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सिंहस्थ से पहले उज्जैन में बिछेगा सड़क का जाल,NHAI 11500 करोड़ की योजना पर कर रहा है काम,आना होगा आसान

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विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल की नगरी मे रोजाना लाखों की संख्या मे श्रद्धालुओं का आगमन लगा रहता है. अवंतिका नगरी में हर 12 वर्ष में सिंहस्थ कुंभ मेले का आयोजन होता है. इस बार भी 2028 में सिंहस्थ का आयोजन होने जा रहा है. इसके लिए उज्जैन में लगातार विकास देखने को मिल रहा है. सिंहस्थ 2028 से पहले NHAI उज्जैन आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं की यात्रा आसान बनाने में जुट गया है. शहर को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी देने के लिए बड़े स्तर पर नए हाईवे और बाईपास तैयार किए जा रहे हैं.

दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे से उज्जैन को जोड़ने के लिए एक्सेस कंट्रोल ग्रीनफील्ड हाईवे बनाए जा रहे हैं. इसके तहत उज्जैन-गरोठ और उज्जैन-झालावाड़-कोटा मार्ग पर तेजी से काम चल रहा है. ये सड़कें बनने के बाद सफर तेज, सुरक्षित और सुगम हो जाएगा. इसके अलावा महाराष्ट्र से सीधा संपर्क मजबूत करने के लिए वेस्टर्न बाईपास भी तैयार किया जा रहा है, जिससे शहर में ट्रैफिक का दबाव कम होगा. इन सभी परियोजनाओं पर करीब 11,500 करोड़ रुपये खर्च होंगे और अगले दो साल में काम पूरा करने का लक्ष्य है. उज्जैन-गरोठ हाईवे के अगले 2 महीन में बनकर तैयार होने की उम्मीद है.

इसलिए बिछाया जा रहा सड़कों का जाल
NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर राहुल जाजोरिया ने बताया कि उज्जैन को चारों तरफ से हाईवे और एक्सप्रेसवे से जोड़ा जा रहा है. इसका मकसद देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा को आसान और तेज बनाना है. उन्होंने बताया कि नई सड़कों के बनने से महाकाल ज्योतिर्लिंग और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग सहित अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों तक पहुंचने में कम समय लगेगा. इससे ट्रैफिक भी कम होगा और यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी. सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए सरकार के निर्देशों के अनुसार इन परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है. जिन सड़कों को मंजूरी मिल चुकी है, उनका निर्माण दो साल में पूरा करने का लक्ष्य है. वहीं, कुछ अन्य परियोजनाएं अभी स्वीकृति की प्रक्रिया में हैं.

राजस्थान से आना होगा आसान
महाकाल की नगरी उज्जैन मे सिंहस्थ 2028 में जो लोग उज्जैन, बड़नगर, बदनावर सड़क मार्ग को राजस्थान से जोड़ने की योजना है. फिलहाल यह मार्ग मध्य प्रदेश के बदनावर तक बनकर तैयार है. अब बदनावर से थांदला तक करीब 80 किलोमीटर लंबी नई सड़क बनाई जाएगी. इस परियोजना पर लगभग 1600 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इसका निर्माण कार्य रतलाम इकाई के माध्यम से कराया जाएगा. इस सड़क के तैयार होने से मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच आवागमन और भी आसान हो जाएगा, जिससे यात्रियों और व्यापार दोनों को फायदा मिलेगा.

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