अब बस गई तीन झुग्गी बस्तियां ,खड़ी हो गई 2000 झुग्गियां
मोपाल
सरकार इंडस्ट्री यूनिट लगाने वालों को प्लॉट देने के लिए नई जगह खोज रही है। लेकिन भोपाल जोन के सबसे बड़े इंडस्ट्रियल एरिया में करीब 200 एकड़ खाली जमीन होने के बाद भी प्लॉट देने से मना कर रही है। कारण यह है कि यह जमीन वन विभाग के अधीन है और इस पर निर्माण की मनाही है। दूसरी तरफ इसी जंगल की 50 एकड़ जमीन पर झुग्गी इंडस्ट्री बन गई है।
बनने थे रहवासी फ्लैट
झुग्गी इंडस्ट्री शब्द इसलिए कि इन झुग्गियों को बनाने से पहले माफिया अपनी टीम के मार्फत कब्जा करवाता है और फिर इसे बेचता है। 15 बाय 30 यानी करीब 450 स्क्वायर फीट का प्लॉट बताकर पट्टा दिलाने के वादे के साथ माफिया 50 हजार से डेढ़ लाख तक में कब्जा करवाता है। माफिया घेरना शुरू कर दिया है। कई इंडस्ट्री के गेट पर ही झुग्गी तन गई। इनका काम बहुत ऑर्गनाइज तरीके से चलता है। जैसी ही झुग्गी तनती हैं, फिर अचानक से इन्हें सुविधाएं देने की बात उठती है। अब जिस जगह ये झुग्गियां बसी हैं, वह जमीन वन से लेकर राजस्व को देने की तैयारी है, ताकि यहां रहने वालों को स्थायी पट्टे दिए जा सके।
मंडीदीप इंडस्ट्री के लिए लेबर की जरूरत होती है। इनके कारण ही अवैध झुग्गी इंडस्ट्री बनी है। 10 साल पहले सरकार ने इंडस्ट्री एरिया में आवासीय कॉलोनी की योजना तैयार की थी, लेकिन वह कभी मूर्त रूप नहीं ले पाई। जबकि इन फ्लैट को कंपनी अपने लेबर और अन्य कर्मचारियों को रखने के लिए किराए पर लेने के लिए तैयार थी। अब जानकारी मिली है कि एमपीआईडीसी नए सिरे से
तीन बड़ी बस्तियां बस चुकी उद्योगों की जमीन पर
मंडीदीप इंडस्ट्रियल एरिया में लगभग 300 एकड़ जमीन वन विभाग की है। इस पर दो बड़ी बस्ती बस गई हैं। पहला है राहुल नगर, जहां 1500 से अधिक परिवार रहते हैं। दूसरी है मोजमपुरा, जिसमें लगभग 500 झुग्गी बनी हैं। झलारकाला, मौजमपुरा से लेकर पचपन सीढ़ी हनुमान मंदिर तक करीब 10 एकड़ जमीन में नई अवैध झोपड़ियों बन गई हैं। इस बस्ती में करीब 1200 लोगों के रहने का अनुमान है। वन भूमि के साथ यह झुग्गी अब उद्योग की जमीन पर भी बनने लगी हैं।
मंडीदीप इंडस्ट्रियल एरिया में बीते एक साल में 200 से अधिक मामले सिर्फ चोरी के आए। जब चोर पकड़े गए तो इनके पास से ट्रकों में लदा माल और फैक्ट्री के भीतर से चोरी किया गया माल मिला है। यह तो वे घटनाएं हैं, जिनमें एफआईआर दर्ज कराई गई हैं। जबकि छोटे मामलों में इंडस्ट्री वाले एफआईआर से बचते हैं। मंडीदीप से जुड़े उद्योगपतियों का कहना है कि पुरे इंडस्ट्रियल एरिया में बाहरी लोगों की गतिविधियों बढ़ती जा रही है।
1.50 लाख रुपए तक में झुग्गी का कब्जा दिलाता है माफिया
• डीएफओ को जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। वहां कुछ झोपड़ियां पहले से भी बनी हुई हैं। अवैध रूप से बनाई गई सभी झोपड़ियों को हटाने के लिए कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग की जमीन पर अतिक्रमण ना हो की जमीन पर अतिक्रमणगरानी रखी जा रही है।’ -राजेश खरे, मुख्य वन संरक्षक, भोपाल
दो माह पहले हुई थी कार्रवाई…रेंजर को किया या निलंबित
मंडीदीप में दो महीने पहले मौजमपुरा में वन भूमि पर अतिक्रमण और अवैध वसूली के मामले में डीएफओ ने कार्रवाई की थी। एक डिप्टी रेंजर को निलंबित भी किया गया था। रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि मोजमपुरा वन विभाग को जमीन पर अतिक्रमण कर बसल्या गया है। विभाग के कुछ कर्मचारी हैं, जो पहले लोगों फंसा कर सरकारी जमीन बेचते हैं। इसके बाद इनसे बिजली और पानी कनेक्शन के नाम पर हर महीने मोटी रकम वसूल की जाती है।

