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*रूस का 52 सैटेलाइट्स लॉन्च:अब धरती के चप्पे-चप्पे पर होगी पुतिन की नजर!*

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रूस ने वोस्तोनची कॉस्मोड्रोम से Soyuz-2.1b रॉकेट द्वारा 52 सैटेलाइट्स लॉन्च किए, जिनमें दो Aist-2T सैटेलाइट्स और छात्रों द्वारा बनाए 50 छोटे उपग्रह शामिल हैं. अब जब ये 52 ‘आंखें’ अपनी कक्षा में सेट हो गई हैं, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि आसमान में रूस की पकड़ पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो चुकी है.

दुनिया अभी धरती पर चल रहे युद्धों और कूटनीतिक चालों को समझने में उलझी थी कि रूस ने चुपचाप अंतरिक्ष में एक बड़ी बाजी मार ली है. रविवार को रूस के सुदूर पूर्वी इलाके से एक रॉकेट ने उड़ान भरी और अपने साथ अंतरिक्ष में 52 ‘जासूस’ और वैज्ञानिक उपकरण लेकर गया. रूस की सरकारी न्यूज़ एजेंसी और स्पेस एजेंसी रोस्कोस्मोस ने पुष्टि की है कि रविवार को वोस्तोनची कॉस्मोड्रोम से Soyuz-2.1b रॉकेट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया . इस रॉकेट के पेलोड में 52 सैटेलाइट शामिल थे, जो अब पृथ्वी की कक्षा में स्थापित हो चुके हैं .

इसे सिर्फ एक सामान्य लॉन्च मानना गलती होगी. रक्षा विशेषज्ञों और अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का मानना है कि एक साथ 52 सैटेलाइट्स का यह जखीरा रूस की निगरानी क्षमता, आपदा प्रबंधन और अंतरिक्ष विज्ञान में उसकी पकड़ को कई गुना मजबूत कर देगा.

मिशन ’52 आंखें’: क्या है खास?40 नहीं, पूरी दुनिया पर नजर!

भले ही आधिकारिक तौर पर रूस ने इसे वैज्ञानिक और रिमोट सेंसिंग मिशन बताया है, लेकिन इसकी क्षमताएं असीमित हैं. रोस्कोस्मोस ने कहा है कि Aist-2T स्पेसक्राफ्ट को ग्रह की सतह की फोटोग्राफी के लिए डिजाइन किया गया है . इसका सीधा मतलब है कि ये सैटेलाइट्स रूस की सीमाओं से बाहर, पूरी दुनिया के किसी भी कोने चाहे वो अमेरिका हो, यूरोप हो या एशिया का डिजिटल नक्शा तैयार करने में सक्षम हैं. इन सैटेलाइट्स की एक्‍टिव लाइफ कम से कम 5 साल तय की गई है . यानी अगले पांच सालों तक रूस के पास आसमान में दो ऐसी आंखें होंगी जो दुनिया के भूगोल पर पल-पल नजर रख सकेंगी.

आफत से जंग: बाढ़, आग और ज्वालामुखी पर पहरा

इस मिशन का एक बड़ा मानवीय पहलू भी है. रूस का क्षेत्रफल दुनिया में सबसे बड़ा है और वहां अक्सर जंगल की आग और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं आती रहती हैं. इन सैटेलाइट्स का इस्तेमाल आपातकालीन स्थितियों की निगरानी के लिए किया जाएगा .आग लगते ही स्पेस से अलर्ट मिलेगा. नदियों के जलस्तर और प्रभावित इलाकों का सटीक आकलन हो पाएगा. रूस के कामचटका जैसे इलाकों में सक्रिय ज्वालामुखियों पर नजर रखी जा सकेगी.

छात्रों की स्पेस आर्मी: 50 छोटे जासूस

इस लॉन्च की एक और खासियत यह है कि इसमें सिर्फ सरकारी एजेंसियों का ही दिमाग नहीं लगा है, बल्कि रूस की युवा पीढ़ी भी शामिल है. मुख्य पेलोड के साथ 50 छोटे स्पेसक्राफ्ट भेजे गए हैं . रोस्कोस्मोस ने विस्तार से बताया कि इनमें से कई छोटे उपग्रहों को रूस की अलग-अलग यूनिवर्सिटीज के छात्रों ने विकसित किया है. इसके अलावा, यूनिवर्सैट प्रोग्राम के तहत छोटे क्यूबसैट्स भी भेजे गए हैं . ये धरती के बदलते मौसम पर नजर रखेंगे. पृथ्वी की निचली कक्षा में अंतरिक्ष के मौसम का अध्ययन करेंगे . यह डेटा रूसी हाइड्रोमेटियोरोलॉजिकल सर्विस के लिए बेहद काम का साबित होगा .

वोस्तोनची: रूस का नया पावर सेंटर

यह लॉन्च पूर्वी रूस में स्थित वोस्तोनची कॉस्मोड्रोम से किया गया . यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस धीरे-धीरे कजाकिस्तान स्थित बैकोनूर कॉस्मोड्रोम पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है और अपने घर से ही अंतरिक्ष मिशन लॉन्च करने की क्षमता बढ़ा रहा है.

प्रतिबंधों को ठेंगा

यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे, जिनका मकसद रूस की टेक्नोलॉजी और स्पेस इंडस्ट्री की कमर तोड़ना था. लेकिन रविवार का यह लॉन्च बताता है कि रूस का स्पेस प्रोग्राम न सिर्फ जिंदा है, बल्कि दौड़ रहा है. एक ही रॉकेट से 52 सैटेलाइट्स का सफल प्रक्षेपण यह साबित करता है कि मॉस्को अब भी अंतरिक्ष की रेस में एक महाशक्ति बना हुआ है.

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