भोपाल। प्रदेश में लगातार बड़े पैमाने पर सामने आ रहे आर्थिक धोखाधड़ी के मामलों की जांच के लिए पुलिस मुख्यालय अब तक कोई स्थाई एसआईटी का गठन नहीं कर सका है। इसका लंबे समय से इंतजार किया जा रहा है। इसके लिए पुलिस मुख्यालय को-ऑपरेटिव फ्रॉड शाखा द्वारा प्रस्ताव भेजा गया था।
जिसमें को-आॅपरेटिव फ्रॉड के बड़े मामलों की जांच में सहूलियत बनी रहे। इसमें एसआईटी का गठन एडीजी या आईजी के नेतृत्व में करने का आग्रह किया गया था। जिसमें सीबीआई के प्रशिक्षित अफसरों को शामिल किया जाना है। फिलहाल इस मामले में अब तक सहमति तक नहीं बन सकी है। यह प्रस्ताव डीजीपी स्तर पर लंबित बताया जा रहा है। अब तक प्रदेश में ऐसे मामलों की जांच के लिए जिलों में कोई स्थाई एसआईटी नहीं है। इसकी वजह से अस्थाई एसआईटी में शामिल अफसरों का तबादला होने से उसका अस्तित्व ही समाप्त हो जाता है , जिससे जांच प्रभावित होने लगती है। यही वजह है कि अब प्रदेश स्तरीय एसआईटी की जरुरत महसूस की जा रही है। जिसकी वजह से इस तरह के मामलों की जांच अनवरत जारी रह सके। फिलहाल एसआईटी में सीबीआई से प्रशिक्षित होकर आए 22 एक्सपर्ट अफसरों को रखने का प्रस्ताव दिया गया है। यह अफसर अभी इस तरह के मामलों की जांच के लिए संभागीय स्तर पर ऑनलाइन ट्रेनिंग दे रहे हैं। इनके अफसरों के नेतृत्व में ही प्रदेश में लंबित 400 वित्तीय अपराधों की नए सिरे से जांच भी की जा रही है। यह जांच ऐसे मामलों में की जा रही है, जिनमें मोटी ब्याज की राशि देने का प्रलोभन देकर लोगों की गाढ़ी कमाई हड़पने वाली चिटफंड कंपनी, रजिस्टर्ड एनजीओ या बैंकों में होने वाले
को -ऑपरेटिव धोखाधड़ी के मामलों से संबंधित है। गौरतलब है कि को -ऑपरेटिव वार्ड शाखा ने भोपाल, इंदौर, छिंदवाड़ा, ग्वालियर, सतना राजगढ़, मुरैना, उज्जैन 8 जिलों में एसपी रैंक के अफसर के नेतृत्व में एसआईटी गठित कर इन्हें जालसाजी की धरपकड़ में लगाया था लेकिन कुछ जिलों में एसआईटी की टीम के अफसरों का तबादला होने से इनका अस्तित्व समाप्त हो गया है।
एडीजी स्तर पर हो रही निगरानी
हवाला ट्रांजेक्शन से लेकर पोंजी स्कीम, फेक करेंसी, फोर्जरी डार्क वेब क्रिप्टो करेंसी , डाटा सिक्योरिटी कार्ड रिलेटेड टू प्लास्टिक कार्ड, करप्शन वेरी-वेरी बैंक फ्रॉड , मोबाइल बैंकिंग एप्लीकेशन के माध्यम से फ्रॉड करने वालों को पकड़ने और उनसे पैसा वापस दिलाने पर पूरा फोकस किया जा रहा है। ऐसे मामलों की जांच पर एडीजी को-ऑपरेटिव फ्रार्ड शाखा के राजेंद्र कुमार मिश्रा द्वारा निगरानी की जा रही है।
किस स्तर के कितने अफसर
प्रदेश के जिन 22 अफसरों को सीबीआई के गाजियाबाद स्थित इंस्टीट्यूट से प्रशिक्षण दिलाया गया है उनमें चार आईपीएस 14 एएसपी तथा चार डीएसपी स्तर के अफसर शामिल हैं। इन अफसरों द्वारा जोन स्तर पर प्रधान आरक्षक से लेकर एसपी रैंक के अफसरों के लिए लगातार ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
आर्थिक धोखाधड़ी के मामलों की जांच के लिए स्थाई एसआईटी का गठन नहीं कर सका है पुलिस मुख्यालय

Fraud. (IANS Infographics)
