Site icon अग्नि आलोक

पायलट का ‘पॉवर ‘ प्लान:आज जयपुर में किसान महापंचायत में पायलट का बड़ा शक्ति प्रदर्शन

Share

जयपुर

सचिन पायलट कल यानी शुक्रवार को जयपुर जिले के कोटखावदा में किसान महापंचायत के जरिए शक्ति प्रदर्शन करने वाले हैं। कोटखावदा की किसान महांपचायत में पायलट समर्थक बड़ी भीड़ जुटाने की तैयारियों में जुटे हैं। राहुल गांधी के दौरे में रूपनगढ की ट्रैक्टर रैली में पायलट के अपमान का मुद्दा उठने के बाद अब पायलट समर्थक लामबंद हो गए हैं। इसका असर कल की महापंचायत पर दिखना तय माना जा रहा है। कल की महापंचायत में सीएम अशोक गहलोत, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सहित गहलोत खेमे के कई नेताओं को भी निमंत्रण दिया गया है।

महापंचायत में पायलट समर्थक ज्यादातर विधायक जुटेंगे। पायलट समर्थक विधायक सोशल मीडिया पर महापंचायत में आने के लिए लोगों को निमंत्रण दे रहे हैं। पायलट समर्थक पिछले तीन-चार दिन से जयपुर, दौसा और टोंक के इलाकों में गांव गांव जाकर महापंचायत में आने का निमंत्रण दे रहे हैं।

पायलट की मैसेज देने की कवायद
पायलट समर्थकों ने किसान महापंचायत में बड़ी भीड़ जुटाने को प्रतिष्ठा का सवाल बना रखा है। राजनीतिक जानकारों के मुता​बिक जबसे कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने राहुल के दौरे में पायलट के अपमान का मुदृदा उठाया है तब से पायलट समर्थक विधायक फिर से लामबंद हो रहे हैं। राहुल के दौरे के बाद पायलट का यह पहला सार्वजनिक कार्यक्रम है। इससे पहले दौसा और बयाना में कृषि कानूनों के खिलाफ पायलट किसान महापंचायत कर चुके हैं। बयाना की महापंचायत में बड़ी संख्या में भीड़ जुटी थी।

गहलोत और उनके खेमे के नेताओं को भी निमंत्रण, लेकिन शायद ही कोई आए
कोटखावदा महापंचायत के लिए पायलट समर्थक वेदप्रकाश सोलंकी ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री गहलोत ओर उनके खेमे के नेताओं को भी महापंचायत में आने का निमंत्रण भेजा था। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से मिलकर भी महापंचायत में आने का न्योता दिया था। गहलोत समर्थक वरिष्ठ नेताओं को भी निमंत्रण दिया गया है। बताया जा रहा है कि गहलोत और उनके समर्थक इस महापंचायत में भी नहीं जाएंगे।

महापंचायतों के जरिए पायलट की ‘पॉवर रिगेन’ की तैयारी
पायलट अपने समर्थक विधायकों के इलाकों में केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ किसान महापंचायत कर रहे हैं। बताया जाता है कि बगावत और फिर सुलह के बाद पायलट अब जनता के बीच निकलकर पावर रिगेन का प्रयास कर रहे हैं। एक बड़े वर्ग में पायलट अपने प्रति सहानुभूति पैदा कर उसे राजनीतिक फायदे में बदलने का भी प्रयास कर रहे हैं। जिस तरह प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में दौरे कर रही हैं उसी पैटर्न को पायलट ने अपनाया है। किसान आंदोलन से कांग्रेस के नेता उतने सक्रिय रूप से नहीं जुड़े हैं। पायलट इसी का फायदा उठाकर लगातार महांपचायत करके किसान आंदोलन में अपना स्पेस बनाने की रणनीति पर चल रहे हैं। सचिन पायलट आगे भी किसान महांपचायतें जारी रखने वाले हैं।

Exit mobile version