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लोकसभा में ‘महायुद्ध’ पर राहुल गांधी की स्पीकर के नाम चिट्ठी,’विपक्ष की आवाज दबाना लोकतंत्र पर कलंक’

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नई दिल्ली: संसद में मंगलवार को भी सत्ता पक्ष और विपक्ष में टकराव देखने को मिला. लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस हुई. विवाद की जड़ पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के अंश बने. राहुल गांधी इन अंशों को सदन में पढ़ना चाहते थे, जिस पर सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई. इस हंगामे के बीच राहुल गांधी ने स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र लिखकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है. पत्र में उन्होंने पूरे घटनाक्रम को इसे लोकतंत्र के लिए ‘कलंक’ बताया.
सदन में क्यों हुआ विवाद?
राहुल गांधी ने सदन में एक मैग्जीन का लेख दिखाते हुए चीन सीमा विवाद पर सरकार को घेरने की कोशिश की. उन्होंने दावा किया कि यह डॉक्यूमेंट 100% ऑथेंटिक है और वे इसकी पूरी जिम्मेदारी लेते हैं. हालांकि, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने यह कहते हुए विरोध किया कि जो किताब अभी प्रकाशित ही नहीं हुई है, उसके अंश सदन में कोट नहीं किए जा सकते. स्पीकर ओम बिरला ने नियम 349 का हवाला देते हुए राहुल गांधी को उन अंशों को पढ़ने से रोक दिया. इसके बाद सदन में भारी शोर-शराबा हुआ और कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी.

स्पीकर को लिखे पत्र में राहुल गांधी के बड़े आरोप?

राहुल गांधी ने अपने पत्र में लिखा कि स्पीकर के निर्देशानुसार उन्होंने आज सदन में दस्तावेज को ऑथेंटिकेट (प्रमाणित) कर दिया था. संसदीय परंपराओं के अनुसार, एक बार सदस्य द्वारा जिम्मेदारी लेने के बाद उसे बोलने की अनुमति दी जानी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बोलने से रोकना सिर्फ एक कन्वेंशन का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह जानबूझकर राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विपक्ष को चुप कराने की कोशिश है. पत्र में यह भी कहा गया कि संसदीय इतिहास में पहली बार नेता प्रतिपक्ष को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने से जबरन रोका गया है.

संसद के बाहर राहुल गांधी का ‘सरेंडर’ वाला वार?
संसद के बाहर मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ हैं और उन पर भारी दबाव है. राहुल ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील के जरिए देश के किसानों का खून-पसीना बेच दिया गया है. उन्होंने यह भी दावा किया कि एप्स्टीन फाइल्स और अडानी मामले के कारण सरकार डरी हुई है और इसी दबाव के चलते उन्हें संसद में सच बोलने से रोका जा रहा है.
विपक्ष के 8 सांसद सस्पेंड, लोकतंत्र पर सवाल?
इस हंगामे का नतीजा यह हुआ कि सदन में कागज फाड़ने और शोर मचाने के आरोप में कांग्रेस के 8 सांसदों को शेष बजट सत्र के लिए सस्पेंड कर दिया गया. निलंबित सांसदों में हिबी ईडन, मणिकम टैगोर और अमरेंद्र सिंह राजा वडिंग जैसे बड़े नाम शामिल हैं. विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार बहुमत के जोर पर सच्चाई को दबाना चाहती है, जबकि सरकार का तर्क है कि राहुल गांधी नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं और सदन की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं.

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