मध्य प्रदेश परिवहन विभाग (RTO) के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के मामले में बड़ा खुलासा, 50 से ज्यादा बेनामी संपत्तियों का राज खुला,
मध्य प्रदेश आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्माके मामले में हर दिन नया खुलासा हो रहा है। अब 50 से ज्यादा बेनामी संपत्तियों को लेकर नया खुलासा हुआ है। जिसके तहत लोकायुक्त ने 30 से ज्यादा लोगों को नोटिस भेजा है। इन बेनामी संपत्तियों का खुलासा 7 दिन के लिए रिमांड पर लिए गए सौरभ और उसके राजदार चेतन, शरद ने किया है। लोकायुक्त पुलिस की रिमांड का आज छठवां दिन है। अब लोकायुक्त पुलिस इन सभी लोगों से पूछताछ की तैयारी कर रही है।लोकायुक्क्त ने 30 से ज्यादा को भेजा नोटिस, सौरभ नहीं कर रहा जांच में सहयोग, अब इन 30 से पूछताछ की है तैयारी…
दरअसल लोकायुक्त ने सौरभ शर्मा की 50 से ज्यादा संपत्तियों का खुलासा किया है। इनमें भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर शहरों की संपत्तियां शामिल हैं। जांच में पता चला है कि सौरभ ने कई संपत्तियां अपने करीबियों के नाम पर रजिस्टर्ड करवा रखी हैं। इस लिस्ट में 30 से ज्यादा करीबियों के नाम हैं। मामले में सभी को नोटिस भेजा गया है। इन सभी से पूछताछ की जाएगी। बता दें कि सौरभ शर्मा की रिमांड कल 4 फरवरी मंगलवार को खत्म हो जाएगी। लेकिन सौरभ इन संपत्तियों को लेकर जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। जिसके बाद लोकायुक्त ने 30 लोगों को नोटिस भेजा है।
भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में मिले दस्तावेज
बता दें कि छापेमारी के दौरान सौरभ के घर और दफ्तर से भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में स्थित संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। इनमें से ज्यादातर संपत्तियां उसके रिश्तेदारों और करीबियों के नाम पर हैं। लेकिन ऑरिजनल रजिस्ट्री सौरभ के पास ही मिली हैं। सौरभ की कई संपत्तियों की पावर ऑफ अटॉर्नी भी दूसरे लोगों के नाम पर की गई थीं।
बता दें कि सौरभ शर्मा की 7 दिन की रिमांड कल 4 फरवरी मंगलवार को खत्म हो जाएगी। जिसके बाद तीनों सौरभ, चेतन और शरद को कोर्ट में पेश किया जाएगा। मामले में लगातार हो रहे खुलासे के बाद संभावना यही है कि लोकायुक्त पुलिस सौरभ, चेतन और शरद की रिमांड और बढ़ा सकती है।
सौरभ जैसे 10 और… शिकायत 5 की, अब लोकायुक्त पर उठे सवाल
सौरभ शर्मा और उसके राजदार पिछले पांच दिन से लोकायुक्त पुलिस की रिमांंड पर हैं, आज रिमांड का छठा दिन है और कल रिमांड खत्म होते ही तीनों को कोर्ट में पेश होना है, हैरानी की बात ये है कि अब तक लोकायुक्त टीम सौरभ, चेतन और शरद से उगलवा नहीं सकी कि आखिर 52 किलो सोना और 11 करोड़ कैश किसका है? मामले में ही लोकायुक्त सवालों के घेरे में आ गई है…
राजधानी में मेंडोरी के 19 दिसंबर की रात चेतन की कार से जब्त 52 किलो सोना और 11 करोड़ नकदी किसकी, लोकायुक्त यह भी नहीं उलगवा सकी। तीनों इस पर मुंह खोलने को तैयार नहीं है।
सौरभ जैसे 10 और हैं, लेकिन लोकायुक्त ने अब तक नहीं किया कुछ
खास यह है कि सौरभ ने जिन 10 लोगों की फौज के सहारे काली कमाई का पहाड़ खड़ा किया, उनकी शिकायत के बाद भी लोकायुक्त हरकत में नहीं आई। ग्वालियर के अधिवक्ता संकेत साहू ने 29 जनवरी को ही लोकायुक्त और डीजीपी से शिकायत की थी। कहा था, सौरभ के साथ 10 बड़े नाम थे। पूरे प्रदेश को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर वसूली होती थी। ये सभी परिवहन विभाग के आरक्षक थे। इनके पीछे कुछ मौजूदा मंत्री, पूर्व मंत्री, विधायक और अफसरों का गठजोड़ था।
इन आरक्षकों में से ज्यादातर वर्ष 2012 में सेवा में आए, कुछ पुराने भी थे। इन 10 नामों में 5 की नामजद शिकायत कर भ्रष्टाचार में उनकी भूमिका बताई गई। फिर भी लोकायुक्त पांचों तक नहीं पहुंची।
1. नरेन्द्र सिंह भदौरिया
नरेन्द्र सिंह भदौरिया भिंड का रहने वाला है। सौरभ के राइट हैंड के रूप में काम करता था। अपने क्षेत्र में वसूली कर रुपए जमा करता था। एक पूर्व मंत्री का भी नजदीकी है। इंदौर में कोठी बनवा रहा है। श्योपुर, भिंड और ग्वालियर में जमीन खरीदी है।
2. गौरव पाराशर
वर्ष 2012 में सेवा में आया। शिवपुरी जिले का रहने वाला है। एक कांग्रेस नेता का करीबी है। शिवपुरी, श्योपुर, इंदौर और झांसी (उत्तरप्रदेश) में जमीनें खरीदी। पत्नी समेत अन्य के नाम संपत्तियां हैं। कुछ बेची भी हैं।
3. दशरथ पटेल
2019 में सेंधवा बैरियर पर घूसखोरी की शिकायतें सामने आई थी। इंदौर लोकायुक्त को लिखित में शिकायत में कहा था, दशरथ वसूली करता है। धमकाता है, विरोध पर झूठी शिकायतें दर्ज करा देता है। इसमें अन्य अफसर उसकी मदद करते हैं।
4. हेमंत जाटव
शिवपुरी का रहने वाला है। रन्नौद क्षेत्र में रहता है। 2012 में सेवा में आया। सौरभ का राइट हैंड कहलाता है। ग्वालियर, शिवपुरी और श्योपुर में जमीनें खरीद रखी है।
5. धनंजय चौबे
सौरभ का सबसे खास है। इंदौर और छिंदवाड़ा में जमीनें खरीदी। परिवार के लिए सोने के लिए जेवर की खरीदारी की। लग्जरी गाडिय़ों में घूमता है। अलग-अलग नंबरों से लोगों से और सौरभ से संपर्क में रहता था।
शिकायत करने वालों को भोपाल और ग्वालियर के लगवाए चक्कर
संकेत साहू की शिकायत पर लोकायुक्त ने जांच एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाई। जबकि दशरथ की शिकायत करने वालों को बयान के नाम पर भोपाल, ग्वालियर के चक्कर लगवाए थे।

