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*जेडीयू में सियासी बेचैनी:जो जेडीयू नहीं चाहती, वही क्यों बोल रहे केसी त्यागी?..बढ़ता टकराव या अलग राह…* 

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नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड में केसी त्यागी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं, लेकिन इस बार वजह उनकी कोई संगठनात्मक भूमिका नहीं, बल्कि ऐसे बयान हैं जो पार्टी लाइन से मेल नहीं खाते. सवाल सीधा किया जा रहा है कि- जो जेडीयू नहीं चाहती, वही बात क्यों कर रहे हैं केसी त्यागी?

 राजनीति में बयान कई बार रणनीति होते हैं और कई बार समस्या भी खड़ी कर जाते हैं. बिहार की राजनीति में जनता दल यूनाइटेड इस वक्त इसी दुविधा से गुजर रही है. पार्टी के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी एक बार फिर चर्चा में हैं और वजह उनके ऐसे बयान हैं जो जेडीयू की आधिकारिक सोच से मेल नहीं खा रहे. यही कारण है कि पार्टी नेतृत्व अब खुलकर कह रहा है- केसी त्यागी के बयान निजी हैं और पार्टी से उनका कोई लेना-देना नहीं है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, केसी त्यागी के हालिया बयानों से जेडीयू में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत पार्टी का शीर्ष नेतृत्व खासा नाराज है और आने वाले दिनों में उन पर कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा.

केसी त्यागी के बयानों से बढ़ी मुश्किल

दरअसल, सवाल यह नहीं है कि केसी त्यागी क्या कह रहे हैं, सवाल यह है कि वे वही क्यों कह रहे हैं जो जेडीयू नहीं चाहती. आईपीएल में बांग्लादेशी खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान को लेकर दिया गया बयान हो या फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग-हर बार पार्टी को सफाई देनी पड़ रही है. सूत्रों के मुताबिक, केसी त्यागी ने कई मौकों पर बिना पार्टी से विमर्श किए बयान दिए हैं जिससे जेडीयू आलाकमान नाराज है और उनके भविष्य को लेकर मंथन तेज हो गया है.

केसी त्यागी पर क्यों असहज हुई जेडीयू?

आईपीएल में बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को खिलाए जाने को लेकर सामने आए विवाद से जुड़ा है. बांग्लादेश में हिंदुओं पर कथित अत्याचार और हत्याओं के बाद भारत में जबरदस्त आक्रोश का माहौल था. इसी पृष्ठभूमि में केसी त्यागी का बयान सामने आया, जिसे पार्टी लाइन के खिलाफ माना जा रहा है. सूत्रों का कहना है कि त्यागी ने यह बयान पार्टी से पूछे बिना दिया, जिससे नेतृत्व असहज हो गया.

पार्टी लाइन से अलग बयान क्यों

जेडीयू सूत्रों के अनुसार, पार्टी का स्पष्ट मानना है कि खेल, आईपीएल या अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बिना अधिकृत भूमिका वाले नेताओं को बोलने की जरूरत ही नहीं है. खासकर तब, जब बयान राजनीतिक और सामाजिक भावनाओं से जुड़ा हो. पार्टी में केसी त्यागी का बयान न सिर्फ समय के लिहाज से गलत माना गया, बल्कि इससे पार्टी को सफाई देने की स्थिति में भी आना पड़ा.

पुराना इतिहास भी बना बोझ

बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब केसी त्यागी के बयान जेडीयू के लिए असहज स्थिति लेकर आए हों. जब वे पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता थे, तब फिलिस्तीन मुद्दे पर विपक्षी दलों के साथ मंच साझा करना और बयान देना भी विवादों में रहा था. उस समय बीजेपी ने इसे गठबंधन धर्म के खिलाफ बताया था. इसके बाद जेडीयू ने कार्रवाई करते हुए उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से हटा दिया था.

पद से हटने के बाद भी बयानबाजी

हालांकि, राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से हटाए जाने के बावजूद केसी त्यागी के बयान थमे नहीं. पार्टी सूत्रों का कहना है कि कई मौकों पर उनके वक्तव्यों ने जेडीयू को राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाया। यही वजह है कि नेतृत्व के भीतर यह सवाल उठने लगा है कि त्यागी पार्टी अनुशासन को कितना मानते हैं।

भारत रत्न की मांग पर डैमेज कंट्रोल?

बता दें कि हाल ही में केसी त्यागी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग उठाई और इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा. राजनीतिक गलियारों में इसे उनके पहले के बयानों से उपजे विवादों के बाद डैमेज कंट्रोल की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि जेडीयू ने इस मांग से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया.

JDU का आधिकारिक स्टैंड

जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने साफ शब्दों में कहा कि केसी त्यागी के बयानों का पार्टी की विचारधारा या आधिकारिक स्टैंड से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि त्यागी के बयान निजी क्षमता में दिए गए माने जाने चाहिए. राजीव रंजन का यह बयान इस ओर इशारा करता है कि पार्टी अब त्यागी को संगठनात्मक रूप से गंभीरता से लेने के मूड में नहीं है.

केसी त्यागी पार्टी में हैं या नहीं?

राजीव रंजन के बयान का सबसे अहम संकेत यही है कि केसी त्यागी के जेडीयू में सक्रिय होने पर ही सवाल खड़ा कर दिया गया है. पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं में भी इसे लेकर असमंजस है कि त्यागी की भूमिका आखिर क्या है. सूत्रों का कहना है कि यदि बयानबाज़ी का यह सिलसिला जारी रहा तो पार्टी उन पर कड़ा फैसला ले सकती है.

जेडीयू ने केसी त्यागी के बयान से किनारा किया.

अनुशासन बनाम व्यक्तिगत राय

केसी त्यागी का मामला जेडीयू के लिए सिर्फ एक नेता का नहीं, बल्कि पार्टी अनुशासन और राजनीतिक संदेश की विश्वसनीयता का है. जिस समय जेडीयू गठबंधन राजनीति में संतुलन साधने की कोशिश कर रही है, उस समय इस तरह के व्यक्तिगत बयान पार्टी के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं.

क्या सख्त फैसला लेगी जेडीयू?

केसी त्यागी का मामला अब सिर्फ एक नेता के बयान तक सीमित नहीं रहा. यह जेडीयू के लिए अनुशासन, गठबंधन धर्म और राजनीतिक संदेश की विश्वसनीयता से जुड़ा सवाल बन चुका है. आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि जेडीयू इस असहजता को नजरअंदाज करती है या फिर कोई सख्त राजनीतिक फैसला लेती है

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