इंदौर
गर्मी में मंदिरों में भगवान को शीतलता प्रदान करने के लिए खास व्यंजनों का भोग लगाया जा रहा है। इस्कॉन में ठाकुरजी को हर दिन चंदन का लेपन कर रहे और हलके रंग के वस्त्र पहनाए जा रहे हैं। गुलाब, मोगरा आदि फूलों के साथ मोतियों का शृंगार किया जा रहा है। इसके साथ ही गोवर्धननाथ मंदिर के गर्भगृह सहित अन्य मंदिरों में खस की पट्टी भी लगाई गई है। हर दिन अलग-अलग व्यंजन का भोग लगाया जा रहा है। इसमें सत्तू से बने व्यंजन, गुलाब का शर्बत, आम का पना, लस्सी, छाछ आदि शामिल है।

मौसमी फलों का लगा रहे भोग
प्राचीन रणजीत हनुमान मंदिर में गर्मी में हलके रंग की पोशाक भगवान को पहनाई जा रही है। पुजारी पं. दीपेश व्यास ने कहा- ज्यादातर हलके रंगों का प्रयोग ही गर्मी में किया जा रहा है। भगवान को आम और अन्य मौसमी फलों का भोग भी नित्य लगाया जा रहा है।
इस्कॉन मंदिर, भगवान को करवाया नौका विहार, फूलों का शृंगार
- इस्कॉन मंदिर में गर्मी से बचाव के लिए गर्भगृह में दिनभर एसी चालू रखा जा रहा है। साथ ही ठाकुरजी को हर दिन चंदन का लेपन किया जा रहा। इस्कॉन के अध्यक्ष महामनादास ने कहा- गर्मी में हलके रंग के वस्त्र भगवान को पहनाए जा रहे हैं। इसके अलावा कोशिश करते है कि ज्यादा से ज्यादा दिन फूलों से बने वस्त्र ही भगवान को पहनाए जाएं। दही-चावल और अन्य व्यंजनों का भोग लगाया जा रहा है। साथ ही गुलाब का शर्बत, छाछ, लस्सी आदि का भोग लग रहा है। भगवान को नौका विहार भी करवाया जा रहा है। गर्मी में आरती आधे घंटे लेट की जा रही है। 8.30 बजे होने वाली आरती 9 बजे तक की जा रही है।
खजराना गणेश मंदिर
गर्मी में खजराना गणेशजी को शीतलता प्रदान करने के लिए कॉटन के वस्त्र पहनाए जा रहे। मंदिर के पुजारी पं. अशोक भट्ट ने बताया भगवान को सत्तू से बने व्यंजन और फलों का भोग लगाया गया। अन्य मंदिरों में भी भगवान को शीतलता प्रदान करने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।
गोवर्धननाथ मंदिर – खस की पट्टी लगाई
- प्राचीन गोवर्धननाथ मंदिर में गर्भगृह के बाहर खस की पट्टी लगाई गई है ताकि भगवान को गर्मी न लगे। मंदिर से जुड़े नीलेश नीमा ने बताया आचार्य महाप्रभुजी की सेवा प्रणाली के अनुसार ठाकुरजी का साज-वस्त्र, शृंगार ग्रीष्म ऋतु के अनुरूप ही किया जा रहा है। सफेद और हलके रंग के वस्त्र भगवान को पहनाए जा रहे हैं। गुलाब, चंदन, मोगरा आदि का शृंगार हो रहा है। मिश्री का पना, नीबू की शिकंजी, आम का पना, गुलकंद आदि सामग्रियां मंगलाजी से शयन तक लगाई जा रही हैं।