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सुनवाई तिथि से पूर्व आदेश बदलने के मामले में जवाब तलब

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जबलपुर, मध्य प्रदेश। हाईकोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधरन की एकलपीठ ने छतरपुर के घुवारा वेयरहाउस गिराने पर पूर्व में दिये गये यथास्थिति के आदेश के बाद निर्धारित तिथि से पूर्व आदेश बदलने के मामले को गंभीरता से लिया। एकलपीठ ने मामले में शासकीय अधिवक्ता को स्ट्रंक्शन प्राप्त कर पक्ष रखने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 18 जनवरी को निर्धारित की है।

यह मामला घुवारा निवासी रमेशचंद्र जैन की ओर से दायर किया गया है। जिसमें कहा गया है कि उन्होने 14 वर्ष पूर्व रजिस्टर्ड विक्रय पत्र द्धारा भूमि क्रय कर संबंधित विभागों से अनुमति प्राप्त कर बैंक लोन लेकर 2007 में वेयरहाउस का निर्माण किया था। आवेदक का कहना है कि राजनीतिक दवाब में तहसीलदार ने पटवारी से झूठी रिपोर्ट हासिल कर उक्त निर्माण को शासकीय भूमि पर दर्शाते हुए तोड़ने व 35 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए जेल भेजने का आदेश दे दिया। जिसके खिलाफ की गई अपील एसडीओं ने बिना सुनवाई के निरस्त कर दी। इसके बाद द्वितीय अपील अपर आयुक्त सागर संभाग ने 15 दिसंबर को यथास्थिति का आदेश दिया और अगली सुनवाई 13 जनवरी को निर्धारित की। आरोप है कि इसके दो दिन बाद आवेदक को बिना नोटिस दिये व सुनवाई का अवसर दिये अपना ही आदेश निरस्त कर दिया, जिस पर हाईकोर्ट की शरण ली गई। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने शासकीय अधिवक्ता को स्ट्रंक्शन प्राप्त कर पक्ष रखने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 18 जनवरी को निर्धारित की है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदर्श मुनि त्रिवेदी, अधिवक्ता आशीष, असीम त्रिवेदी व सुधाकर मणि पटेल ने पक्ष रखा।

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