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ख्वाजा साहब की दरगाह से अब सर्व पंथ समभाव रैली निकाली जाएगी

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एस पी मित्तल,अजमेर

भले ही अजमेर स्थित ख्वाजा साहब की दरगाह से पिछले दिनों हिन्दुस्तान हिला देने, सिर तन से जुदा करने जैसे नारे लगे हों, लेकिन अब इसी दरगाह के मुख्य द्वार से बजरंगबली के मंदिर (बजरंगगढ़) तक एक सर्व पंथ समभाव रैली निकाली जाएगी। यह रैली जिला प्रशासन और दरगाह के खादिमों की प्रतिनिधि संस्था अंजुमन सैयद जादगान के संयुक्त प्रयासों से निकलेगी। इस रैली में हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, बौद्ध धर्म के प्रतिनिधि शामिल होंगे। सर्व पंथ समभाव रैली का मकसद अजमेर के साम्प्रदायिक माहौल को सुधारना है। पिछले दिनों दरगाह में हिन्दुस्तान हिला देने और सिर तन से जुदा करने के नारों के वीडियो न्यूज़ चैनलों पर प्रमुखता से प्रसारित हुए। इस वीडियो पर इसलिए भी आपत्तियां जताई गई कि विश्व भर में ख्वाजा साहब की दरगाह को साम्प्रदायिक सद्भावना का प्रतीक माना जाता है। दरगाह में धार्मिक रस्म निभाने वाले खादिम स्वयं मानते हैं कि जियारत के लिए मुसलमानों से ज्यादा हिन्दू समुदाय के लोग आते है। जब न्यूज चैनलों पर हिंदुस्तान हिला देने और सिर तन से जुदा कर देने के वीडियो प्रसारित हुए तो हिंदुओं की भावनाओं को भी ठेस लगी। ऐसे नारों से जो माहौल बना उसी का परिणाम रहा कि इस बार भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा ख्वाजा साहब की दरगाह के सामने से नहीं निकल सकी। रथ यात्रा के आयोजकों को प्रशासन ने अनुमति नहीं दी, इससे वर्षों पुरानी परंपरा टूट गई। 10 जुलाई को जिला प्रशासन और खादिमों की संस्था अंजुमन के पदाधिकारियों की एक बैठक भी हुई। इस बैठक में धार्मिक परंपराएं टूटने पर अफसोस जताया गया। अंजुमन के वरिष्ठ सदस्य मुनव्वर चिश्ती ने कहा कि अजमेर में भाईचारे का माहौल है। वे स्वयं हिन्दुओं के धार्मिक समारोहों में भाग लेते हैं। सद्भावना का जो माहौल बना हुआ है, वह आगे भी कायम रहना चाहिए। आपसी सहमति के बाद ही सर्व पंथ समभाव रैली निकालने का निर्णय लिया गया। रैली की सफलता के लिए सभी धर्मों के प्रतिनिधियों से संपर्क किया जाएगा। रैली निकालने की पहल को सकारात्मक माना जा रहा है। दरगाह में खादिम समुदाय की ही महत्वपूर्ण भूमिका है और अब खादिम समुदाय की पहल पर ही सर्व पंथ समभाव रैली निकाली जाएगी तो इसका संदेश अच्छा जाएगा।

प्रशासन अनुमति दे:

जिला प्रशासन के साथ हुई बैठक में अंजुमन के सदस्य मुनव्वर चिश्ती ने कहा कि ख्वाजा साहब की दरगाह के सामने से हिन्दू समुदाय के जिन धार्मिक जुलूसों के निकलने की परंपरा है, उसे जारी रखा जाए। प्रशासन भी परंपरागत जुलूस को निकलने की अनुमति प्रदान करे। चिश्ती ने कहा कि धार्मिक जुलूसों का परंपरागत तरीके से ही दरगाह के बाहर स्वागत भी होगा। उन्होंने कहा कि एक दो व्यक्तियों की वजह से संपूर्ण खादिम समुदाय को संदेह के घेरे में नहीं लाया जा सकता। खादिम समुदाय तो जियारत के समय हिन्दू जायरीन की कामयाबी के लिए दुआ करता है।

दरगाह क्षेत्र में अधिकांश दुकानें हिन्दुओं की:

ख्वाजा साहब की दरगाह की वजह से अजमेर में हिन्दू-मुस्लिम भाई चारा काफी मजबूत है। हिन्दू व्यापारी अपनी दुकान खोलने से पहले दुकान की चाबियां दरगाह की सीढिय़ों पर रखते हैं ताकि दिन भर बिक्री होती रहे। दरगाह के आसपास अधिकांश दुकानें हिन्दू समुदाय की है। खादिमों ने हिन्दू दुकानदारों के बीच भी दोस्ताना संबंध है। कई दुकानों और गेस्ट हाउस में तो हिन्दुओं के साथ खादिमों की साझेदारी है। दरगाह में हजारों की संख्या में खादिम परिवार है, इसलिए अजमेर के कारोबार में खादिमों की महत्वपूर्ण भूमिका है7 लेकिन यह पहला मौका रहा जब दरगाह से हिन्दू समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले नारे लगे। अब यदि माहौल को सुधारने के प्रयास हो रहे हैं तो स्वागत किया जाना चाहिए। खादिम मुनव्वर चिश्ती का कहना है कि सर्व पंथ समभाव रैली जल्द ही निकाली जाएगी। रैली के संबंध में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9829031006 पर मुनव्वर चिश्ती से ली जा सकती है। 

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