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चिंतन शिविर से पहले इस्तीफा दे सकते हैं राजस्थान के जलदाय मंत्री महेश जोशी

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एस पी मित्तल, अजमेर

यह पहला अवसर नहीं है, जब किसी मंत्री के बेटे पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हुआ है। मंत्री, सांसद, विधायक आदि के पुत्रों पर बलात्कार हत्या मारपीट लूट आदि अपराधों के मुकदमे दर्ज होते रहे हैं। असल में जब सत्ता का स्वाद बेटों को चखाया जाता है, तब बुराइयां घर में ही घुसती हैं। सब जानते हैं कि राजस्थान के जलदाय मंत्री महेश जोशी ने भी अपने पुत्र रोहित को सत्ता का स्वाद जमकर चखाया। जाशी के जयपुर शहर के निर्वाचन क्षेत्र की संपूर्ण बागडोर रोहित जोशी के पास ही थी। मतदाता और कांग्रेस के कार्यकर्ता भी रोहित को ही पिता का उत्तराधिकारी मानते थे। महेश जोशी के प्रभाव के कारण ही रोहित को प्रदेश कांग्रेस की कार्य समिति का सदस्य भी बनाया गया। रोहित ने सत्ता का ऐसा स्वाद चखा कि वह अपनी पत्नी को ही भूल गया। रोहित अपनी पत्नी के बजाए महिला मित्र के साथ ज्यादा रहने लगा। अब इसी महिला मित्र ने रोहित पर बलात्कार का आरोप लगा दिया है। इतना ही नहीं दिल्ली के सदर पुलिस थाने पर एफआईआर दर्ज करवाने के बाद मजिस्ट्रेट के समक्ष 164 में बयान भी दर्ज करवा दिए हैं। यानी अब रोहित पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। हो सकता है कि अगले एक दो दिन में ही दिल्ली पुलिस रोहित को गिरफ्तार करने के लिए जयपुर आ जाए। स्वाभाविक है कि दिल्ली पुलिस सबसे पहले जलदाय मंत्री महेश जोशी के सरकारी निवास पर ही जाएगी। रोहित की गिरफ्तारी का वारंट भी मंत्री के सरकारी आवास पर ही चस्पा किया जाएगा। हालांकि गिरफ्तारी से बचने के लिए पिता पुत्र ने कुछ इंतजाम भी कर रखे हैं। यानी पीड़िता के साथ तथाकथित समझौता पत्र को अग्रिम जमानत के समय अदालत में पेश किया जा सकता है। हो सकता है कि पीड़िता पर ब्लैकमेलिंग के आरोप भी लगाए जाएं। मंत्री को उम्मीद थी कि एफआईआर राजस्थान में होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यदि एफआईआर राजस्थान में होती तो पुलिस वो ही करती जो सरकार निर्देश देती। 28 फरवरी को भी राजस्थान पुलिस रोहित जोशी और पीड़िता को जबरन दिल्ली से जयपुर लाई थी। इस मामले में राजस्थान पुलिस का क्या नजरिया है, यह गत 28 फरवरी को जाहिर हो चुका है। कांग्रेस का राष्ट्रीय चिंतन शिविर राजस्थान के उदयपुर में ही 13 से 15 मई के बीच हो रहा है। माना जा रहा है कि महेश जोशी 13 मई से पहले ही इस्तीफा दे देंगे।

अग्रिम जमानत का प्रार्थना पत्र दिल्ली में ही:
राजस्थान हाईकोर्ट के मशहूर अधिवक्ता आशीष सक्सेना का कहना है कि बलात्कार और अन्य अपराधों की एफआईआर दिल्ली के सदर बाजार पुलिस स्टेशन पर दर्ज हो चुकी है और पुलिस ने मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 164 में पीड़िता के बयान भी दर्ज करवा दिए हैं। इसलिए अब आरोपी को दिल्ली के संबंधित सेशन कोर्ट में ही अग्रिम जमानत का प्रार्थना पत्र दाखिल करना होगा। जहां तक दिल्ली में एफआईआर करवाने का सवाल है तो कानून के मुताबिक यदि बलात्कार जैसा अपराध कई सािानों पर होता है तो एफआईआर किसी भी एक स्थान पर दर्ज करवाई जा सकती है। जिस थाने पर एफआईआर दर्ज हुई है, उस थाने की पुलिस को अन्य स्थानों पर जाकर सबूत एकत्रित करेगी। चूंकि पीडि़ता ने बलात्कार की एक वारदात दिल्ली में भी होना बताया है, इसलिए कानून दिल्ली की एफआईआर सही है। अब यदि सेशन कोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होती है तो दिल्ली हाईकोर्ट में ही याचिका दाखिल करनी होगी।
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