लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जून 2025 में भोपाल दौरे पर आएंगे। इस दौरान वह जातिगत जनगणना को लेकर आयोजित होने वाले प्रदेशव्यापी जनजागरूकता अभियान और बड़े सम्मेलन में शामिल होंगे। यह जानकारी मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने गुरुवार, 1 मई को भोपाल स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी।
पटवारी ने कहा कि राहुल गांधी ने बीते 11 वर्षों में करीब दो लाख बार जातिगत जनगणना की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि बीजपी और केंद्र सरकार के नेताओं ने इस मुद्दे पर विरोधाभासी और अपमानजनक बयान दिए हैं।
बीजेपी पर पटवारी के तीखे हमले
जीतू पटवारी ने बताया कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि जातियों की बात करना पाप है और जो जातियों की बात करता है, वह पापी है। योगी आदित्यनाथ ने कहा था ‘बटोगे तो कटोगे’ और नितिन गडकरी ने कहा था ‘जो करेगा जात-पात की बात, उसे मारूंगा लात’।”
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी जातिगत जनगणना के विरोध में बयान दिए हैं। मोहन यादव ने कहा था कि देश में सिर्फ चार जातियां हैं-किसान, युवा, गरीब और महिला।
बड़ा सम्मेलन, बड़ा संदेश
जीतू पटवारी ने कहा कि भोपाल में प्रस्तावित सम्मेलन के जरिए कांग्रेस जातिगत जनगणना को लेकर जनचेतना फैलाने का काम करेगी। सम्मेलन में सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भागीदारी रहेगी।
राहुल ने जातिगत जनगणना को बनाया चर्चा का मुद्दा
राहुल गांधी ने जातिगत जनगणना को चर्चा का मुख्य मुद्दा बना दिया है। पटवारी ने बताया कि उन्होंने इसे सामाजिक समानता का आधार बनाकर न सिर्फ राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बनाया, बल्कि भाजपा की वंचित-विरोधी नीतियों की असलियत भी उजागर कर दी। 2023 से 2024 तक उन्होंने संसद, रैलियों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया।
तेलंगाना के जातिगत सर्वेक्षण को एक खुला और समावेशी मॉडल बताते हुए, उन्होंने 50% आरक्षण की सीमा हटाने की मांग उठाकर भाजपा की दलित और पिछड़ा वर्ग के खिलाफ मानसिकता को चुनौती दी है। यह राहुल गांधी की दृढ़ इच्छा और मध्यप्रदेश कांग्रेस का समर्थन था, जिसने बीजेपी को इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए मजबूर किया।
पटवारी ने कहा कि जातिगत जनगणना की यह जीत राहुल गांधी की उस लंबी लड़ाई का नतीजा है, जिसमें उन्होंने बार-बार बीजेपी सरकार की जनविरोधी नीतियों को न सिर्फ उजागर किया, बल्कि उन्हें वापस लेने के लिए मजबूर भी किया।

