गत वर्ष प्रदेश में राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा एकत्र करने के नाम पर अल्पसंख्यक समुदाय पर की गई हिंसा और अवैधानिक तोड़ फोड़ करने वाले आरोपीयों पर कार्यवाही करने , जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इरादतन कर्तव्य पालन न करने पर उन्हें दण्डित करने तथा पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग को लेकर 22 जुलाई 20 21 को इंदौर उच्च न्यायालय की डिविजन बेंच के सामने एक जनहित याचिका दायर की गई। माननीय न्यायाधीश श्री सुजयपाल एवं श्री अनिल वर्मा ने तथ्यों को सुनकर प्रदेश सरकार को जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया है।
याचिकाकर्ता की अभिभाषक शन्नो शुगुफ्ता खान ने बताया कि समाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार और प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय सचिव विनीत तिवारी की और से प्रस्तुत याचिका का आधार उस रिपोर्ट को बनाया गया है जिसे सामाजिक कार्यकर्ताओं के नौ सदस्यीय दल ने इस वर्ष की जनवरी माह में सार्वजनिक किया था। जांच दल ने उन स्थानों पर पहुंचकर तथ्य एकत्र किये थे।
याचिका में प्रदेश शासन के मुख्य सचिव, गृह मंत्रालय के प्रिंसिपल सचिव, डीजीपी भोपाल, आई जी उज्जैन रेंज के अलावा इंदौर, उज्जैन, मंदसोर तथा अलीराजपुर के कलेक्टरों को प्रतिवादी बनाया गया है। अभिभाषक शन्नो शुगुफ्ता खान ने याचिका में कहा कि गत वर्ष दिसंबर माह में राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा एकत्र करने के नाम पर मुस्लिम बहुल क्षेत्रों इंदौर के चंदनखेडी़, उज्जैन के बेगमबाग तथा मंदसोर जिले के ग्राम डोराना में रैलियां निकाली गई, अल्पसंख्यक समाजजनों के घरों, धर्मस्थल पर तोड़फोड़ की गई । रैली में गंदे, अपमानजनक नारे लगा कर लोगों को उकसाया गया। रैली में शामिल लोगों के पास बड़ी तादाद में अवैध हथियार भी थे। प्रशासन इन घटनाओं को रोक पाने में विफल रहा था। अलीराजपुर में भी इसाई धर्मावलंबियों पर भी हिंसक कार्रवाई हुई थी।
याचिका में उच्च न्यायलय से अनुरोध किया गया कि वह अपनी निगरानी में एक स्वतंत्र तथ्या अन्वेषक दल वहां भेजें जहां ये सांप्रदायिक घटनाएं हुई थी। हिंसा में संलग्न सभी लोगों तथा बिना अनुमति के रैली निकालने वालों के विरुद्ध अपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाएं। जिनके घरों में तोड़फोड़ और लूट की गई सभी पीड़ितों को सरकार मुआवजा दे। उन पुलिस अधिकारियों पर भी कार्यवाही की जाए जिनकी उपस्थिति में हिंसा की वारदात हुई और उन्होंने घटनाओं को नही रोका। उन प्रशासनिक अधिकारियों पर भी कार्यवाही की जाए जिनकी देखरेख में बिना किसी नियम कानून की प्रक्रिया का पालन कीये घरों को तोड़ा गया था। उल्लेखनीय है कि इस संबंध में एक याचिका प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी उच्च न्यायालय में प्रस्तुत की थी।
हरनाम सिंह (92298 47950)

