिया, विज्जु उर्फ विजय पिता राजु ऊर्फ राजकुमार, फिरोज पिता अब्दुल सलाम, यश पिता हुकुमचंद उर्फ गुडडा सोलंकी, गोपाल पिता अनिल जादव, मोईन लाला पिता फिरोज खान निवासीयान धार, समीर उर्फ कालिया पिता शब्बीर निवासी धरमपुरी, अनसिंह उर्फ अनवर पिता कालू मकवाना, बबलु पिता सातिया जाति मानकर निवासी मनावर, उमेश उर्फ कालू पिता संतोष निवासी पीथमपुर को धार एवं उससे लगे सीमावृत्ति जिले इन्दौर, उज्जैन, रतलाम, झाबुआ, बड़वानी, खरगोन एवं अलीराजपुर की राजस्व सीमाओं से बाहर चले जाने का निष्कासन (जिलाबदर) आदेश पारित किया गया।

थानों पर होंगे लाइन हाजिर
इसी के साथ ही चिक्की उर्फ इमानवेल पिता विनोद ब्राउन, रोहित पिता गणेश सौलंकी निवासी धार, सद्दाम पिता कालू निवासी सांभर, फारुख पिता हमीद खान निवासी सागौर, राकेश पिता अमरसिंह चौहान दिनेश पिता अमरसिंह चौहान निवासी ग्राम माकनी, विशाल पिता मुकेश जायसवाल निवासी पीथमपुर, जोसेफ पिता नसीर खान निवासी धरमपुरी को सदाचार बनाए रखने के लिए संबंधित थानों में लाइन हाजिर होने हेतु आदेश पारित किए गए। शहर के पीजी कॉलेज स्थित विधि संकाय के भवन में तीन कक्षों को रिजर्व करते हुए अस्थाई तौर पर जेल बनाई गई हैं, किसी भी प्रकार की स्थिति में अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति शांति भंग करने की कोशिश करेगा तो प्रशासन सीधे अस्थाई जेल भेजेगा। जेल के बाहर बड़ी संख्या में पुलिसबल भी तैनात किया गया है।

शहर में प्रवेश के पहले होगी चेकिंग
भोजशाला सहित शहर को 6 सेक्टरों में बांटा गया है। एडीशनल एसपी, डीएसपी रैंक के कुल 65 अधिकारी इन सेक्टरों में प्रभारी के रूप में ड्यूटी करेंगे। नगर के हर चौराहे पर पुलिसबल सुबह 6 बजे से ही तैनात रहेगा। शहर के बाहरी हिस्से में पुलिस मोबाइल वाहन, संकरी गलियों में बाइक पुलिस टीम सहित पैदल जवान सतत निगरानी रखेंगे। शहर में प्रवेश करने वाले सभी प्रमुख नाकों पर अस्थायी पुलिस चौकियां बनाई गई हैं। यहां तैनात जवान शहर में आने वाले हर संदिग्ध व्यक्ति और वाहन की सघन चेकिंग करेंगे। पुलिस के मोबाइल वाहन भी पूरे शहर में लगातार गश्त कर रहे हैं ताकि सुरक्षा घेरा मजबूत बना रहे। धार के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी पुलिसबल तैनात किया गया है। पिछले कुछ साल में कुक्षी, बाग, दिग्ठान, टांडा, धरमपुरी से लेकर मनावर में कई मर्तबा घटनाएं हो चुकी हैं, ऐसे में शहर के साथ प्रशासन जिले में भी पैनी नजर बनाए रखेगा। जिले के सात अनुभाग में 1200 का बल थानों तक पहुंच चुका है।

वाटर कैनन सहित व्रज वाहन आए
मध्य प्रदेश की अयोध्या कही जाने वाली धार में प्रदेश के हर इलाके से पुलिसबल आया है। धार में टीकमगढ़, दतिया, ग्वालियर, श्योपुर, भिंड, रीवा, मुरैना, अशोकनगर, सीहोर, सतना, पन्नार, भोपाल, दमोह जैसे जिलों से पुलिस जवान आए हैं। सीआरपीएफ की आठ कंपनी, आरपीएफ की 9 कंपनी, जिला पुलिसबल के सात हजार जवान, 500 का महिला पुलिसबल सहित यातायात विभाग की एक टीम भी धार पहुंच चुकी है। इसके साथ ही वाटर केनन वाहन, वर्ज वाहन, फायर ब्रिगेड सहित एंबुलेंस भी राऊ टॉकीज परिसर में तैनात की गई है।

अस्पताल में एक वार्ड सुरक्षित
शुक्रवार को किसी भी प्रकार की कानून व्यवस्था बिगड़ने पर संबंधितों को समय पर उपचार मिल सके, इसको लेकर भी प्रशासन ने अपनी ओर से तैयारियां की हैं। मेडिकल विभाग की दो टीमें भोजशाला में रहेंगी। साथ ही भोज कन्या स्कूल के समीप चार बेड का एक रूम तैयार किया गया है, जहां पर इमरजेंसी सेवा के रूप में डॉक्टरों की टीम तैनात रहेगी। जिला अस्पताल में एक वार्ड को आरक्षित करने के साथ ही 20 बेड की आपात व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई है, इसके साथ ही शहर के दो प्रमुख निजी अस्पताल भी स्वास्थ्य विभाग के संपर्क में रहेंगे।

प्रशासन का काम कानून व्यवस्था बनाए रखना है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच वसंत पंचमी और शोभायात्रा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए हर स्तर पर सतर्कता बरती जा रही है।
-प्रियंक मिश्रा, कलेक्टर

भोजशाला की व्यवस्था अलग तरीके से की गई है। शहर और जिले की व्यवस्था अलग है। हर स्तर पर हम काम कर रहे हैं। आम जनता किसी प्रकार के बहकावे में नहीं आएं। पर्याप्त पुलिसबल मौजूद है। शांतिपूर्ण तरीके से सभी आयोजन होंगे। शांतिपूर्वक पर्व मनाएं।
अनुराग सिंह, आईजी, इंदौर 

पुलिस छावनी बने धार में एक अलग ही माहौल है। गलियों चौबारों में खाकी वर्दी में चहलकदमी करते पुलिस जवानों के बूट की गूंज है। संगीनों के साये में धार की भोजशाला है। चारों तरफ बैरिकेट, कंटीले तार लगा दिए गए हैं। आसपास में ड्रोन इधर-उधर मंडरा रहा है। घरों की छतों से लेकर गलियों तक आसपास से निगरानी हो रही है। अब बसंत की बयार और इबादत की गूंज के बीच शुक्रवार को धार के धैर्य की परीक्षा होगी। एक साथ नमाज और मां सरस्वती का पूजन संपन्न हो जाए और शहर की फिजा भी न बिगड़े यही सरकार की कोशिश है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से साफ कर दिया गया है कि बसंत पंचमी की पूजा और नमाज साथ-साथ होंगे। कोर्ट ने नमाज के दोपहर एक बजे से तीन बजे का समय तय किया है। साथ ही नमाज के लिए परिसर में अलग जगह और आने-जाने के लिए अलग से रास्ते बनाने का आदेश दिया है।

दोनों पक्ष सुनने के बाद निकला संतुलित समाधान
मस्जिद पक्ष के वकील ने कहा कि दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज अदा की जाएगी और उसके बाद परिसर खाली कर दिया जाएगा। हिंदू पक्ष की ओर से यह सुझाव दिया गया कि नमाज को शाम 5 बजे के बाद कराया जाए, ताकि पूजा निर्बाध चल सके, लेकिन मस्जिद पक्ष ने स्पष्ट किया कि जुमे की नमाज का समय बदला नहीं जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने एक संतुलित समाधान अपनाते हुए कहा कि दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज के लिए परिसर के भीतर ही एक अलग और विशेष क्षेत्र उपलब्ध कराया जाएगा, जहां आने-जाने के लिए अलग प्रवेश और निकास मार्ग होंगे, ताकि नमाज शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

शक्ति प्रदर्शन के केंद्र

कोर्ट में लंबित मामले और दोनों समुदायों की बढ़ती सक्रियता ने इस धार्मिक आयोजन को शक्ति प्रदर्शन के केंद्र में बदल दिया है। शांतिपूर्ण तरीके से पूजा और नमाज कराना प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। बसंत पंचमी के पहले आए शुक्रवार को कमाल मौला मस्जिद में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग आए थे। इसमें युवकों की संख्या ज्यादा थी। वहीं मंगलवार को भी भोजशाला में हिन्दू समाज ने अपनी ताकत दिखाई। धार में जगह-जगह भगवा यात्राएं निकल रही हैं।

चप्पे-चप्पे पर पहरा, शहर की सीमाएं सील

जब-जब शुक्रवार और बसंत पंचमी का मिलन हुआ है, धार की फिजाओं में तनाव और संघर्ष की गंध घुली है। आंसू गैस के गोले और पथराव के पुराने जख्मों के बीच, इस बार प्रशासन ने सुरक्षा का ऐसा चक्रव्यूह रचा है कि चप्पे-चप्पे पर पहरा है। शहर की सीमाएं सील हैं। जमीन और आसमान से भोजशाला व उसके आसपास के इलाकों की निगरानी हो रही है।

आस्था की दो धाराएं एक ही दिन

इस शक्ति प्रदर्शन के कारण धार की फिजाओं में एक बार फिर वही पुरानी बेचैनी तैर रही है। सुरक्षा और डर के साये के बीच हर किसी के मन में यह सवाल है कि आखिर क्या होगा शुक्रवार को? आस्था की दो धाराएं एक ही दिन एक ही स्थान पर मिलने जा रही हैं। इस बार फिर बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन है और इसी संयोग ने प्रशासन की रातों की नींद उड़ा दी है। धार का इतिहास गवाह है कि जब भी धार में यह नाजुक मोड़ आया तो धारवासियों ने आंसू गैस के गोले के कारण आंसू बहाए, पथराव और लाठीचार्ज की पीढ़ा झेली। वर्ष 2006, 2012 और 2016 की कड़वी यादें आज भी ताजा हैं। फिर वैसा न हो, सब यहीं चाहते हैं।

शांति बनाए रखना प्राथमिकता
शहर की सुरक्षा के लिए इस बार प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। दस हजार पुलिस जवानों की मौजूदगी में धार पुलिस छावनी जैसा नजर आने लगा है। चप्पे-चप्पे पर तैनात सुरक्षा बल और आसमान में उड़ते ड्रोन कैमरे इस बात का अहसास करा रहे हैं कि शांति बनाए रखना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता है। भोजशाला परिसर को छह अलग-अलग सेक्टरों में बांटकर निगरानी की जा रही है और शहर की सीमाओं को सील करने की तैयारी है, ताकि बाहर से आने वाला कोई भी व्यक्ति बिना जांच के प्रवेश न कर सके। 

इसलिए बन रहे टकराव के हालात

भोजशाला से जुड़ी भावनाओं का आलम यह है कि दोनों ही समुदाय अपनी-अपनी परंपराओं को अंजाम तक पहुंचाने के लिए कायम हैं। एक तरफ हिंदू समाज की मांग है कि सूर्योदय से सूर्यास्त तक मां सरस्वती की अखंड पूजा और हवन में कोई बाधा न आए, जिसके लिए लगातार यात्राएं निकालकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई जा रही है। वहीं दूसरी ओर मुस्लिम समाज का कहना है कि उन्हें कई वर्षों से शुक्रवार की नमाज अदा करने की अनुमति है और वे बिना किसी डर के इबादत करना चाहते हैं, हालांकि समाज ने सांकेतिक पूजा की बात भी कही है।

क्या है भोजशाला विवाद, आइए जानते हैं
धार में भोजशाला का निर्माण 1010 से 1055 ईसवीं के बीच परमार वंश के राजा भोज ने करवाया था। राजा भोज की मृत्यु के 200 साल तक यहां पठन-पाठन का कार्य होता रहा। राजा भोज ने यहां देवी सरस्वती (वाग्देवी) की मूर्ति स्थापित कराई थी, जो 84 कलात्मक स्तंभों पर खड़ी थी। 1857 में एक ब्रिटिश अधिकारी यह मूर्ति इंग्लैंड ले गए। यह मूर्ति आज वहां मौजूद है। भोजशाला परिसर में कमाल मौला मस्जिद भी है। केंद्रीय पुरातत्व विभाग के अनुसार भोजशाला में मंगलवार को हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना करने की अनुमति है। शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष को नमाज पढ़ने के लिए दोपहर 1 से 3 बजे तक प्रवेश दिया जाता है। इसके लिए दोनों पक्षों को नि:शुल्क प्रवेश मिलता है। बाकी दिनों में एक रुपये का टिकट लगता है। इसके अलावा बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा के लिए हिंदू पक्ष को पूरे दिन पूजा और हवन करने की अनुमति है।

2006 में बिगड़ी स्थिति

पुरातत्व विभाग के आदेश के बाद 3 फरवरी 2006 को जब बसंत पंचमी शुक्रवार को आई तो उस समय की चुनौतियों और शांति कायम करने के लिए तगड़ा पुलिस बल लगाया गया, लेकिन विवाद हुआ। अफसरों के सामने यह चुनौती थी कि बसंत पंचमी के दिन भोजशाला में धार्मिक प्रथाओं को सूर्यास्त तक कैसे संचालित किया जाए। यज्ञ को बीच में नहीं रोका जा सकता था। परिवार में फूलों की पंखुड़ियों, चावल और कुमकुम के साथ रंगोली बनाई गई, जिसको हटाया नहीं जा सकता था। उधर आदेश के तहत नमाज भी अदा करवाना थी। भोजशाला खाली कराने की कवायद हुई तो विवाद हुआ और परिसर में ही आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। वर्ष 2012 में भी यहीं स्थिति बनी।

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