वैसे तो विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह और नंदी हॉल में प्रतिदिन ही मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई देती है, लेकिन आज महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह और नंदी हॉल में एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसमें पुजारी और महंत के बीच शुरू हुई बातचीत अभद्र भाषा तक पहुंच गई और देखते ही देखते दोनों पक्षों के लोग आमने-सामने हो गए. इस मामले की शिकायत श्री महाकालेश्वर मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक तक भी पहुंची है, जो कि मामले में जांच करवाने की बात कह रहे हैं. जबकि अधिकारी वर्ग ऐसे प्रयासों में जुटा हुआ है, जिससे कि पुजारी और महंत दोनों पक्षों की आपस में सुलह हो सके.पंडित महेश पुजारी ने बताया कि महाकाल मंदिर की अपनी एक परंपरा है. बाबा महाकाल से बड़ा कोई नहीं है. मंदिर के गर्भगृह और नंदी हॉल की अपनी मयार्दा है, जहां पर भगवान विराजमान हैं. भगवान के सामने कोई भी सिर पर पगड़ी, टोपी पहनकर या गमछा डालकर नहीं आता.
श्री महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में आज पुजारी पंडित महेश शर्मा महाकाल को जल अर्पित कर रहे थे, तभी ऋणमुक्तेश्वर के महंत महावीरनाथ गर्भगृह में दर्शन करने पहुंचे. इस दौरान उनके साथ गोरखपुर से आए संत शंकरनाथ भी थे. मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने जब महंत महावीरनाथ और संत शंकरनाथ को देखा तो पगड़ी और कपड़ों पर आपत्ति जताई, लेकिन कहासुनी से शुरू हुआ यह विवाद देखते ही देखते इतना बढ़ गया कि अभद्र भाषा का प्रयोग होने लगा. इस विवाद के दौरान कुछ संतों और पुजारियों ने विवाद खत्म कराने की कोशिश भी की, लेकिन विवाद खत्म नहीं हुआ. घटना की जानकारी मिलते ही श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति ने दोनों ही पक्षों को जांच करने का भरोसा दिया है.
मंदिर की मर्यादा से खिलवाड़ नहीं होने देंगे- महेश पुजारी
पंडित महेश पुजारी ने बताया कि महाकाल मंदिर की अपनी एक परंपरा है. बाबा महाकाल से बड़ा कोई नहीं है. मंदिर के गर्भगृह और नंदी हॉल की अपनी मयार्दा है, जहां पर भगवान विराजमान हैं. भगवान के सामने कोई भी सिर पर पगड़ी, टोपी पहनकर या गमछा डालकर नहीं आता. मैं बस उसी नियम का पालन करवा रहा था, जिस पर मेरे साथ विवाद किया गया. महावीरनाथ ने कई बार मंदिर की मयार्दा को भंग किया है. महावीरनाथ आज भी अनधिकृत वस्त्र पहनकर मंदिर में जल चढ़ा रहे थे. मैंने विरोध किया तो महावीरनाथ ने न सिर्फ मुझे अपशब्द कहे, बल्कि मंदिर समिति द्वारा बनाए गए नियमों का उल्लंघन भी किया.
क्या बोले महावीरनाथ?
महाकाल मंदिर के गर्भगृह में पगड़ी पहनकर जाने के विवाद में महंत महावीरनाथ ने बताया कि साधु अपनी जटाएं बांधकर रखने के लिए सिर पर फेटा (पगड़ी) बांधते हैं. यह कोई सिर का ताज नहीं है. पुजारी महेश शर्मा ने फेटा उतरवाने के लिए धक्का-मुक्की की, जो कि सरासर गलत है. इस घटना के बाद महंत रामेश्वर दास आश्रम में सभी संत इकट्ठा हुए और पुजारी पंडित महेश शर्मा के खिलाफ कड़ा विरोध जताया. भर्तृहरि गुफा के गादीपति पीर महंत रामनाथ महाराज ने मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक से सीसीटीवी फुटेज दिखाने की मांग की, ताकि यह पता चल सके कि विवाद किसने शुरू किया और किसने अभद्र भाषा का प्रयोग किया.
दोनों पक्षों के बीच सार्थक हल निकालेंगे- प्रशासक
मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि मंदिर के पुजारी और एक संत के बीच विवाद की स्थिति बनी है, जिसकी शिकायत मिलने के बाद सूचना को गंभीरता से लेकर घटना की जांच की जा रही है. हमारा प्रयास है कि दोनों पक्षों से बातचीत कर जल्द ही सार्थक हल निकाला जाए.

