उज्जैन
उज्जैन के डीपीएस (दिल्ली पब्लिक स्कूल) की प्रिंसिपल की सड़क हादसे में मौत हो गई। उनकी कार अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गई। हादसा मक्सी रोड स्थित जयवंतपुरा गांव के पास सोमवार सुबह हुआ। हादसे के बाद प्रिंसिपल को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इंदौर की रहने वाली रेखा (59) पति शशिधर पिल्लई शहर के निपानिया क्षेत्र में रहती थीं। वह रोजाना उज्जैन स्थित डीपीएस स्कूल आती-जाती थीं। वे यहां पिछले 4 साल से प्रिंसिपल के पद पर पदस्थ थीं। वह रोजाना इंदौर से उज्जैन अप-डाउन करती थीं।
डीपीएस की प्रिंसिपल कार खुद ड्राइव कर इंदौर से उज्जैन के लिए निकली थी। रास्ते में कार सड़क से नीचे उतरकर पेड़ से टकरा गई।
रोजाना की तरह सोमवार सुबह करीब 8 बजे भी वह उज्जैन के लिए कार से निकलीं। कार वह खुद ही ड्राइव कर रही थीं। इसी दौरान ग्राम धतरावदा से करोंदिया के बीच अचानक कार कार सड़क से नीचे उतर कर पेड़ से टकरा गई। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। रेखा रोजाना इसी रास्ते से जाती थीं। इस कारण कुछ लोग उन्हें पहचानने भी लगे थे। कार को क्षतिग्रस्त देख लोगों ने उनके ड्राइवर अरुण को भी सूचना दी।
हादसे के बाद कार भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
रोजाना ड्राइवर के साथ आती थीं, आज अकेली निकली
ड्राइवर अरुण ने बताया कि मैडम हर शनिवार को कार खुद ड्राइव कर ले जाती थीं। सोमवार को खुद ही ड्राइव कर स्कूल आती थीं। इसी क्रम में सोमवार को भी वह सुबह स्कूल आ रही थीं। अरुण ने कहा- चूंकि मेरा घर उज्जैन में ही है। सोमवार शाम को उन्हें इंदौर ले जाता हूं। फिर रोजाना शनिवार तक मैं ही उन्हें लाता-ले जाता था। मेरा घर ग्राम करोदिया में है, जहां मैं रुक जाता हूं।
आमतौर पर रोजाना ड्राइवर अरुण ही प्रिंसिपल को लाता-ले जाता था, लेकिन सोमवार को वह खुद अकेली ही कार ड्राइव कर ले गई थीं।
बेटा सिंगापुर में करता है नौकरी
प्रिंसिपल के परिवार में पति शशिधर पिल्लई और एक बेटा है। बेटा सिंगापुर में नौकरी करता है। पति रिटायर हो चुके हैं। बेटे को भी घटना की सूचना दे दी गई है। नागझिरी पुलिस ने बताया कि रेखा पिल्लई के शव को पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया है। मामले की जांच की जा रही है।
मैथ्स सबजेक्ट की एक्सपर्ट थीं रेखा
डीपीएस स्कूल की डायरेक्टर माधवी मिश्रा ने बताया कि एक बारगी हमें विश्वास नहीं हो रहा कि रेखा मैडम हमारे बीच नहीं हैं। 1 जनवरी को उन्हें प्रिंसिपल पद के पांच साल पूरे हुए थे। 10वीं,11वीं व 12वीं की मैथ्स और इंग्लिश में उनकी इतनी अच्छी कमांड थी, उज्जैन में शायद ही किसी टीचर की हो। वो खुद चाहती थीं कि बच्चों को गणित का ज्ञान दे सकें। जॉइनिंग के बाद दो साल तक उज्जैन में रहीं। इसके बाद इंदौर रहने लगी थीं, तभी से अप डाउन करती थीं।
बेस्ट टीचर का अवॉर्ड भी मिला था
माधवी मिश्रा ने बताया कि रेखा मैडम सुबह 8.30 बजे आती थीं। शाम को चली जाती थीं। उज्जैन आने से पहले नोएडा में डीपीएस में पदस्थ थीं। यहां बेस्ट टीचर का अवॉर्ड भी उन्हें मिला था। उनके पति का रिटायरमेंट हुआ, तो वे इंदौर रहने आ गए। इस दौरान उन्होंने उज्जैन डीपीएस जॉइन किया था। वह बहुत बुद्धिजीवी थीं। 16 दिसंबर को हुए एनुअल फंक्शन में भी उन्होंने ऐसी स्क्रिप्ट बनाई कि लोगों ने बहुत पसंद आई थी। उनकी मौत की खबर सुनकर स्टाफ के साथ स्कूल के बच्चों में भी शोक का माहौल है।

