Site icon अग्नि आलोक

सोम डिस्टलरी के संचालकों की तिजोरी भरने की कामना कर रहे राजनेता ?

Share

शासन किसी का भी हो सभी सोम के संचालकों के आगे नतमस्तक होते नजर आते हैं

भोपाल। एक समय था जब प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोम ग्रुप के एक कार्यक्रम में सोम डिस्टलरी के संचालकों की तिजोरी पर लक्ष्मी की कृपा बनी रहे की कामन की थी राजनेताओं की इस तरह की सोम के संचालकों की तिजोरी की कामना करने से उत्साहित होकर सोम डिस्टलरी के संचालक अरोरा बंधुओं ने जो कदम शराब कारोबार में बढ़ाये उसके चलते राज्य की यह स्थिति हो गई कि किसी का भी शासन हो उसके सत्ताधीश और प्रशासनिक अधिकारी सोम डिस्टलरी के पक्ष में आबकारी नीति बनाने में हमेशा तत्पर रहते थे तभी तो सोम डिस्टलरी के द्वारा जब बेतवा प्रदूषण को लेकर हंगामा खड़ा हुआ था तो उस समय विधानसभा की याचिका समिति ने सोम की फैक्ट्री और बेतवा प्रदूषण वाले प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करते हुए जो टिप्पणी की थी उसमें जो कुछ लिखा था वह आज भी सोम के संचालकों पर सटीक दिखता है इसका खुलासा हाल ही में मप्र शासन के आबकारी विभाग द्वारा निकाले गए एक आदेश में स्पष्ट दिखाई देता है जिसमें सोम के यहां बनने वाले टेंकरों आदि के संबंध में जिन अधिकारियों ने अपनी जांच रिपोर्ट में जो सोम के संचालकों के अनुसार रिपोर्ट बनाकर सोम डिस्टलरी में तमाम खामियां होने के बावजूद भी उसे बिना बाधा के हर बार लायसेंस रिन्यूअल होता रहा लेकिन अब पता नहीं इस सरकार के सत्ताधीशों और प्रशासन में बैठे अधिकारियों को क्या हो गया जो कल तक सोम डिस्टलर के संचालकों को खुश करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते थे आज वह उन्हीं के खिलाफ गड़े मुर्दे उखाड़ रहे हैं

इससे यह तो साबित हो गया कि सोम के संचालकों को प्रतिवर्ष सारे नियम कायदे कानून ताक में रखकर उनके लायसेंस का रिन्यूअल होता रहा और वह धड़ल्ले से अपने शराब के कारोबार को चलाते रहे। यही नहीं आज आबकारी विभाग अपने उन अधिकारियों के बारे में आदेश निकालकर उनके खिलाफ तमाम सवाल खड़े करने में लगा हुआ है लेकिन कल तक तो इसी आबकारी विभाग के अधिकारियों का यह आलम था तो उनकी कार्यशैली को देखकर विधानसभा की याचिका समिति ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि ऐसा नहीं लगा जनता के साथ उसने विश्वासघात किया ही नहीं बल्कि राजकोष को भी हानि पहुंचोन का काम किया ऐसी टिप्पणी आबकारी विभाग के अधिकारियों की याचिका समिति में की गई थी और यह सब खेल वर्षों तक चला आज जब शासन को सोम डिस्टलरी के संचालकों से दो हजार ३००.९७ लाख की वसूली उस स्थिति में करना है जबकि शासन का खजाना खाली है, देखना अब यह है कि आबकारी विभाग के अधिकारियों के द्वारा इस राशि में से कितनी धनराशि वसूलकर सरकारी खजाने में जमा की जाती है, लेकिन आबकारी विभाग की कार्यशैली को देखकर ऐसा कतई नहीं लगता कि वह सोम के संचालकों पर बकाया राशि का भुगतान कर पाएंगे आज भले ही आबकारी विभाग ने सोम के लाइसेंस को निरस्त कर दिया हो लेकिन आने वाले दिनों में न्यायालय से स्टे लेकर सोम डिस्टलरी के संचालक धड़ल्ले से अपना उत्पादन शुरू करेंगे ऐसी चर्चायें शराब कारोबारियों में चटकारे लेकर सुनी जा रही हैं कुल मिलाकर यह खेल केवल जनता को भ्रमित करने के लिये किया जा रहा है ऐसा लोगों का मानना है, इस खेल की हकीकत कुछ ही दिनों में समाने आएगी तब पता चलेगा कि शासन किसी का भी हो सभी सोम के संचालकों के आगे नतमस्तक होते नजर आते हैं  ।

Exit mobile version