यूपी विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी तय करने से पहले समाजवादी पार्टी एक बड़ा आंतरिक सर्वे कराएगी। इसके लिए एक निजी प्रोफेशनल कंपनी को जिम्मा दिया गया है। इस सर्वे के आधार पर जिताऊ उम्मीदवार तलाशे जाएंगे। सपा ने अपने लोगों को इस बाबत संदेश देना शुरू कर दिया है। सर्वे का काम जनवरी में होगा। सर्वे का आधार पीडीए के आधार पर हर विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के जनाधार का आकलन होगा। साथ ही इस कसौटी पर खरा उतरने और जीत की संभावना भी देखी जाएगी। जिन दावेदारों में यह ज्यादा होगी, उसके टिकट की संभावना भी उतनी प्रबल होगी।
सर्वे से यह पता चलेगा कि सपा कांग्रेस गठबंधन भाजपा के मुकाबले किन सीटों पर जीतने की स्थिति में होगा। सपा के हिसाब से वह 107 विधानसभा सीटों पर भाजपा के मुकाबले काफी कमजोर है और इस बार कमजोर कड़ियों को दुरुस्त करने पर सर्वाधिक जोर रहेगा। यह वह सीटें हैं जहां भाजपा का मजबूत जनाधार रहा है।
कमजोर कड़ियों को दुरुस्त करने की कोशिश
इसीलिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कमजोर सीटों पर फोकस करना शुरू कर दिया है। सबसे पहले उन्होंने आगरा, मथुरा पर खास फोकस किया है, जहां 2022 में भाजपा के मुकाबले सपा प्रत्याशी ठहर नहीं पाए। इन जिलों के निषादों व सैनी वोटों पर सपा की खास नजर है। यह अभी भाजपा के समर्थक हैं। अखिलेश यादव ने इसके बाद बुलंदशहर व हापुड़ जिले के कार्यकर्ताओं से विधानसभा सीटवार चर्चा की। अब पार्टी आने वाले वक्त में इस तरह का सिलसिला जारी रखेगी।
कांग्रेस संग गठबंधन बना रहेगा
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने यह भी साफ कह दिया कि हर हाल में सपा कांग्रेस गठबंधन बरकरार रहेगा और दोनों दल लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव भी मिल कर लड़ेंगे। कांग्रेस के लिए सीटों की संख्या चुनाव के वक्त तय होगी। इस बीच कुछ जिला प्रभारी रह चुके नेताओं ने व अन्य दावेदारों ने सोशल मीडिया पर अपना टिकट तय होने का दावा करना शुरू कर दिया। यही नहीं अखिलेश संग अपनी फोटो भी साझा करने लगे। इससे अन्य दावेदार परेशान होने लगे और संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में भ्रम की स्थिति फैलने लगी। इसलिए अखिलेश ने स्पष्ट किया कि कोई अपना टिकट अभी से पक्का न माने।

