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आर्थिक कमेटी का सदस्य बना कर सचिन पायलट को झुनझुना दिया 

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एस पी मित्तल, अजमेर

अब यह तय हो गया है कि चुनावी धंधेबाज प्रशांत कुमार उर्फ पीके कांग्रेस के लिए काम नहीं करेंगे। पीके ने कांग्रेस में घुसने के लिए गांधी परिवार के सदस्य राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से बातचीत की थी, दोनों पीके के भ्रम जाल में फंस भी गए थे, लेकिन ऐन मौके पर बच्चों की माताजी श्रीमती सोनिया गांधी कांग्रेस के सबसे वफादार राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की एंट्री करवा दी। गहलोत ने पीके साथ बैठक से पहले ही कह दिया कि कांग्रेस में पीके की कोई भूमिका नहीं होगी। यह सही भी है कि जब कांग्रेस में अशोक गहलोत जैसे राजनीतिक धुरंधर हो, तब एक धंधेबाज का क्या काम है? क्या प्रशांत कुमार, अशोक गहलोत से ज्यादा चतुर हैं? पीके 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मजबूत करने की रणनीति बना रहे थे, जबकि अशोक गहलोत का तर्क रहा कि लोकसभा चुनाव से इसी वर्ष गुजरात और हिमाचल प्रदेश तथा अगले वर्ष राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और हरियाणा के विधानसभा चुनाव होने हैं। इन सभी प्रदेशों के चुनावों का अवसर लोकसभा चुनाव पर पड़ेगा, इसलिए लोकसभा चुनाव की रणनीति अभी से नहीं बनाई जा सकती। कांग्रेस राज्यों में लगातार चुनाव हार रही है। यही वजह है कि अब संपूर्ण देश में राजस्थान और छत्तीसगढ़ में ही कांग्रेस की सरकार बची है। इसलिए सबसे बड़ी चुनौती राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बचाने की है। यदि पंजाब की तरह इन दोनों राज्यों में भी सरकार चली गई तो लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के पास क्या बचेगा? प्रशांत कुमार तो पैसे के लालच में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को सपने दिखा रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि पश्चिम बंगाल जैसे बड़े प्रदेश में कांग्रेस का एक भी विधायक नहीं है। तथा उत्तर प्रदेश में 403 में से मात्र दो विधायक हैं। गुजरात में इसी वर्ष विधानसभा का चुनाव होना है, लेकिन गुजरात में कांग्रेस की स्थिति लगातार खराब हो रही है। रही सही कसर राजस्थान से रघु शर्मा के घमंड ने कर दी है। अशोक गहलोत ने ही रघु को गुजरात का प्रभारी बनाया था, लेकिन रघु के जाने के बाद गुजरात में कांग्रेस खंड खंड विभाजित हो रही है। जो अहमद पटेल गांधी परिवार के राजनीतिक सलाहकार रहे, अब उनके पुत्र फैजल पटेल ही नाराज है। गुजरात कांग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष हार्दिक पटेल तो पार्टी छोड़ने के लिए तैयार बैठे हैं। रघु के संपूर्ण व्यवहार की वजह से गुजरात कांग्रेस में ज्यादा गुटबाजी हो गई है।

पायलट को झुनझुना:
13 से 15 मई के बीच होने वाले कांग्रेस के नव संकल्प कैम्प के लिए जो 6 कमेटियां बनाई गई है,उनमें से आर्थिक संबंधी मामलों की कमेटी का सदस्य राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट को बनाया गया हैै। इस कमेटी के अध्यक्ष पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम हैं। सचिन पायलट भले ही अभी कांग्रेस के असंतुष्ट समूह जी 23 के सदस्य न बने हों, लेकिन अशोक गहलोत ने पायलट की स्थिति जी 23 समूह के सदस्यों से भी बदतर कर रखी है। मीडिया में पांच दिन पहले तक पायलट को राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाने की खबरें आ रही थी और अब अचानक पायलट को आर्थिक कमेटी का सदस्य बना दिया। इस कमेटी का सदस्य बनने का मतलब है पायलट को झुनझुना पकड़वाना। पायलट के लिए समिति का सदस्य कोई मायने नहीं रखता है। असल में यह सब पायलट को कांग्रेस में बनाए रखने के लिए हो रहा है। राजस्थान में पायलट के सामने जो राजनीतिक हालात उत्पन्न कर दिए हैं, उसमें पायलट कभी भी बड़ा कदम उठा सकते हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बार बार कांग्रेस सरकार के रिपीट होने का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन सचिन पायलट के सहयोग के बगैर रिपीट होना मुश्किल है। सब जानते हैं कि 2018 में पायलट के नेतृत्व में ही कांग्रेस को बहुमत मिला था।

कांग्रेस का समर्थन:
सब जानते हैं कि गुजरात में श्री सत्य साईं सेवा संगठन सामाजिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अहमदाबाद और राजकोट जैसे बड़े शहरों में इस संगठन के हार्ट अस्पताल भी चल रहे हैं। कहा जा सकता है कि गुजरात के लोगों पर इस संगठन का खासा प्रभाव है। संगठन को रियायती दरों पर जमीन देने और अन्य सरकारी लाभ दिलाने में गुजरात की भाजपा सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, लेकिन अब इस संगठन की राजस्थान में कांग्रेस की सरकार के सहयोग से जयपुर में एक मई को नि:शुल्क हृदय रोग निदान शिविर लगाया जा रहा है। यह शिविर सी-स्कीम के अर्जुन नगर स्थित महावीर स्कूल में लगाया जाएगा। आमतौर पर ऐसे शिविर किसी धार्मिक अथवा सामाजिक संस्थाओं द्वारा लगाए जाते हैं। लेकिन श्री सत्य सांई सेवा संगठन का जयपुर का शिविर राजस्थान में कांग्रेस सरकार का स्वास्थ्य विभाग आयोजित कर रहा है। शिविर में भीड़ जुटाने के लिए प्रदेशभर में जिला स्तर पर तैयारियां हो रही है। चूंकि यह शिविर कांग्रेस सरकार के सहयोग से लग रहा है, इसलिए यह सवाल उठा है कि क्या गुजरात में श्री सत्य साईं सेवा संगठन कांग्रेस का समर्थन करेगा? गुजरात में 6 माह बाद ही विधानसभा चुनाव होने हैं।

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