भोपाल विधानसभा की कार्यवाही के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के बयान का वीडियो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है। वीडियो में मुख्यमंत्री शिवराज की तरफ इशारा करते हुए कमलनाथ कहते हैं, ‘कम से कम आपकी साइकिल हमें तो दिलवा दीजिए।’ इस पर शिवराज कहते हैं, ‘आपकी उम्र का लिहाज करता हूं। किसी भी कीमत पर आपको साइकिल नहीं दूंगा।’ दरअसल, कमलनाथ ने महंगे होते पेट्रोल-डीजल पर सवाल उठाते हुए शिवराज द्वारा पुरानी सरकारों के वक्त चलाई गई साइकिल को लेकर चुटकी ली थी।
कांग्रेस के नरेंद्र सलूजा ने इस पर कहा है, इस तरह विधानसभा की कार्यवाही का वीडियो सार्वजनिक करना नियमों के विरुद्ध है। विधानसभा किसी एक दल की नहीं होती। यह सभी दलों से मिलकर बनती है। यह सीधे-सीधे नियमों का उल्लंघन है।
यह विशेषाधिकार का मामला है। उन्होंने कहा कि शिवराज जी आपको विधानसभा की कार्यवाही का वीडियो ही वायरल करना था, तो नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ के सिलसिलेवार सारे आरोपों का व आपको दिए गए जवाब का भी वीडियो जारी करने का साहस दिखाना था। सिर्फ एक पक्ष का वीडियो जारी कर आप क्या बताना चाह रहे हैं?
सीएम ने आवेदन किया इसलिए उन्हें दिया : प्रमुख सचिव
इस मामले में विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह ने कहा कि विधानसभा के दौरान भाषण देने वाले का वीडियो उसके ही आवेदन करने पर उसे दिया जा सकता है। सीएम शिवराज ने इसके लिए आवेदन किया था, इसलिए उन्हें वीडियो दिया गया है। जन संपर्क विभाग ने भी यह वीडियो मांगा था, लेकिन उन्हें नहीं दिया गया।
कैमरा ले जाने पर है रोक, कार्यवाही का प्रसारण भी नहीं होता
देश में संसद की कार्यवाही का लाइव प्रसारण होता है लेकिन, मध्यप्रदेश में विधानससभा के प्रसारण को लेकर सरकार ने रोक लगा रखी है। केवल विधायक जो चाहता है, वह दिखाने का नियम बना रखा है।दर्शकों को अपने साथ दीर्घाओं में सुरक्षा अधिकारी द्वारा निषिद्ध वस्तुएं जैसे शस्त्र, विस्फोटक, कैमरा, लकड़ी, छाता, अटैची, कैस, हैंडबैग, पुस्तक और छपे हुए पोस्टर आदि ले जाने की अनुमति नहीं होगी।
अगर सदन की कार्यवाही लाइव स्ट्रीम नहीं होती तो यह सदन की प्रॉपर्टी
जैसे संसद की प्रोसीडिंग की लाइव स्ट्रीम होती है, वैसी ही विधान सभा की भी होती है। यदि प्रोसीडिंग की लाइव स्ट्रीमिंग नहीं हो रही है तो विधान सभा की प्रोसीडिंग हाउस की प्रॉपर्टी होती है। इसका उपयोग या दुरुपयोग या लीक व वायरल करने का हक़ CM और उनकी सरकार को कतई नहीं है। यह हाउस के अधिकारों का हनन है।
-विवेक तन्खा, राज्यसभा सदस्य एवं वरिष्ठ वकील सुप्रीम कोर्ट

