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संजय राउत 102 दिन बाद जेल से रिहाजमानत के खिलाफ ED हाईकोर्ट पहुंची

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मुंबई

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शिवसेना सांसद संजय राउत को मुंबई की PMLA कोर्ट से 102 दिन बाद जमानत मिल गई है। वह शाम आर्थर रोड जेल से बाहर आए। जेल के बाहर शिवसेना समर्थकों ने नारेबाजी कर और गुलाल उड़ाकर उनका स्वागत किया।

राउत की जमानत के फैसले को प्रर्वतन निदेशालय (ED) ने बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी है। जस्टिस भारती डांगरे इस पर कल सुनवाई करेंगे। कोर्ट ने रिहाई का आदेश तुरंत रोकने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा- सेशन कोर्ट ने फैसला लेने में एक महीना लिया है तो आप हमसे एक दिन में फैसले की उम्मीद कैसे कर सकते हैं।

उद्धव से मिलने के बाद अस्पताल में भर्ती होंगे
शाम पांच बजे सेशन कोर्ट से मिले जमानत आदेश की कॉपी लेकर संजय राउत के भाई सुनील राउत और उनकी लीगल टीम आर्थर रोड जेल पहुंचे थे। उन्होंने कागजी कार्यवाही पूरी कराई। सुनील राउत ने बताया कि संजय की तबीयत ठीक नहीं है। जेल से रिहा होते ही वे शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे से मिलेंगे और एक-दो जगह जाएंगे। इसके बाद अस्पताल में भर्ती हो जाएंगे।

राउत की रिहाई से पहले ही शिवसेना समर्थक भगवा ध्वज लेकर आर्थर रोड जेल के बाहर जमा हो गए थे।

31 जुलाई को अरेस्ट हुए थे शिवसेना सांसद
ED ने राउत को 31 जुलाई को गिरफ्तार किया था। इससे पहले 9 घंटे पूछताछ की थी। राउत से 28 जून को भी ED ने पूछताछ की थी। उनके घर की तलाशी के दौरान ED को 11.5 लाख रुपए नकद मिले थे। राउत या उनके परिवार के लोग इन पैसों का सोर्स नहीं बता पाए थे। संजय पर 1,039 करोड़ के पात्रा चॉल जमीन घोटाले का आरोप है।

जेल के बाहर समर्थकों का जश्न
राउत के समर्थकों को जैसे ही जमानत की जानकारी लगी, वे आर्थर रोड जेल के बाहर जमा हो गए। भगवा ध्वज लहराते हुए गुलाल उड़ाया और जमकर नारेबाजी की। जेल के बाहर समर्थकों की भीड़ को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया था।

क्या है पात्रा चॉल घोटाला?
उत्तरी मुंबई के गोरेगांव में सिद्धार्थ नगर है, यह पात्रा चॉल के नाम से मशहूर है। यहां पर 47 एकड़ में 672 घर हैं। 2008 में महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी MHADA ने रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट शुरू किया और गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड यानी GACPL को 672 किराएदारों का पुनर्वास और इलाके को रिडेवलप करने का कॉन्ट्रैक्ट दिया।

GACPL को पात्रा चॉल के 672 किराएदारों को फ्लैट देना था, MHADA के लिए 3 हजार फ्लैट बनाना था और शेष को निजी डेवलपर्स को बेचना था। हालांकि ED का दावा है कि संजय राउत के करीबी सहयोगी प्रवीण राउत और गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन के अन्य निदेशकों ने MHADA को गुमराह किया।

इसके साथ ही फ्लोर स्पेस इंडेक्स यानी FSI को 9 अलग-अलग निजी डेवलपर्स को बेचकर 901.79 करोड़ रुपए कमाए, लेकिन उन्होंने न तो 672 किराएदारों को फ्लैट दिया और न ही MHADA के लिए कोई फ्लैट बनाया। इसके बाद GACPL ने मीडोज नामक एक प्रोजेक्ट शुरू किया और फ्लैट खरीदारों से लगभग 138 करोड़ रुपए की बुकिंग राशि ली। ED का आरोप है कि इन अवैध गतिविधियों से गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन ने 1,039.79 करोड़ रुपए बनाए।

जांच में ईडी को क्या मिला?
ED ने दावा किया है कि प्रवीण राउत को रियल एस्टेट कंपनी HDIL से 100 करोड़ रुपए मिले। इस पैसे को प्रवीण ने अपने करीबी सहयोगियों, परिवार के सदस्यों और संजय राउत के परिवार को दिया। ED ने आरोप लगाया है कि 2010 में इसमें से 83 लाख रुपए संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत के अकाउंट में भेजे गए। उन्होंने इस पैसे से दादर में एक फ्लैट खरीदा। ED ने दावा किया है कि इसके अलावा महाराष्ट्र के अलीबाग में किहिम बीच पर वर्षा राउत और स्वप्ना पाटकर के नाम पर कम से कम 8 प्लॉट खरीदे गए।

गिरफ्तारी से पहले राउत अपने घर की बालकनी में आए थे और समर्थकों का अभिवादन किया था।

स्वप्ना, संजय राउत के करीबी सहयोगी सुजीत पाटकर की पत्नी हैं। इस लैंड डील में भी नकद पैसे का भुगतान किया गया। ED ने बताया कि इन संपत्तियों की पहचान होने पर प्रवीण राउत और उनके सहयोगियों की इन सभी संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश जारी किया गया है।

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