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*रामकृष्ण मठ में रामकृष्ण परमहंस की मूर्ति खंडित, आक्रोश में सन्यासी*

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जामताड़ा रामकृष्ण मठ में शरारती तत्वों ने रामकृष्ण परमहंस की मूर्ति खंडित कर दी है. इस घटना को लेकर मठ के संन्यासियों में काफी आक्रोश है. सन्यासी दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.वहीं, एसडीपीओ विकास आनंद लागूरी ने बताया कि दोषी का पता चल गया है और शीघ्र कार्रवाई की जाएगी.

जामताड़ा/सुमन भट्टाचार्य. बेलूर मठ की शाखा रामकृष्ण मठ में शरारती तत्वों ने घुसकर तोड़फोड़ की घटना को अंजाम दिया है.इस वारदात में रामकृष्ण परमहंस की मूर्ति को खंडित कर दिया गया है. मामला संवेदनशील है और इसको लेकर पुलिस गहन जांच में जुट गई है. मूर्ति खंडित किए जाने के बाद मठ के महाराज और भक्तों में काफी रोष है और मठ के महाराज ने पुलिस से दोषी पर कठोर कार्रवाई करने की मांग की है.घटना की जानकारी मिलते ही एसडीपीओ विकास आनंद लागूरी तत्काल पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और उन्होंने मौके पर मौजूद मठ के संन्यासियों से घटना के बारे में जानकारी ली. पुलिस ने अपनी जांच के क्रम में आसपास के लोगों से भी पूछताछ की है और मामले की तफ्तीश के लिए सबूत जुटाने का प्रयास कर रही है.

इस घटना की खबर मिलते ही आसनसोल मठ से भी कई संन्यासी जामताड़ा रामकृष्ण मठ पहुंचे और उन्होंने घटना पर दुख व्यक्त किया. मठ के संन्यासियों ने कहा कि यह एक निंदनीय कृत्य है और इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं. उन्होंने स्थानीय प्रशासन से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया है. इस बीच एसडीपीओ विकास आनंद लागूरी ने बताया कि पूछताछ में पता चला है कि मूर्ति खंडित करने वाले व्यक्ति का हमेशा मठ में आना-जाना लगा रहता था. एसडीपीओ ने बताया कि व्यक्ति का पता चल गया है।शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।पुलिस इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और जल्द ही दोषियों को पकड़ लिया जाएगा। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने और पुलिस को जांच में सहयोग करने की अपील की है

.सन्यासियों ने कहा- संवेदनाओं पर आघात किया गया

आपको बता दें कि जामताड़ा में रामकृष्ण मठ 1921 में स्थापित किया गया था,लेकिन मूर्ति खंडित करने की घटना पहली बार हुई है. हालांकि, किस कारण से मूर्ति खंडित की गई इस बात का अब तक पता नहीं चल सका है. बताया जाता है कि देश में जितने भी रामकृष्ण मठ हैं इनमें कोलकाता और जामताड़ा में ही रामकृष्ण परमहंस की मूर्ति स्थापित है और मूर्ति पूजा होती है. शेष सभी मठ में तस्वीर की पूजा होती है. ऐसे में सन्यासियों ने इस कुकृत्य को समुदाय की संवेदना पर गहरा आघात माना है और सन्यासियों ने दोषियों को जल्द से जल्द पकड़ने की मांग की है.

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