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ओबीसी पर राजनीति, एक तरफ CM का सम्मान तो दूसरी तरफ मध्य प्रदेश बंद

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मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर पिछड़ा वर्ग भी दो हिस्सों में बंट गया है। एक ही दिन शनिवार को दोनों धड़े अलग-अलग दिशा में बढ़ते नजर आ रहे हैं जिससे ओबीसी समाज भ्रमित हो सकता है। एक हिस्से में भाजपा समर्थन वाले ओबीसी के लोग शनिवार को सीएम शिवराज सिंह चौहान का सम्मान कर रहे हैं तो दूसरे हिस्से के लोग अपने रिजर्वेशन की लड़ाई के लिए इसी दिन मध्य प्रदेश बंद करने जा रहे हैं। 

सुप्रीम कोर्ट में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव के लिए पहले बिना ओबीसी आरक्षण के फैसला आया था लेकिन इसके बाद आदेश में संशोधन के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। इसमें 50 फीसदी कैप में ओबीसी आरक्षण के साथ नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव कराने का फैसला दिया। इससे मध्य प्रदेश का ओबीसी समाज दो हिस्सों में बंट गया जिसमें भाजपा के समर्थन वाले ओबीसी का धड़ा सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी मना रहा है। फैसले की तारीख को सीएम चौहान और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने भाजपा नेताओं के साथ मिलकर खुशी मनाई। अब 21 मई को सीएम शिवराज सिंह का सम्मान करने जा रहे हैं।

ओबीसी महासभा का मध्य प्रदेश बंद, कांग्रेस का साथ मिला
सुप्रीम कोर्ट के 50 फीसदी कैप में ओबीसी आरक्षण के साथ नगरीय निकाय व पंचायत चुनाव के फैसले को ओबीसी महासभा ने राज्य सरकार द्वारा अदालत में सही स्थिति नहीं रखने का नतीजा बताया। ओबीसी महासभा ने इसे पिछड़ा वर्ग के लिए नुकसान बताया और कहा कि इससे ओबीसी समाज को 14 फीसदी आरक्षण ही मिलेगा। ओबीसी, एससी, एसटी एकता मंच के अध्यक्ष लोकेंद्र गुर्जर ने कहा है कि सरकार फिर से सुप्रीम कोर्ट जाकर 50 फीसदी कैप को हटवाए क्योंकि यह केवल एजुकेशन और जॉब सेक्टर के लिए लागू होता है। मंच ने इसके बिना पंचायत चुनाव का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है। ओबीसी महासभा और एकता मंच ने 21 मई को मध्य प्रदेश बंद का आव्हान किया है जिसे कांग्रेस ने भी समर्थन दे दिया है।

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