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 सेंधवा चेकपोस्ट पर ट्रक ड्राइवरों से होती है ‘डकैती’, महीने में 24 करोड़ अफसरों की जेब में

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सेंधवा

मध्यप्रदेश के सेंधवा में परिवहन विभाग के चेकपोस्ट पर दैनिक भास्कर की टीम ने अ‌वैध वसूली को कैमरे में कैद किया। यह साधारण वसूली नहीं है, दादागीरी और हथियारों के दम पर होती है, इसलिए ट्रक ड्राइवर इसे ‘डकैती’ कहते है। भास्कर की टीम ने ड्राइवर और क्लीनर बनकर स्टिंग किया। महाराष्ट्र की ओर से आने-जाने वाली हर गाड़ी से यहां 400 से 3000 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। सिस्टम इतना पुख्ता बना दिया है कि कोई गाड़ी अवैध वसूली से बच नहीं सकती। तोल की रसीद दिखाने के साथ ड्राइवर को नोटों का वजन भी रखना पड़ता है। तभी जाकर आगे बढ़ने के लिए बैरियर उठता है। हर वाहन से वसूली जाने वाली रकम का हिसाब लगाया जाए तो एक दिन में अनुमानित 80 लाख और महीने में 24 करोड़ रुपए अवैध वसूली हो रही है। यानी सालभर में ट्रक ड्राइ‌वर/मालिकों की जेब पर 300 करोड़ रुपए का ‘डाका’ डाला जा रहा है।

ऐसा नहीं है कि इस ‘सरकारी डकैती’ की किसी को जानकारी नहीं है। सेंधवा बॉर्डर का यह आरटीओ चेकपोस्ट अवैध वसूली के लिए बदनाम है। ट्रांसपोर्टर्स और ड्राइवरों की इसी पीड़ा को उजागर करने के लिए दैनिक भास्कर टीम भोपाल से 380 किमी दूर सेंधवा चेकपोस्ट पहुंची।

सबसे पहले सेंधवा चेकपोस्ट का दृश्य बताते हैं…

5 लेन लेकिन चालू सिर्फ दो; एक पर CCTV लगाया, दूसरे पर नहीं… यहीं होती है वसूली

3 मई। दोपहर के 12.30 बजे। चेकपोस्ट के दोनों तरफ वाहनों की कतार लगी है। महाराष्ट्र की ओर से आने वाले ट्रकों की कतार में सबसे पीछे खड़े एक ट्रक में हम सवार हुए। करीब 45 मिनट बाद ट्रक चेकपोस्ट के तोल नाके पर पहुंचा। यहां तोल हुआ। ट्रक में तय क्षमता के मुताबिक ही वजन था। तोल का शुल्क 80 रुपए तय है, लेकिन 100 रुपए लेकर ही रसीद दी जाती है। कायदे से यह रसीद देखकर ट्रक को रवाना कर दिया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा होता नहीं है। यही जानने के लिए हम ड्राइवर-क्लीनर बनकर तोल की रसीद के साथ साइड में बने चेकपोस्ट के कार्यालय पहुंचे। यहां दो काउंटर बने हैं। एक काउंटर सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में रहता है, जबकि दूसरे काउंटर पर कोई निगरानी नहीं होती। इसी दूसरे काउंटर पर रसीद दिखाई जाती है। अफसरों ने पूरा सिस्टम ऐसा बनाया है कि सबकी आंखों में भरपूर धूल झोंका जा सकें। कहने को CCTV लगा दिया, लेकिन एक काउंटर पर, यहां रसीद ही नहीं दिखाई जाती। दूसरे काउंटर पर रसीद दिखाने के साथ वसूली का पूरा गोरखधंधा चल रहा है। जिस काउंटर पर वसूली होती है, उसे इस तरह बनाया गया है कि वसूली करने वाला का चेहरा दिखाई नहीं दे। इतनी ही जगह रखी गई है कि हाथ डालकर रुपए लिए और दिए जा सकें। ऊपर का हिस्सा पूरी तरह पैक कर दिया गया है ताकि किसी तरह की पारदर्शिता नहीं रहें।

दूसरे स्टेट का वाहन हुआ तो वसूली तीन गुना

एमपी के रजिस्टर्ड वाहनों से 400 से 1200 रुपए और दूसरे प्रदेशों में रजिस्टर्ड वाहनों से 1500 से 3000 हजार रुपए लिए जा रहे थे। हम जिस ट्रक में सवार हुए थे, उसके लिए भी तोल की रसीद के साथ 1500 रुपए देने पड़े। इसी तरह दूसरे ड्राइवर भी आते और पैसे देकर तोल रसीद पर सील और साइन करा कर आगे बढ़ते जाते। दूसरे स्टेट से वसूली ज्यादा इसलिए कि वसूली अफसरों को लगता है कि उनकी सुनवाई हमारे स्टेट में तो होने वाली नहीं है।

सुरक्षा गार्ड को शक हुआ तो तुरंत निकलना पड़ा भास्कर टीम को

दिनदहाड़े इस तरह की गुंडागर्दी होती है… कोई विरोध नहीं करता? बिलकुल होता है। ट्रक मालिक और ड्राइवरों में इस वसूली को लेकर बहुत गुस्सा है। इसीलिए चेकपोस्ट पर अकसर विवाद होते हैं। भास्कर टीम के दो से तीन प्रयास के बाद काउंटर पर पैसे देने वाले लोग कैमरे में रिकॉर्ड हो पाए। इस बीच गार्ड को हम पर संदेह हो गया। गार्ड पास आकर खड़ा हो गया। उसके कुछ बोलने से पहले हम हालात भांप गए। गार्ड किसी को मोबाइल से कॉल कर बुला रहा था। हम वहां से निकलने को आगे बढ़ गए। बैरियर गेट से परिवहन विभाग के अफसर की गाड़ी प्रवेश करते हुए दिखी। हम बचते-बचाते यहां से किसी तरह सुरक्षित निकल पाए। कुछ किमी आगे, एक ढाबे पर यहां से निकले लोडिंग वाहनों के ड्राइवर मिले। उनसे वसूली के बारे में बात की तो उनकी पीड़ा गुस्से के रूप में फूट पड़ी।

ड्राइवरों की पीड़ा- कम काउंटर, ज्यादा लंबा जाम… ताकि अवैध वसूली में उनको असुविधा नहीं हो

ड्राइवरों की शिकायत इस बात को लेकर थी कि मध्यप्रदेश में इस अवैध वसूली के बारे में सुनने वाला कोई नहीं है। शमशाबाद निवासी लोडिंग वाहन के ड्राइवर पप्पू ने बताया- माल लेकर चंडीगढ़ जा रहा हूं। 100 रुपए तोल कांटे का और 500 रुपए एंट्री के नाम पर लिए, जबकि गाड़ी के सारे दस्तावेज सही हैं और गाड़ी भी ओवरलोड नहीं है।

हमने कहा कि आप लोग पैसे देने से मना भी तो कर सकते हैं? पप्पू ने जवाब दिया कि बिल्कुल सही कहा आपने। ऐसा कई ड्राइवर कर चुके हैं। नतीजा ये निकलता है कि गाड़ी जब्त कर 10 से 12 हजार रुपए का चालान बना दिया जाता है। गाड़ी भी चार से पांच दिन बाद ही छूट पाती है। रोज चलना तो इसी रोड पर है। दुश्मनी मोल लेकर क्या कर लेंगे? अंगूर लेकर जा रहे शौकीन ने बताया कि उनसे भी 500 रुपए वसूले गए।

ट्रक ड्राइवर राहुल ने बताया- वह केरल के कोच्चि से पार्सल लेकर दिल्ली जा रहा है। सेंधवा बॉर्डर पर जानबूझ कर लंबा जाम लगाया जाता है। हम ड्राइवरों को घंटों इंतजार कराया जाता है। कोच्चि से एमपी के सेंधवा बॉर्डर के बीच, कहीं चैकिंग नहीं हुई, लेकिन यहां 500 रुपए एंट्री के नाम पर वसूले हैं। महाराष्ट्र में ट्रैफिक वाले परेशान कर 100 से 200 रुपए वसूल लेते हैं। वहां ट्रैफिक वाले 100 रुपए में एक नीला कार्ड देते हैं। इसका फायदा ये है कि महीने भर इसे दिखाने पर और पैसे नहीं देने पड़ते।

आखिर क्यों देने पड़ते हैं इतने रुपए…?

परिवहन विभाग ने ट्रकों या अन्य वाहनों को लेकर इतने नियम बना रखे हैं कि कोई भी ट्रक बच नहीं सकता। मसलन, कंपनी द्वारा डिजाइन गाड़ी की बॉडी में किसी तरह का बदलाव हो तो भी जुर्माने का प्रावधान है। उत्तर प्रदेश निवासी ट्रक ड्राइवर संजीव कुमार ने बताया कि यदि अंडरलोडिंग है तो भी तोल पर्ची के साथ 500 से 700 रुपए वसूलते हैं। अगर थोड़ा भी सवाल किया तो किसी न किसी बहाने 10 से 12 हजार रुपए का चालान काट देते हैं। ज्यादा बहस करने पर गाड़ी ही पास नहीं होने देते।

केंद्रीय मंत्री गडकरी तक वसूली का मामला पहुंचा, मुख्य सचिव को लेटर भी लिखा

मध्यप्रदेश के परिवहन चेकपोस्ट पर होने वाली अवैध वसूली को लेकर जुलाई 2022 में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस को पत्र लिखकर चेताया था। दरअसल, एमपी के चेकपोस्ट पर अंडरलोडिंग और सारे दस्तावेज होने पर भी मनमाने तरीके से पैसे वसूले जाते हैं। पंजाब सहित नागपुर के ट्रांसर्पोटर्स ने इसे लेकर नागपुर में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री से शिकायत की थी। इसी शिकायत के संदर्भ में गडकरी ने मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस को पूरी स्थित से अवगत कराया था। फिर भी यहां की खुलेआम लूट रुकी नहीं। ऊपर के अधिकारी से लेकर सरकार में बैठे लोगों को भी सब पता है।

उधर, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में दतिया के चिरुला के चेकपोस्ट को लेकर जनहित याचिका लंबित है। प्रदेश में 40 चेकपोस्ट हैं। इससे सरकार को हर साल 150 करोड़ रुपए का राजस्व मिलता है। पर यही चेकपोस्ट अवैध वसूली के अड्‌डे बन चुके हैं।

ट्रांसपोटर्स की मांग पर तीन महीने के लिए बनी थी कमेटी

चेकपोस्ट पर होने वाली अवैध वसूली के विरोध में प्रदेशभर के ट्रांसर्पोटर्स हड़ताल पर चले गए थे। तब सरकार और ट्रांसर्पोटर्स में एक समझौता हुआ। इस समझौते के आधार पर परिवहन आयुक्त ने 15 दिसंबर 2022 को एक आदेश जारी किया। इसमें तय हुआ था कि ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल के साथ चर्चा में चेकपोस्ट बंद करने पर सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है। प्रदेश में राज्य की सीमा पर संचालित परिवहन चेकपोस्ट के संबंध में अतिरिक्त परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन ) मप्र की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाएगी, जो तीन महीने में तीन बिंदुओं पर प्रतिवेदन देगी।

NHAI बोल चुका है एकीकृत चेकपोस्ट हटाने को

जीएसटी लागू होने से पहले एकीकृत चेकपोस्ट का नियम था। जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद पूरे देश में इस तरह के एकीकृत चेकपोस्ट हटाने के आदेश केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी किया गया है। इसके बावजूद एमपी में एकीकृत चेकपोस्ट चालू हैं।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राज्यों से उनकी सीमाओं पर स्थित जांच चेकपोस्ट हटाने के पीछे तर्क दिया था कि जब वाहनों एवं चालकों से संबंधित ऑनलाइन डेटा वाहन एवं सारथी पोर्टल पर उपलब्ध है और जीएसटी लागू हो चुका है, तो राज्यों की सीमाओं पर नियमित जांच चौकियों की क्या आवश्यकता है? बावजूद मध्यप्रदेश सहित महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, केरल, आंध्र प्रदेश, गोवा, राजस्थान में ऐसे चेक पोस्ट संचालित हो रहे हैं।

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