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Google में बगावत!1,000 से ज्यादा कर्मचारियों ने अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसियों से रिश्ते तोड़ने की मांग उठाई

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Google की नीतियों को लेकर एक बार फिर उसके अपने कर्मचारी सवाल उठा रहे हैं. अमेरिका में 1,000 से ज्यादा Google कर्मचारियों ने एक आंतरिक याचिका पर हस्ताक्षर कर कंपनी से अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसियों के साथ रिश्ते खत्म करने की मांग की है. कर्मचारियों का आरोप है कि Google की तकनीक का इस्तेमाल निगरानी, दमन और विवादित इमिग्रेशन अभियानों में किया जा रहा है, जो कंपनी के नैतिक मूल्यों के खिलाफ है.

ICE और CBP से रिश्तों पर गंभीर आरोप
इस याचिका में Immigration and Customs Enforcement (ICE) और Customs and Border Protection (CBP) के साथ Google के कथित सहयोग पर सवाल उठाए गए हैं. कर्मचारियों का दावा है कि Google Cloud की तकनीक अमेरिका और दक्षिणी सीमा पर CBP की निगरानी प्रणालियों को सहारा दे रही है. इसके अलावा आरोप लगाया गया है कि Palantir के ImmigrationOS प्लेटफॉर्म को भी Google के क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर से मदद मिलती है, जिसका इस्तेमाल ICE अप्रवासियों को ट्रैक करने में करता है.

AI टूल्स के इस्तेमाल पर आपत्ति
याचिका में कहा गया है कि Google के जेनरेटिव AI टूल्स का इस्तेमाल Department of Homeland Security (DHS) और CBP द्वारा किया जा रहा है, जिससे उनकी कार्यक्षमता और ऑपरेशनल क्षमता बढ़ी है. कर्मचारियों का मानना है कि AI जैसी उन्नत तकनीक का इस तरह का उपयोग मानवाधिकारों को प्रभावित कर सकता है. पत्र में साफ लिखा गया है कि “इन सिस्टम्स को बनाने वाले लोग होने के नाते हम इस बात से बेहद परेशान हैं कि हमारी तकनीक का इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है.”

Play Store और YouTube को लेकर भी नाराजगी
कर्मचारियों ने Google के अन्य प्लेटफॉर्म्स पर भी सवाल उठाए हैं. याचिका में आरोप है कि Play Store पर ICE की गतिविधियों को ट्रैक करने वाले कुछ ऐप्स को सीमित कर दिया गया, जबकि YouTube पर ICE की भर्ती और ‘सेल्फ-डिपोर्टेशन’ से जुड़े विज्ञापन दिखाए गए. कर्मचारियों का कहना है कि यह दोहरा रवैया Google की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है.

पारदर्शिता और करार खत्म करने की मांग
याचिका का शीर्षक है- ‘Googlers Demand: Worker Safety & ICE Contract Transparency’. इसमें कंपनी से मांग की गई है कि DHS, ICE और CBP के साथ सभी कॉन्ट्रैक्ट्स और साझेदारियों की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए. साथ ही ऐसे सभी करार खत्म किए जाएं, जो कर्मचारियों के मुताबिक “राज्य हिंसा और दमन” को बढ़ावा देते हैं.

वर्कर सेफ्टी और नेतृत्व से सीधी बातचीत की मांग
कर्मचारियों ने कंपनी नेतृत्व से एक आपातकालीन टाउनहॉल मीटिंग या लाइव Q&A सेशन की मांग भी की है, जिसमें सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स से जुड़े शीर्ष अधिकारी सीधे जवाब दें. इसके अलावा, सभी कर्मचारियों- चाहे वे कैफेटेरिया स्टाफ हों या डेटा सेंटर कर्मचारी- के लिए बेहतर सुरक्षा, वर्क-फ्रॉम-होम विकल्प और कानूनी व इमिग्रेशन सपोर्ट की भी मांग रखी गई है. फिलहाल Google की तरफ से इस याचिका पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह विवाद एक बार फिर टेक कंपनियों की भूमिका, नैतिक जिम्मेदारी और सरकारी एजेंसियों के साथ उनके संबंधों पर बड़ी बहस को हवा देता दिख रहा है.

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