इंदौर. दीवाली (Diwali 2025) पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है. उन्हें प्रसन्न करने के लिए चांदी के सिक्कों को पूजा स्थान पर रखा जाता है. हर साल देशभर में बड़ी संख्या में चांदी के सिक्कों की बिक्री होती है, इसमें खासकर 10 से 100 ग्राम के चांदी के सिक्कों की भारी डिमांड देखने को मिलती है लेकिन मध्य प्रदेश के इंदौर में इससे इतर चांदी के ऐसे प्राचीन सिक्कों की डिमांड देखने को मिलती है, जिनपर क्वीन विक्टोरिया होती हैं. यह शुद्ध 22 कैरेट का चांदी का सिक्का होता है, जिसे अंग्रेजों ने चलाया था. खासकर धनतेरस (Dhanteras 2025) के दिन लोग इन सिक्कों की खरीदारी करने बाजार आते हैं.
दरअसल कई बुजुर्गों का मानना है कि प्राचीन सिक्के पूजा में रखने से घर में धन-धान्य बना रहता है और घर-परिवार में बरकत होती है. सर्राफा व्यापारी निर्मल वर्मा के पास क्वीन विक्टोरिया वाले कई प्राचीन सिक्के हैं. ये सिक्के काफी दुर्लभ हैं, जिन्हें उन्होंने सहेज कर रखा हुआ है. इस एक सिक्के की कीमत करीब 2200 से 2500 रुपये के करीब होती है. लोग आमतौर पर रानी और राजा दोनों छपे हुए सिक्के लेते हैं. अलग-अलग साल के राजा और रानी के सिक्के आपको बाजार में देखने को मिल जाएंगे.
चांदी के ब्रिटिश कालीन सिक्के
ये सभी सिक्के ब्रिटिश कालीन हैं. जब भारत में ब्रिटिश राज हुआ करता था और ब्रिटेन की क्वीन रानी विक्टोरिया हुआ करती थीं, तब यह एक रुपये का सिक्का चलता था, जो करीब 116.2 ग्राम का होता है. उनके पास ऐसे ही 50 पैसे और 25 पैसे के सिक्के भी उपलब्ध हैं. क्वीन विक्टोरिया वाले ये सिक्के साल 1810 से 1940 तक के मिल जाएंगे, जब ब्रिटिश शासन था.
चांदी के बिस्किट की भी डिमांड
निर्मल वर्मा ने कहा कि अब ट्रेंड बदल चुका है. अब लोग 10 ग्राम, 20 ग्राम के सिक्के या फिर 50 ग्राम या 100 ग्राम के चांदी के बिस्किट खरीदना पसंद करते हैं और उन्हें लक्ष्मी पूजन में रखते हैं. कई लोग 20-30 सिक्के भी एक साथ खरीदकर माता को पूजन में चढ़ाते हैं.

