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मंदसौर के अफीम किसान कर रहे हैं कई तरह की चुनौतियों का सामना

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शीतल रॉय

मंदसौर जिले को अफीम की खेती के लिए जाना जाता है। यह क्षेत्र वर्षों से अफीम उत्पादन का केंद्र रहा है, लेकिन आज किसान कई तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। हाल ही में मंदसौर की यात्रा के दौरान, हमने किसानों से बात की और उनकी परेशानियों को करीब से समझने की कोशिश की। अफीम की खेती का महत्वः अफीम (ओपियम) भारत में नियंत्रित फसलों में से एक है, जिसका उपयोग दवाइयों और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है। भारत विश्व में अफीम उत्पादन करने वाले चुनिंदा देशों में से एक है, और मंदसौर इस उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यहाँ के किसान पीढ़ियों से अफीम की खेती कर रहे हैं और यह उनकी आजीविका का प्रमुख स्रोत है। 

किसानों की समस्याएँ

मंदसौर के अफीम किसानों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा हैः

1. सरकारी नीतियाँ और लाइसेंसिंग की कठिनाई

अफीम की खेती भारत सरकार के सख्त नियंत्रण में होती है। हर साल किसानों को लाइसेंस के नवीनीकरण की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जो काफी जटिल और थकाऊ होती है। किसानों का कहना है कि कभी-कभी मामूली उत्पादन गिरावट पर भी उनका लाइसेंस रद्द कर दिया जाता है।

2. मौसम और जलवायु प्रभाव

अफीम की खेती मौसम पर बहुत निर्भर होती है। हाल के वर्षों में असामान्य बारिश, ओलावृष्टि और जलवायु परिवर्तन के कारण फसल को नुकसान पहुँचा है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक हानि हुई है।

3. कीमत और तस्करी की समस्या

सरकार द्वारा निर्धारित खरीद मूल्य कभी-कभी किसानों के लिए लाभकारी नहीं होता। इसके अलावा, अवैध व्यापार और तस्करी की समस्या के कारण किसानों को कठोर नियमों और पुलिस जांच का सामना करना पड़ता है।

4. बागवानी और वैकल्पिक फसलों की ओर झुकाव

अफीम की खेती की अनिश्चितताओं के कारण कई किसान अब वैकल्पिक फसलों, जैसे कि लहसुन, धनिया और अन्य मसालों की ओर रुख कर रहे हैं। लेकिन इन फसलों के बाजार मूल्य में उतार-चढ़ाव और बिचौलियों की दखलंदाजी से उनकी आमदनी अस्थिर बनी रहती है।

समाधान और संभावनाएँ

किसानों का मानना है कि सरकार को उनकी परेशानियों को हल करने के लिए कुछ ठोस कदम उठाने चाहिएःलाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाया जाए ताकि किसानों को हर साल परेशानी न उठानी पड़े। न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाए ताकि उन्हें उचित दाम मिल सके। बाजार में पारदर्शिता लाई जाए ताकि बिचौलियों और तस्करी की समस्या से बचा जा सके। नई तकनीकों और वैकल्पिक फसलों की जानकारी दी जाए ताकि किसान अन्य लाभकारी विकल्पों की ओर बढ़ सकें। मंदसौर के अफीम किसान अपनी परंपरागत खेती को बचाने और उसमें सुधार लाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सरकार और नीति-निर्माताओं को उनकी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए ताकि यह महत्वपूर्ण उद्योग और इससे जुड़े हजारों परिवारों की आजीविका सुरक्षित रह सके। उचित नीतियाँ और समर्थन मिलने पर मंदसौर की अफीम खेती फिर से समृद्ध हो सकती है।

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