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महिला बाल विकास विभाग में घोटाले ही घोटाले….. कोरोना काल में किसी भी जिले में ढंग से नहीं बटा पोषण आहार

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भोपाल। । ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस से भाजपा में आई इमरती देवी जिन्हें शिवराज मंत्रीमण्डल में महिला एवं बाल विकास विभाग का मंत्री बनाया गया था लेकिन चुनाव में करारी पराजय के बाद जबसे उन्होंने महिला बाल विकास विभाग के मंत्रीपद से इस्तीफा दिया तबसे लेकर आज तक यह विभाग बिना किसी मंत्री के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के हाथों में इसकी कमान है तभी से लेकर आज तक महिला एवं बाल विकास विभाग एक नहीं अनेकों मामलों को लेकर सुर्खियों में रहा है, लॉकडाउन के दौरान महिला बाल विकास द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से वितिरित पोषण आहार को लेकर मुख्यमंत्री के हाथों में इस विभाग की कमान है इसके द्वारा यह दावा किया गया था कि पूरे प्रदेश में विभाग के द्वारा आंगनबाड़ी के माध्यम से पोषण आहार का वितरण सुचारू रूप से किया गया लेकिन केंद्रीय जांच समिति की रिपोर्ट के द्वारा विभाग के अधिकारियों के इस तरह के दावे के बाद भी १३ जिलों में ठीक से पोषण आहार का वितरण के विभाग के दावे पर सवाल उठाये यदि ठीक से जांच की जाये तो प्रदेश का शायद ही ऐसा कोई जिला होगा जहां विभाग द्वारा पोषण आहार का वितरण ठीक से होना पाया जा सके क्योंकि जो आंगनबाड़ी केंद्रों की अव्यवस्थाओं की खबरे सुर्खियों में रहते हैं सवाल यह है कि क्या लॉकडाउन के दौरान वही आंगनबाड़ी के कार्यकर्ता जो ठीक से आंगनबाडिय़ों में पोषण आहार और अन्य सामग्री का वितरण ठीक से नहीं कर पाते हैं क्या वह अपनी पीठ पर लादकर आंगनबाड़ी से जुड़े बच्चों के घरों में पोषण आहार पहुंचाने की जेहमत कर पाते होंगे? तो वहीं आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में तो लोग फलियों और मजरों टोलों में रहते हैं क्या यहां भी यह आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पोषण आहार का बोझ उठाकर वितरण कर पाये होंगे लेकिन जैसा कि शिवराज सरकार व अन्य सरकारों में अधिकारियों ने हर योजना की फर्जी आंकड़ों की रंगोली सजाकर अपनी मातहतों को खुश करने की जो नीति अपना रखी है लगता है लॉकडाउन के दौरान भी यही सब खेल पूरे प्रदेश में हुआ और पोषण आहार बांटे जाने की योजना की कागजों में फर्जी आंकड़ों की रंगोली सजाकर जमकर पोषण आहार का खेल खेला गया। यही नहीं जिस विभाग की मुखिया के बारे में कई तरह की चर्चायें विभाग में लोग चटकारे लेकर करते नजर आते हैं और उनकी कार्यशैली के बारे में भी कई तरह की चर्चाओं का दौर जारी है सवाल यह उठता है कि १७ नवम्बर २०२० को एक अधिकारी के खिलाफ सचिवालय से प्राप्त शिकायत का प्रतिवेदन देने के लिये विभाग की प्रमुख सचिव स्वाति मीणा नायक को निर्देशित किया गया था उन्हीं स्वाति मीणा नायक ने अभी तक अलीराजपुर के पूर्व परियोजना अधिकारी गोंडिया के खिलाफ प्रमुख अशोक दास को प्राप्त शिकायत पर अपना प्रतिवेदन स्वाति मीणा नायक ने प्रस्तुत नहीं किया सवाल यह उठता है कि ऐसे एक नहीं अनेकों मामले महिला बाल विकास की कार्यशैली के चर्चाओं में है और ऐसी स्थिति में हाल ही में २१ अधिकारियों के स्थानान्तरण होना और मजे की बात तो यह है कि दूसरे दिन दोपहर तक दतिया की शोभा अग्रवाल का स्थानान्तरण में फेरबदल किया जाना भी इस ओर इशारा करते हैं कि विभाग में भजकलदारम् का दौर जोरों पर जारी है, जिसकी बदौलत विभाग के अधिकारी अपनी मनचाही पदस्थापना पो में सफल हो रहे हैं। विभाग में यह खबर चर्चाओं में है कि इन २१ अधिकारियों की सूची में मुख्यालय से कई अधिकारियों को जिलों में जाने का आदेश किया गया लेकिन वह कोई बीमारी की वजह से कोई पारिवारिक समस्या की वजह से जाने को तैयार नहीं है ऐसी स्थिति में यही सवाल उठता है कि विभाग में भजकलदारम् का दौर धड़ल्ले से जारी है। यदि यही स्थिति रही तो विभाग के अधिकारी अपनी इस कथित कार्यशैली के चलते मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की ईमानदार छवि को भी बट्टा लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे?

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