बिहार विधानसभा चुनाव से पूर्व बिहार में 62000 करोड़ रुपये के कथित बिजली घोटाले का आरोप लगाने वाले पूर्व केन्द्रीय मंत्री आर के सिंह ने आज भारतीय जनता पार्टी द्वारा निलंबित किए जाने के बाद पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।
इस्तीफे के पत्र में आरा से पूर्व सांसद सिंह ने कहा है कि उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित किया गया है लेकिन किसी गतिविधि का जिक्र नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि संभवत: अपराधियों को टिकट दिए जाने के खिलाफ बयान को लेकर उन पर यह कार्रवाई की गई है जो पार्टी विरोधी गतिविधि नहीं मानी जा सकती।
उससे पूर्व पार्टी ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से निलंबित किया।
हालांकि सोशल मीडिया “एक्स” पर जारी पत्र में पार्टी ने स्पष्ट नहीं किया कि कौन सी पार्टी विरोधी गतिविधियां?
भाजपा की बिहार इकाई ने सिंह को जारी पत्र में कहा था कि “आप की गतिविधियों से पार्टी को नुकसान हुआ है, अत: निर्देशानुसार आपको निलंबित किया जा रहा है और पूछा जा रहा है कि क्यों न आपको पार्टी से निष्कासित किया जाए।” पार्टी ने सिंह से एक सप्ताह में जवाब मांगा था।
उल्लेखनीय है कि बिहार चुनाव के पहले चरण के लिए मतदान से दो दिन पूर्व उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के बिजली विभाग में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी हुई है, जिसमें बिहार सरकार के मंत्रालय के कई अधिकारी शामिल हैं।
उन्होंने इस पूरे मामले की गहन जाँच केंद्रीय जांच ब्यूरो से कराने की मांग की। सिंह ने आरोप लगाया कि 62 हज़ार करोड़ रुपये के बिजली घोटाले में सरकार के मंत्री और वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हैं। उनका कहना है कि यह घोटाला अडानी पावर के साथ बिहार सरकार द्वारा 25 साल के लिए किए गए पावर सप्लाई एग्रीमेंट से जुड़ा है।
उन्होंने इन आरोपों पर एक टीवी चैनल को इंटरव्यू भी दिया था, जो चैनल के सोशल मीडिया अकाउंट से बाद में हटा दिया गया।

