देश का पहला संयंत्र जो मानवीय गंदगी से भी बनाएगा खाद और सिंचाई योग्य पानी
पंचायतों के लिये सुविधा, स्वच्छता और आत्मनिर्भरता
देपालपुर। इंदौर जिले में देपालपुर तहसील के ग्राम पंचायत काली बिल्लोद में प्रदेश की पहली मानव मल जल प्रबंधन इकाई स्थापित की गई है। यह इकाई मानव मल ओर व्यर्थ बहने वाले घरेलू पानी को दोबारा उपयोग में लाने लायक बनाएगी। इसका उद्घाटन करने के लिए मंगलवार को यहां पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया पहुंचे।
यह इकाई काम करना शुरु कर चुकी है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय संस्था वाटर एड ने भी मदद की है। इस तरह की इकाइयां देश में कई स्थानों पर बनाई जा रही हैं लेकिन प्रदेश के कालीबिल्लौद में यह सबसे पहले बनाई गई और इसका सफल संचालन हो सका है।
इसके लिए पंचायत ने ट्रैंचिंग ग्राउंड से कुछ दूरी पर एक सुव्यवस्थित प्लांट बनाया है। यहां एफएसटीपी प्लांट ( फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट ) में प्लान्टेड ड्राइंग बेड, प्लान्टेड ग्रेवल फिल्टर , पालिशिंग पोंड का निर्माण किया गया है। ग्राम पंचायत काली बिल्लोद सहित सलमपुर व रणमल बिल्लोद पंचायत स्थित सेफ्टी टैंक का मल टेंकर के द्वारा एफएसटीपी प्लांट में लाने के बाद प्लान्टेड ड्राइंग बेड में डाला जाएगा। प्लान्टेड ड्राइंग बेड में ठोस व तरल को अलग करने व उसे सुखाने का काम होगा। प्लान्टेड ग्रेवल फिल्टर ड्राइंग बेड से आने वाले गंदा पानी की गंध दूर कर शुद्ध करेगा और उसमें ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाएगा। इसके बाद यह पानी पॉलिशिंग पोंड में पहुंचेगा जहां उपयोग के लिए तैयार होगा।
प्लांट में प्रतिदिन तीन हजार लीटर व एक सप्ताह में 18 हजार लीटर स्लज डाला जा सकेगा। खाली होने वाले टैंकों में 10 से 15 प्रतिशत स्लज व 80 से 85 प्रतिशत पानी की मात्रा होती है। ऐसे में पूरी प्रकिया होकर खाद बनने में एक साल का समय लगेगा। पंचायत क्षेत्र में मिलने वाले गीले कचरे और मल से बनी खाद को मिलाया जाएगा और फिर जो खाद तैयार होगी उसे स्वयं सहायता समूह के माध्यम से विक्रय किया जाएगा।
ट्रेनिंग सेंटर बनाया गया-
प्लांट में एक ट्रेनिंग सेंटर भी बनाया गया है। इसके माध्यम से प्लांट का निरीक्षण हेतु आने वाले देश ,प्रदेश के लोगों को प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वह भी पंचायतों में इस तरह का प्लांट लगा सकें। इसके साथ ही मल्टी पर्पस टायलेट का निर्माण भी किया गया है इसके माध्यम से गर्भवती महिला, विकलांग व बच्चों के टॉयलेट में उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधा से अवगत कराया जाएगा।
इस प्लांट में मशीन का उपयोग नहीं होता है। यह एरोबिक पद्धति से बना हुआ है जो कि ऑक्सीजन के साथ मिलकर ग्रेवटी के साथ काम करता है। इस प्लांट को एक व्यक्ति ऑपरेट कर सकता है। यह पूरे देश एवं मध्यप्रदेश में ग्रामीण स्तर पर पहला प्लांट है।
तीन प्रकार से होगी इनकम-
प्लांट के माध्यम से तीन प्रकार से आय होगी। पहली मल से बनी खाद को बेचने से, दूसरी स्वच्छ किए गए पानी में होने वाले मछली पालन से एवं तीसरी सेफ्टी टैंक खाली करने के शुल्क से होने वाली आय इसमें शामिल होगी। ऐसे में पंचायतों का राजस्व बढ़ेगा और क्षेत्र के लोगों को सुविधा मिलेगी।
ट्रायल चल रहा था-
प्लांट में लगभग 6 माह से मल से खाद बनाने की प्रक्रिया एक प्रयोग के तौर पर की जा रही थी। कई टेंकर मल इकाई में डाल कर यह देखा गया कि यूनिट सही काम कर रही है या नहीं । प्लांट के निर्माण में 25 से 30 लाख रुपये की लागत आई है।
उम्मीद जताई जा रही है कि पंचायत विभाग अब ग्रामीण क्षेत्रों की में इस तरह की कई और यूनिट स्थापित करवाएगा। इसका एक बड़ा उद्देश्य गंदगी न होने देना, पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना और पंचायतों को राजस्व के मामले में आत्मनिर्भर होना भी है। प्लांट के कालिबिल्लोद में स्थापित कराने में सरपंच नर्मदा गणेश परमार की सराहनीय प्रयास रहे हैं।

