लोकसभा की तारीख में आज एक दिलचस्प दिन है। एक तरफ राहुल गांधी की दोषसिद्धि पर रोक लगी है, तो दूसरी तरफ बीजेपी सांसद रामशंकर कठेरिया को 2 साल की सजा मिली है।अब सवाल है कि पहले राहुल गांधी की सदस्यता बहाल होगी या रामशंकर कठेरिया की सदस्यता छीनी जाएगी।

सबसे पहले जानिए भाजपा सांसद रामशंकर कठेरिया को किस मामले में सजा सुनाई गई है…
5 अगस्त को MP/MLA कोर्ट ने इटावा से भाजपा सांसद रामशंकर कठेरिया को 2 साल के कारावास और 50 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। जिस मामले में कठेरिया को सजा सुनाई गई है, वह 16 नवंबर 2011 की दोपहर करीब 12.10 बजे की है।
बिजली कंपनी टोरंट पावर लिमिटेड, आगरा के मैनेजर भावेश रसिक लाल शाह बिजली चोरी से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहे थे। ये सुनवाई शहर के साकेत मॉल स्थित ऑफिस में चल रहा था। तभी स्थानीय सांसद रामशंकर कठेरिया 10-15 समर्थकों के साथ आए और भावेश रसिक लाल शाह के साथ मारपीट शुरू कर दी।
इसमें शाह को काफी चोटें आई थीं। इस घटना की टोरंट पावर के सुरक्षा निरीक्षक समेधी लाल ने हरीपर्वत थाने में तहरीर दी थी। इस पर रामशंकर कठेरिया और उनके समर्थकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। थाना हरीपर्वत पुलिस ने कठेरिया के खिलाफ ही कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। इसी मामले में गवाही और बहस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद फैसला सुनाया गया है।
सजा सुनाए जाने के कितने दिनों बाद खत्म होती है संसद सदस्यता…
पहले के 3 मामलों से ये समझने की कोशिश करते हैं कि कोर्ट से सजा सुनाए जाने के कितने दिनों के बाद किसी सांसद की सदस्यता समाप्त होती है…
1. लालू यादव- सजा सुनाए जाने के 22 दिन बाद गई सदस्यता
30 सितंबर 2013 को सीबीआई स्पेशल कोर्ट रांची ने लालू यादव को चारा घोटाले में चार साल के जेल की सजा सुनाई। 21 अक्टूबर 2013 को लोकसभा सचिवालय ने उनकी सांसद सदस्यता को खत्म किया।
चारा घोटाले में दोषी पाए जाने के बाद 2013 में लालू यादव की सांसदी चली गई थी।
2. रशीद मसूद- सजा सुनाए जाने के 20 दिन बाद गई सदस्यता
1 अक्टूबर 2013 को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने MBBS सीट घोटाले में कांग्रेस के सांसद रशीद मसूद को 4 साल की सजा सुनाई। 21 अक्टूबर 2013 को राज्यसभा से रशीद मसूद की सदस्यता समाप्त कर दी गई। कांग्रेस ने उन्हें यूपी से राज्यसभा सांसद बनाया था।
ये रशीद मसूद की तस्वीर है। एमबीबीएस सीट घोटाले में दोषी पाए जाने के बाद इनकी सांसदी चली गई थी।
3. राहुल गांधी- सजा सुनाए जाने के 24 घंटे में गई सदस्यता
23 मार्च 2023 को सूरत के सेशन कोर्ट ने राहुल को मोदी सरनेम मानहानि मामले में दोषी ठहराया था। उन्हें दो साल जेल की सजा सुनाई थी। 24 मार्च को उन्हें लोकसभा के सदस्य के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया गया था।
रशीद मसूद और लालू यादव की संसद सदस्यता खत्म करने में भले ही तीन सप्ताह का समय लगा हो, लेकिन लोकसभा सचिवालय ने राहुल गांधी की सदस्यता अगले ही दिन खत्म कर दी थी। यही वजह है कि अब कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह कह रहे हैं कि- ‘राहुल गांधी की 24 घंटे में संसद सदस्यता गई थी, अब कठेरिया पर फैसला कब होगा?’
संसद सदस्यता खत्म करने के नियम क्या हैं और कितना समय लगता है?
लोकसभा के महासचिव रहे पीडीटी आचार्य के मुताबिक किसी संसद सदस्य की सदस्यता जन प्रतिनिधित्व अधिनियम- 1951 के सेक्शन 8(3) के तहत रद्द की जाती है।
इस नियम के तहत जब सदस्य को किसी आपराधिक मामले में दोषी ठहराया जाता है और उसे 2 साल या उससे ज्यादा सजा मिलती है, तो उसकी सदस्यता रद्द की जाती है। नियम के तहत जिस दिन सदस्य को दोषी ठहराया गया है, उसी दिन से सदस्यता रद्द की जा सकती है।
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम- 1951 के सेक्शन 8 (3) में लिखा है कि ‘He shall be disqualified’ इसका अर्थ हुआ कि कोई अथॉरिटी ही सदस्य को अयोग्य ठहराएगी। ये अथॉरिटी कौन है, ये समझने के लिए हमें संविधान के आर्टिकल-103 को देखना होगा। आर्टिकल-103 के मुताबिक जब भी किसी संसद सदस्य की सदस्यता पर सवाल उठता है तो इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा और राष्ट्रपति ही इस पर फैसला करेंगे।
राहुल गांधी फिर से सांसद कब बनेंगे?
इस सवाल का जवाब कांग्रेस नेता अधीर रंजन के इस बयान में मिलता है-
‘शुक्रवार को स्पीकर से राहुल की सदस्यता को लेकर बात की थी, जिसके बाद स्पीकर ने अधीर रंजन को आज (शनिवार) का समय दिया था। अधीर रंजन के मुताबिक, चिट्ठी पर साइन तो कर दिया गया, लेकिन स्टैंप नहीं लगा है।’
कांग्रेस की मांग है कि जिस रफ्तार से उनकी सदस्यता छीनी गई, उसी रफ्तार से वापस दी जानी चाहिए।
पहले के मामले से समझते हैं….
सांसद मोहम्मद फैजल: 55 दिनों बाद बहाल हुई संसद सदस्यता
लक्षद्वीप के सांसद मोहम्मद फैजल को कवारत्ती में एक सत्र अदालत ने हत्या के प्रयास के मामले में दोषी ठहराया। उन्हें 10 साल की जेल की सजा की सजा सुनाई गई। इसके बाद लोकसभा सचिवालय ने 13 जनवरी 2023 को एक अधिसूचना जारी कर उनकी सदस्यता को खत्म कर दिया।
25 जनवरी को केरल हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगा दी थी। इसके बाद फैजल ने हाईकोर्ट के आदेश को आधार बनाकर लोकसभा सचिवालय से अपनी सदस्यता दोबारा बहाल करने की मांग की।
इस बीच चुनाव आयोग ने उनकी लोकसभा सीट पर उपचुनाव का भी ऐलान कर दिया था। फैजल ने चुनाव आयोग के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सुप्रीम कोर्ट में 29 मार्च को इस मामले में सुनवाई होनी थी, लेकिन इससे पहले ही लोकसभा सचिवालय ने उनकी संसद सदस्यता बहाल कर दी।
संसद सदस्यता बहाल होने के नियम क्या हैं?
एक इंटरव्यू में पूर्व लोकसभा महासचिव पीडीटी आचारी कहते हैं कि किसी सांसद को 2 साल से ज्यादा की सजा सुनाए जाने पर संसद सदस्यता स्वतः खत्म हो जाती है। ऐसे में राहुल के कन्विक्शन पर स्टे लगाए जाने के बाद उनकी संसद सदस्यता बहाल हो गई है।
सदस्यता बहाल होने की जानकारी लोकसभा सचिवालय अधिसूचना जारी करके देता है। इसमें कुछ घंटों से कुछ महीने भी लग सकते हैं। अधिसूचना जारी होने के बाद ही सांसदों के बैठने की जगह और एंट्री पास आदि इश्यू होते हैं।