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रेलवे ने हाथियों के लिए रोक दी गई 1 दो नहीं बल्कि 12 ट्रेनें

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झारखंड-ओडिशा बॉर्डर पर रेलवे ने 22 जंगली हाथियों के झुंड को सुरक्षित पार कराने के लिए करीब दर्जनभर ट्रेनों की आवाजाही रोक दी

झारखंड और ओडिशा की सीमा पर शनिवार को रेलवे ने एक ऐसा कदम उठाया, जिसने सबका ध्यान खींच लिया. करीब दर्जनभर लंबी दूरी की ट्रेनों को कुछ घंटों के लिए रोक दिया गया. वजह थी, जंगल से भटककर आए 22 जंगली हाथियों का झुंड, जो रेलवे ट्रैक के बेहद करीब पहुंच गया था.

दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर डिविजन के अफसरों को शुक्रवार रात देर से सूचना मिली कि बिरसा और डी केबिन सेक्शन के बीच हाथियों का एक बड़ा झुंड देखा गया है. जैसे ही यह खबर फील्ड अफसरों ने रेलवे कंट्रोल को दी, रेलवे ने तुरंत ऐक्शन लिया..

रात में ही ट्रेनों की आवाजाही को कुछ घंटों के लिए रोक दिया गया, ताकि हाथियों को सुरक्षित रास्ता मिल सके. रेलवे अफसरों के मुताबिक, ट्रेनों को करीब 3 से 4 घंटे तक अलग-अलग समय पर रोका गया, जब तक पूरा झुंड ट्रैक पार नहीं कर गया.

पहले हाथियों की सुरक्षा…
चक्रधरपुर डिविजन के सीनियर डिविजनल कमर्शियल मैनेजर आदित्य कुमार चौधरी ने बताया, “जैसे ही हमें 22 हाथियों के झुंड की जानकारी मिली, तुरंत ट्रेनों को रोकने का फैसला किया गया. हमारा मकसद था कि कोई हादसा न हो और हाथी भी सुरक्षित रहें.”
उन्होंने कहा कि रेलवे हमेशा इस कोशिश में रहता है कि जंगली जानवरों और ट्रेनों की आवाजाही में तालमेल बना रहे. यह कदम उसी दिशा में उठाया गया है. वहीं, ये घटना जब सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो लोगों ने रेलवे की जमकर तारीफ की. एक शख्स ने लिखा- वाह रेलवे.
कौन-कौन सी ट्रेनें रोकी गईं
इस दौरान कई बड़ी ट्रेनें अस्थायी रूप से रोकी गईं, जिनमें टाटानगर–बिलासपुर एक्सप्रेस (18113), हावड़ा–मुंबई मेल (12810), ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस (12102) और आजाद हिंद एक्सप्रेस (12130) शामिल थीं.
वहीं डाउन ट्रैक की तरफ आने वाली ट्रेनों जैसे सीएसएमटी–हावड़ा दूरंतो एक्सप्रेस, मुंबई–हावड़ा मेल, बिलासपुर–टाटानगर एक्सप्रेस और लोकमान्य तिलक–शालीमार एक्सप्रेस को भी कंट्रोल किया गया ताकि हाथियों को सुरक्षित पार करवाया जा सके.
जब ट्रैक पार कर गया झुंड, तब चली ट्रेने
शनिवार सुबह तक हाथियों का पूरा झुंड ट्रैक पार कर चुका था. उसके बाद ट्रेनों की आवाजाही फिर से शुरू की गई. रेलवे के इस कदम की स्थानीय लोगों और वन विभाग के अधिकारियों ने सराहना की. उनका कहना है कि अगर रेलवे ने तुरंत फैसला न लिया होता तो बड़ी दुर्घटना हो सकती थी.

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