खैबर पख्तूनख्वा में पाकिस्तानी पुलिस ने मार गिराए छह आतंकवादी
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और इसके असर वैश्विक राजनीति से लेकर ऊर्जा आपूर्ति तक देखने को मिल रहे हैं। अमेरिका ने ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई और उनसे जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारियों पर जानकारी देने के बदले एक करोड़ डॉलर तक का इनाम घोषित किया है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खार्ग द्वीप पर बड़े पैमाने पर हमला कर वहां के सभी सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने भारत के दो एलपीजी टैंकरों को गुजरने की अनुमति दी है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति से जुड़े जोखिमों के बीच कुछ राहत मिली है। वहीं अमेरिका ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा को देखते हुए पश्चिम एशिया में करीब 2500 मरीन सैनिक और एक युद्धपोत तैनात करने का फैसला किया है। दूसरी ओर भारत भी भविष्य के खतरों को देखते हुए अपनी सुरक्षा रणनीति को मजबूत कर रहा है। रक्षा बल विजन-2047 दस्तावेज में रासायनिक, जैविक और परमाणु हमलों से निपटने के लिए आधुनिक और एकीकृत सुरक्षा प्रणाली तैयार करने की योजना बनाई गई है। देश के भीतर भी कई महत्वपूर्ण मुद्दे चर्चा में हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में करीब 46 प्रतिशत लोग रोज छह घंटे से कम सोते हैं, जिसे विशेषज्ञों ने बढ़ती स्वास्थ्य समस्या बताया है। वहीं मौसम विभाग ने पश्चिमी विक्षोभ के कारण कई राज्यों में बारिश, आंधी और वज्रपात की चेतावनी दी है। इसके अलावा भारत ने ऊर्जा संकट के बीच बांग्लादेश को डीजल की आपूर्ति कर क्षेत्रीय सहयोग का उदाहरण भी पेश किया है।
श्रीलंका से स्वदेश लौटे 14 भारतीय मछुआरे; केरल चुनाव के लिए उम्मीदवारों पर कांग्रेस का मंथन
आगामी केरल विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा पर कांग्रेस नेता वी.डी. सतीशन ने कहा कि स्क्रीनिंग कमेटी के लिए एआईसीसी द्वारा एक प्रक्रिया प्रस्तावित की गई है। यह प्रक्रिया कई वर्षों से चली आ रही है। वह प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि हमें स्क्रीनिंग कमेटी में इस पर विस्तार से चर्चा करनी होगी। फिर स्क्रीनिंग कमेटी एक दस्तावेज प्रस्तावित करेगी और उसे केंद्रीय चुनाव समिति के समक्ष प्रस्तुत करेगी। उन्होंने बताया कि कल हमने कई सीटों के लिए उम्मीदवार चुन लिए हैं, लेकिन अभी तक घोषणा नहीं की है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव की तारीखों के एलान पर निर्भर करता है। अब यह स्पष्ट है कि चुनाव की तारीख बढ़ा दी गई है। चुनाव की तारीख जाने बिना हम उम्मीदवारों की घोषणा कैसे कर सकते हैं? उन्होंने कहा कि केरल में एलडीएफ के साथ भी यही स्थिति है। उन्होंने 8 तारीख को घोषणा करने का फैसला किया था, लेकिन चुनाव की घोषणा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। भाजपा ने केरल में एक भी उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। इसीलिए हम देरी कर रहे हैं। हम केवल चुनाव की तारीख के कारण ही देरी कर रहे हैं।
श्रीलंका से स्वदेश लौटे 14 भारतीय मछुआरे
श्रीलंका में हिरासत में लिए गए 14 भारतीय मछुआरों को स्वदेश वापस भेज दिया गया है। यह जानकारी श्रीलंका स्थित भारतीय उच्चायोग ने शुक्रवार को दी। कोलंबो स्थित भारतीय दूतावास ने एक पोस्ट में बताया, “आज 14 भारतीय मछुआरों को श्रीलंका से स्वदेश वापस भेज दिया गया है और वे अपने घर लौट रहे हैं।” इससे पहले श्रीलंका के सांसद हर्षा डी सिल्वा ने एएनआई को बताया कि श्रीलंका में भारतीय मछुआरों का मुद्दा एक चिरस्थायी समस्या है और यह जल्द ही हल नहीं होगा, क्योंकि दोनों पक्ष अपनी आजीविका के लिए मछली पकड़ने पर निर्भर हैं।
हैदराबाद: गैस की कमी से होटलों में लकड़ी से पक रहा खाना, मेनू सीमित
एलपीजी सिलिंडरों की लगातार कमी के कारण होटलों को लकड़ी के चूल्हे का इस्तेमाल करना पड़ रहा है और मेनू में कटौती करनी पड़ रही है। हैदराबाद में प्रवासी मजदूर खाना पकाने के लिए पुराने पंप स्टोव की मरम्मत कर रहे हैं, जिससे पंप स्टोव मरम्मत केंद्रों पर मांग बढ़ गई है। यह सब पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण एलपीजी की वैश्विक आपूर्ति में आ रही दिक्कतों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच हो रहा है। हैदराबाद में व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की कमी के चलते प्रवासी मजदूर खाना पकाने के लिए पंप स्टोव की मरम्मत कर रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप पंप स्टोव मरम्मत केंद्रों पर बिक्री में तेजी आई है।
पश्चिम एशिया संकट के बीच विमानन कंपनियों की मुश्किलें बढ़ीं
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारतीय विमानन कंपनियों की लागत बढ़ने लगी है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो और एअर इंडिया ने केंद्र सरकार से ईंधन कर में कटौती और निजी हवाई अड्डों पर लगने वाले शुल्क कम कराने की मांग की है। सूत्रों के अनुसार, ईरान से जुड़े तनाव के कारण पश्चिम एशिया के कई हवाई मार्गों का उपयोग करना कठिन हो गया है। वहीं भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव के चलते भारतीय एयरलाइनों को पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की भी अनुमति नहीं है। ऐसे में कंपनियों को लंबा मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जिससे परिचालन लागत बढ़ रही है। बताया गया है कि इंडिगो ब्रिटेन के लिए उड़ानों में अफ्रीका के रास्ते जा रही है, जबकि एअर इंडिया को उत्तर अमेरिका जाने वाली उड़ानों में बीच में ठहराव जोड़ना पड़ रहा है। इससे ईंधन और परिचालन खर्च बढ़ रहा है।
चाय ₹20 की, शादियों के मेन्यू पर कैंची और मरीजों की रोटी बंद
पश्चिम एशिया में ईरान-इस्राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर भारत की घरेलू और व्यावसायिक रसोई गैस आपूर्ति पर पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली आवाजाही प्रभावित होने की खबरों ने उपभोक्ताओं के बीच घबराहट बढ़ा दी है। यही कारण है कि रसोई गैस की मांग और कालाबाजारी दोनों अचानक से बढ़ गई है। एक तरफ आम लोग घंटों लाइनों में खड़े हैं, तो दूसरी तरफ उद्योग-धंधे ठप होने की कगार पर पहुंच गए हैं. आइए सवाल-जवाब के जरिए इस संकट की राज्यवार जमीनी हकीकत और सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का विश्लेषण करते हैं।
सवाल: पश्चिम एशिया के तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट ने भारत में एलपीजी सप्लाई चेन को किस तरह प्रभावित किया है?
जवाब: पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखला में भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है। इस भू-राजनीतिक संकट का सीधा असर भारत की रसोई और व्यापार पर पड़ा है, क्योंकि भारत अपनी कुल एलपीजी खपत का लगभग 60 से 62 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इस आयात का 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों से आता है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। युद्ध के कारण यह मार्ग लगभग बंद जैसी स्थिति में आ गया है, जिससे जहाजों की आवाजाही धीमी हो गई है, बीमा लागत बढ़ गई है और गैस की खेप समय पर नहीं पहुंच पा रही है।
सवाल: इस वैश्विक संकट से आम भारतीयों के बीच क्या चिंताएं और परेशानियां पैदा हुई हैं?
जवाब: होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान की खबरों ने देश भर में गैस की कमी की आशंकाओं को जन्म दिया है। नतीजतन, आम जनता के बीच पैनिक बुकिंग शुरू हो गई है। लोग गैस खाली होते ही तुरंत नया सिलेंडर बुक कर रहे हैं, जिससे गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग गई हैं और डिलीवरी सिस्टम चरमरा गया है। भारत के पास कच्चे तेल की तरह एलपीजी का लंबा रणनीतिक भंडार नहीं है; देश में आमतौर पर केवल 25 से 30 दिन का ही एलपीजी स्टॉक रहता है। यही कारण है कि आयात में जरा सी भी देरी का असर सीधे आम आदमी के घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर दिखने लगा है, जिससे होटलों के मेन्यू छोटे हो गए हैं और शादियों के कैटरर्स बुकिंग रद्द कर रहे हैं।
सवाल: देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश और राजधानी दिल्ली में एलपीजी की जमीनी हकीकत और कालाबाजारी की क्या स्थिति है?
जवाब: उत्तर प्रदेश और दिल्ली एनसीआर में स्थिति काफी तनावपूर्ण है, जहां आम लोग और छोटे कारोबारी दोनों ही गैस की किल्लत से जूझ रहे हैं। दिल्ली के कई हिस्सों में गैस संकट के चलते ‘ब्लैक मार्केटिंग’ का खुला खेल चल रहा है। जो घरेलू सिलेंडर सामान्य तौर पर 1000 रुपये के आसपास मिलता है, उसे ‘दो घंटे में तुरंत डिलीवरी’ का लालच देकर 2500 रुपये तक में बेचा जा रहा है। शादियों के इस सीजन में कैटरिंग संचालकों को गैस न मिलने के कारण मेन्यू में 30 से 40 फीसदी तक की कटौती करनी पड़ रही है। हालांकि, दिल्ली के कुछ क्षेत्रों, जैसे चिल्ला (पूर्वी दिल्ली) के गोदामों में स्थिति सामान्य बनी हुई है, जहां 5 से 7 मिनट के भीतर सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के आगरा में कमर्शियल सिलेंडरों की किल्लत के कारण 3500 रुपये खर्च करने पर भी गैस नहीं मिल रही है, जिसके परिणामस्वरूप बाजार में 10 रुपये की चाय 20 रुपये में और 10 रुपये का समोसा 14 रुपये में बिक रहा है। वाराणसी (काशी) की स्थिति और भी गंभीर है, जहां कमर्शियल सप्लाई ठप होने के कारण प्रसिद्ध ‘होटल रीजेंसी’, पातालपुरी मठ और अपना घर आश्रम जैसे स्थानों पर भोजन बनाने के लिए छतों पर मिट्टी और लकड़ी के चूल्हे बना दिए गए हैं।
सवाल: पंजाब और हरियाणा में एलपीजी किल्लत का औद्योगिक इकाइयों और शादियों पर क्या असर देखा जा रहा है?
जवाब: उत्तर भारत के इन दोनों राज्यों में कमर्शियल गैस की कमी ने व्यापार और उत्सवों पर ग्रहण लगा दिया है। पंजाब में गैस का स्टॉक कम होने की खबरों के बीच हाहाकार मचा हुआ है। चंडीगढ़ और मोहाली में लंबी लाइनें देखी जा रही हैं; जीरकपुर में रिफिल के लिए कालाबाजारी में 1700 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। बरनाला जिले में गैस के लिए कतार में लगे 66 वर्षीय बुजुर्ग भूषण कुमार की अपनी बारी का इंतजार करते समय हार्ट अटैक से मौत हो गई। गैस न होने के कारण कैटरर्स ने शादियों के लिए लिया गया एडवांस पैसा लौटाना शुरू कर दिया है। हरियाणा के औद्योगिक शहर पानीपत में एलपीजी और पीएनजी की किल्लत के कारण लगभग 300 फैक्ट्रियां और डाइंग हाउस बंद हो चुके हैं। हिसार, सिरसा, और फतेहाबाद की सभी गैस एजेंसियों पर कमर्शियल बुकिंग बंद कर दी गई है, जिसके चलते होटल और मिठाई संचालकों ने वर्षों बाद एक बार फिर प्रदूषणकारी ‘डीजल भट्ठियों’ को चालू कर दिया है।
सवाल: पहाड़ी राज्यों-हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में गैस एजेंसियों का क्या हाल है?
जवाब: रसद के लिहाज से चुनौतीपूर्ण इन पहाड़ी क्षेत्रों में आपूर्ति शृंखला बुरी तरह चरमराई है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में कमर्शियल सिलेंडर पूरी तरह से अनुपलब्ध होने की खबरें हैं। ‘दून होटल ओनर एसोसिएशन’ के अनुसार स्टॉक खत्म होने की कगार पर है और रेस्टोरेंट संचालक तेजी से इंडक्शन चूल्हों की ओर रुख कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला और आसपास के क्षेत्रों में गैस खत्म होने की अफवाहें तेजी से फैली हैं, जिसके चलते लोग एजेंसियों पर भारी भीड़ लगाकर सिलेंडर जमा कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में स्थिति आधिकारिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच विरोधाभास दिखाती है। डिविजनल कमिश्नर ने दावा किया है कि घाटी में 13 दिन का एलपीजी स्टॉक मौजूद है। इसके उलट, जम्मू क्षेत्र में घरेलू उपभोक्ताओं को 25-25 दिन तक रिफिल नहीं मिल रहा है, बुकिंग के बाद ओटीपी नहीं आ रहे हैं, और कमर्शियल सिलेंडर न मिलने से ढाबे बंद होने की कगार पर हैं।
सवाल: मध्य प्रदेश और राजस्थान में छात्रों की मेस और स्ट्रीट फूड का कारोबार कैसे प्रभावित हुआ है?
जवाब: इन दोनों राज्यों में शिक्षा और खान-पान के प्रमुख हब गैस किल्लत का खामियाजा भुगत रहे हैं। मध्य प्रदेश के इंदौर का प्रसिद्ध सराफा बाजार, जो अपने स्ट्रीट फूड के लिए जाना जाता है, बुरी तरह प्रभावित है। तेज आंच की जरूरत वाले ‘भुट्टे का किस’ और ‘गराडू’ जैसे व्यंजन अब नहीं बन पा रहे हैं, और ‘छप्पन दुकान’ के व्यापारी मजबूरी में इंडक्शन का इस्तेमाल कर रहे हैं। छतरपुर जिले में कालाबाजारी रोकने के लिए मारे गए छापों में 38 अवैध कमर्शियल सिलेंडर जब्त किए गए हैं। राजस्थान में कोचिंग के लिए प्रसिद्ध शहर कोटा, जहां 500 से अधिक मेस रोजाना 30,000 छात्रों को भोजन कराती हैं, वहां गैस संकट के कारण थाली में डिश की संख्या घटाकर एक कर दी गई है। तवा चपाती की जगह तंदूरी रोटी दी जा रही है और नाश्ते में केवल सूखा भोजन परोसा जा रहा है।
सवाल: बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन बुकिंग और औद्योगिक इकाइयों की क्या स्थिति है?
जवाब: पूर्वी और मध्य भारत के इन राज्यों में तकनीकी विफलताएं और औद्योगिक आपूर्ति में कटौती प्रमुख समस्याएं हैं। बिहार की राजधानी पटना में ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम ठप हो गया है। लोगों को बुकिंग के समय 951 रुपये का मैसेज आता है, लेकिन वेंडर 1011 रुपये वसूल रहे हैं; नाराज लोगों ने पटना में एनएच 98 को भी जाम कर दिया। इस परेशानी को देखते हुए दरभंगा के जिलाधिकारी ने गैस डिलीवरी के लिए जरूरी छह अंकों वाले डीएसी (डिलिवरी ऑथेंटिकेशन कोड) की अनिवार्यता को तत्काल प्रभाव से खत्म कर दिया है। झारखंड के सरायकेला-खरसावां में स्थित आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में कमर्शियल गैस की आपूर्ति रुकने से 1300 औद्योगिक इकाइयों (जो टाटा मोटर्स को पुर्जे सप्लाई करती हैं) का संचालन बाधित हो गया है। रांची और जमशेदपुर के होटल ने कोयले और इलेक्ट्रिक चूल्हे इस्तेमाल करने लगे हैं। छत्तीसगढ़ में एलपीजी किल्लत एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है। विधानसभा में विपक्षी कांग्रेस विधायकों ने गैस की कमी और बढ़ती कीमतों पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा किया, जिसके चलते 30 विधायकों को निलंबित कर दिया गया।
सवाल: महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में क्या हाल है? क्या वहां भी गैस के लिए मारामारी है?
जवाब: मुंबई में मंझोले और छोटे आकार के 20 प्रतिशत रेस्तरां बंद हो गए हैं और होटल उद्योग ने कहा है यदि आपूर्ति बाधित रही तो दो दिन भीतर 50 प्रतिशत तक रेस्टोरेंट और होटल जल्द ही बंद हो सकते हैं। बंगलूरू से भी ऐसी ही खबरें हैं। कई गैस एजेंसियों में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के लिए पूछताछ में घबराहट बढ़ गई है, हालांकि डीलरों ने बुधवार को कहा कि फिलहाल स्टॉक पर्याप्त है। दूसरी ओर एक एलपीजी डीलर ने पीटीआई को बताया, व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की भारी कमी है, जिसके कारण शहर के कई होटल और रेस्तरां दबाव में काम करने के लिए मजबूर हैं। होटल और रेस्तरां मालिकों ने दोहराया कि उनका स्टॉक खत्म हो जाने पर उन्हें बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इंडेन के वितरक गिरिधर एजेंसीज के एक प्रतिनिधि ने कहा कि घरेलू उपयोग के लिए एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति में कोई व्यवधान नहीं आया है।
सवाल: क्या देश में वास्तव में एलपीजी की कमी है? संसद में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने क्या आश्वासन दिए हैं?
जवाब: केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ तौर पर घरेलू एलपीजी की किसी भी वास्तविक कमी से इनकार किया है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में बयान देते हुए कहा कि देश में 33 करोड़ से अधिक परिवारों की रसोई सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और घरेलू गैस की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है। मंत्री ने कहा कि वर्तमान संकट आपूर्ति की कमी से नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं की ‘उपभोक्ता चिंता’ और डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर होने वाली ‘पैनिक बुकिंग’ और जमाखोरी से पैदा हुआ है। इसके अलावा, सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को बिना किसी रुकावट के गैस मिलती रहे।
सवाल: उत्पादन बढ़ाने और आयात को सुरक्षित करने के लिए केंद्र सरकार ने क्या कूटनीतिक और रणनीतिक कदम उठाए हैं?
जवाब: वैश्विक बाजार की अस्थिरता को देखते हुए सरकार ने कई मोर्चों पर काम किया है:
- रिफाइनरी उत्पादन में बढ़ोतरी: सरकार ने 8 मार्च को एक ‘एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर’ जारी किया, जिसके तहत देश की सभी रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया कि वे सी 3 और सी4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम (प्रोपेन, ब्यूटेन आदि) का इस्तेमाल पूरी तरह से एलपीजी बनाने में करें। इसके परिणामस्वरूप केवल पांच दिनों में घरेलू एलपीजी उत्पादन में 25 से 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
- आयात विविधीकरण: होर्मुज मार्ग के बाधित होने पर भारत ने अन्य रास्तों से आयात तेज कर दिया है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, संकट से पहले 45% कच्चा तेल होर्मुज के रास्ते आता था, लेकिन अब ‘नॉन-होर्मुज’ रास्तों से होने वाला आयात 55% से बढ़कर 70% हो गया है।
- सप्लायर देशों की संख्या में वृद्धि: भारत की ऊर्जा सुरक्षा नीति के तहत तेल और गैस खरीदने वाले देशों की संख्या जो 2006-07 में 27 थी, वह अब बढ़कर 40 हो गई है।
- घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता और कीमतों से बचाव: वैश्विक बाजार में ‘सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस’ में 41% की वृद्धि होने के बावजूद सरकार ने सब्सिडी और टैक्स का बोझ खुद उठाकर घरेलू कीमतों को स्थिर रखने का प्रयास किया है, हालांकि हाल ही में घरेलू सिलेंडर में 60 रुपये और कमर्शियल में 114.50 रुपये का इजाफा हुआ है।
सवाल: कमर्शियल गैस की किल्लत दूर करने के लिए मंत्रालय और तेल कंपनियों का सप्लाई चेन मैनेजमेंट कैसा है? क्या वैकल्पिक ईंधन पेश किए गए हैं?
जवाब: चूंकि घरेलू गैस को प्राथमिकता दी गई है, इसलिए व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों में गैस की आपूर्ति में भारी कटौती की गई है। इस खालीपन को भरने के लिए सरकार ने एक आपातकालीन रणनीति लागू की है:
- केरोसिन की वापसी: स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के लिए जिस केरोसिन को रसोई से बाहर कर दिया गया था, उसे अब वापस लाया गया है। केंद्र सरकार ने राज्यों को उनके 1 लाख किलोलीटर के नियमित कोटे के अलावा 48,000 किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन आवंटित किया है। इसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली और तेल कंपनियों के रिटेल आउटलेट्स के जरिए बांटा जाएगा, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों और होटलों को फौरी राहत मिल सके।
- कोयला और बायोमास का उपयोग: पर्यावरण मंत्रालय ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को सलाह दी है कि वे एक महीने के लिए होटलों और रेस्टोरेंट्स को बायोमास, आरडीएफ पेलेट्स और कोयले का उपयोग करने की अस्थायी छूट दें, जो सामान्य तौर पर प्रदूषण मानकों के कारण प्रतिबंधित होते हैं।
- आपूर्ति का विनियमन: तेल कंपनियों ने कालाबाजारी रोकने के लिए कमर्शियल गैस के आवंटन को सख्ती से रेगुलेट किया है और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए दो बुकिंग के बीच शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन का अनिवार्य अंतर तय कर दिया है।
सवाल: गैस संकट, जमाखोरी और कालाबाजारी को लेकर राज्य सरकारें और स्थानीय प्रशासन कितने सतर्क हैं?
जवाब: अफवाहों और पैनिक से निपटने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद राज्य सरकारें एक्शन मोड में हैं।
- प्रशासनिक निगरानी और छापे: गृह सचिव ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और डीजीपी को जमाखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके अनुपालन में मध्य प्रदेश के छतरपुर और महाराष्ट्र के नागपुर में अवैध रूप से स्टोर किए गए सिलेंडरों के खिलाफ छापे मारे गए। देहरादून में प्रशासन ने आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कालाबाजारी करने वालों को जेल भेजने की चेतावनी दी है।
- राज्यों के बयान: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उपायुक्तों के साथ बैठक कर स्पष्ट किया है कि प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और गैस का पर्याप्त स्टॉक है और लोग अफवाहों पर ध्यान न दें। दिल्ली सरकार ने भी एक आधिकारिक बयान जारी कर राजधानी में ईंधन की कमी से साफ इनकार किया है।
- शिकायत निवारण: तेलंगाना सरकार ने गैस से जुड़ी समस्याओं के लिए 1967 टोल-फ्री नंबर जारी किया है, जबकि गाजियाबाद और चंदौली प्रशासन ने भी हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम स्थापित किए हैं।
सवाल: गैस न मिलने के कारण बाजार और उपभोक्ताओं के व्यवहार में अचानक क्या बड़े बदलाव आए हैं?
जवाब: गैस संकट ने बाजार में एक ‘डोमिनो इफेक्ट’ पैदा कर दिया है, जिससे न केवल रसोई बल्कि खाद्य और इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार भी हिल गया है।
- पैनिक बुकिंग का दबाव: युद्ध की खबर फैलते ही आम जनता ने घबराहट में अतिरिक्त सिलेंडरों की बुकिंग शुरू कर दी। इसी ‘पैनिक बाइंग’ ने सिस्टम पर अचानक इतना बोझ डाल दिया कि डिलीवरी की शृंखला टूट गई।
- होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर पर असर: कमर्शियल गैस न मिलने से रेस्टोरेंट्स ने अपने मेन्यू छोटे कर दिए हैं। तंदूर और ऐसे व्यंजन जिनमें ज्यादा गैस लगती है (जैसे डोसा, पिज्जा), उन्हें मेन्यू से हटाया जा रहा है। जोमाटो और स्विगी जैसे ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर भी मार्च और अप्रैल के डिलीवरी वॉल्यूम में गिरावट की आशंका जताई जा रही है।
- इलेक्ट्रिक उपकरणों की मांग में उछाल: गैस के विकल्प के रूप में इंडक्शन चूल्हे, इलेक्ट्रिक हीटर और केटल की मांग में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। जयपुर, आगरा और वाराणसी के बाजारों में इंडक्शन की बिक्री 15 फीसदी तक बढ़ गई है, जिसके चलते ऑनलाइन और ऑफलाइन दुकानदारों ने इनके दाम बढ़ा दिए हैं।
सवाल: एलपीजी सप्लाई चेन, भारत की आयात निर्भरता और ग्लोबल ऑयल मार्केट के दबाव का अर्थव्यवस्था पर क्या दीर्घकालिक असर पड़ेगा?
जवाब: यह संकट भारत के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और आपूर्ति शृंखला की कुछ अंतर्निहित कमजोरियों को उजागर करता है।
- आयात निर्भरता और चोकप्वाइंट का जोखिम: भारत प्रतिवर्ष 30 मिलियन टन से अधिक एलपीजी की खपत करता है, जिसका घरेलू उत्पादन केवल 40-45% ही मांग को पूरा कर पाता है। बाकी 60% के लिए भारत होर्मुज जलडमरूमध्य पर अत्यधिक निर्भर है। जब तक भारत इस क्षेत्र से परे अपने सोर्सिंग नेटवर्क (जैसे अमेरिका या अन्य देशों से) को पूरी तरह से विविधीकृत नहीं कर लेता, तब तक भू-राजनीतिक झटके बाजार को अस्थिर करते रहेंगे।
- भंडारण क्षमता की कमी: कच्चे तेल के लिए भारत के पास ‘रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार’ हैं जो 60 दिनों तक चल सकते हैं, लेकिन एलपीजी और एलएनजी (एलएनजी) के लिए क्रायोजेनिक और उच्च दबाव वाले स्टोरेज बनाना बहुत महंगा है। इसलिए भारत के पास मात्र 25-30 दिनों का एलपीजी बफर स्टॉक होता है। इस ‘जस्ट-इन-टाइम’ डिलीवरी मॉडल के कारण थोड़ी सी भी शिपिंग देरी बाजार में खलबली मचा देती है।
- आने वाले महीनों में संभावित स्थिति: फ्यूचर्स मार्केट के अनुमानों के मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही तक एलपीजी की कीमतें ऊंची बनी रहने की संभावना है। यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो हॉस्पिटैलिटी सेक्टर और एमएसएमई उद्योगों को लंबे समय तक वैकल्पिक ईंधनों पर निर्भर रहना पड़ सकता है, जिससे पैकेजिंग सामग्री और तैयार माल की लागत बढ़ेगी।
क्या भारत में सचमुच एलपीजी संकट है या यह सिर्फ अफरातफरी की स्थिति है?
जमीनी हालात के आकलन से हम यह कह सकते हैं कि घरेलू गैस के मोर्चे पर पैनिक और कमर्शियल गैस के मोर्चे पर वास्तविक संकट की स्थिति है। सरकार और तेल कंपनियों ने घरेलू उत्पादन को 25-28% बढ़ाकर और 33 करोड़ परिवारों को प्राथमिकता देकर घरों की रसोई को काफी हद तक सुरक्षित कर लिया है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एजेंसियों पर जो लंबी लाइनें दिख रही हैं, वह मुख्य रूप से अफवाह, कालाबाजारी और लोगों के बीच घबराहट के कारण अधिक है, जिससे बचने की जरूरत है।
हालांकि, कमर्शियल और औद्योगिक क्षेत्र के लिए गैस की परेशानी कोई अफवाह नहीं बल्कि एक कड़वी सच्चाई है। कमर्शियल सप्लाई को रोककर घरों की तरफ मोड़ने की नीति के कारण रेस्टोरेंट, होटल, शादियों के कैटरर्स और एमएसएमई इकाइयां बुरी तरह से गैस की कमी से जूझ रही हैं। चाय और समोसे के बढ़ते दाम, बंद होती फैक्ट्रियां और छतों पर जलते लकड़ी के चूल्हे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि भू-राजनीतिक तनाव ने भारत के व्यावसायिक ढांचे पर असर डाला है। अंततः, जब तक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पूरी तरह सुरक्षित और बहाल नहीं हो जाते, तब तक सरकार को वैकल्पिक ईंधनों के सहारे और सख्त प्रशासनिक निगरानी के बल पर ही इस सप्लाई चेन को सुचारू रखना होगा और तब तक आम लोगों को अफवाहों पर ध्यान न देकर अपने विवेक का इस्तेमाल करना होगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर रहा भारतीय जहाज, सूत्रों का दावा- नौसेना के युद्धपोत सतर्क
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दिन-प्रतिदिन और भयावह होता जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल के भीषण हमलों से दहक रहा ईरान भी जोरदार पलटवार कर रहा है। मिसाइलों और ड्रोन की गरज के बीच यह संघर्ष अब पंद्रहवें दिन में प्रवेश कर चुका है। होमुर्ज में जहाजों पर हमले जारी है। पूरा क्षेत्र तनाव की चपेट में है। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का युद्ध को लेकर सख्त रवैया और खाड़ी देशों में बढ़ता संघर्ष, वैश्विक राजनीति के लिया बड़ा संकट साबित होता दिख रहा है। भारत ने कहा है कि तेजी से बदलती परिस्थितियों पर सरकार की पैनी नजर है।
होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहा भारतीय जहाज ‘शिवालिक’, नौसेना सतर्क
भारतीय ध्वज वाला गैस ले जा रहा जहाज ‘शिवालिक’ होर्मुज जलडमरूमध्य से बिना किसी सैन्य एस्कॉर्ट के गुजर रहा है। सूत्रों के अनुसार क्षेत्र में मौजूद भारतीय नौसेना के युद्धपोत पूरी तरह सतर्क हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। जरूरत पड़ने पर जहाज को सुरक्षा सहायता देने के लिए नौसैनिक पोत स्टैंडबाय पर रखे गए हैं। इलाके में बढ़ते तनाव के बीच यह निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है।
बहरीन में सायरन के बाद हाई अलर्ट
बहरीन में सायरन बजने के बाद सरकार ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। गृह मंत्रालय ने नागरिकों और वहां रह रहे लोगों से शांत रहने और तुरंत नजदीकी सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा है। अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा हालात पर नजर रखी जा रही है और लोगों को आधिकारिक निर्देशों का पालन करना चाहिए। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण एहतियाती कदम उठाए गए हैं।
कतर में हाई अलर्ट जारी
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कतर में सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया है। कतर के अधिकारियों ने मोबाइल फोन के जरिए देशभर के लोगों को चेतावनी संदेश भेजा है। इसमें संभावित मिसाइल या ड्रोन हमले और उन्हें रोकने की कार्रवाई की जानकारी दी गई है। अलर्ट में नागरिकों से कहा गया है कि वे अपनी सुरक्षा के लिए घरों और सुरक्षित स्थानों में ही रहें। साथ ही खिड़कियों, कांच की दीवारों और खुले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई है। अधिकारियों ने कहा है कि खतरा पूरी तरह टलने तक सावधानी बरतना जरूरी है।
लेबनान में इस्राइली हवाई हमले में दो स्वास्थ्यकर्मियों की मौत
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि इस्राइल के हवाई हमले में दो स्वास्थ्यकर्मियों की मौत हो गई और पांच अन्य घायल हो गए। मंत्रालय के अनुसार हमला एक संयुक्त मेडिकल पॉइंट पर हुआ, जिसे इस्लामिक हेल्थ अथॉरिटी और इस्लामिक मैसेज स्काउट्स मिलकर चला रहे थे। लेबनान सरकार ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन है। मंत्रालय ने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षा देना अंतरराष्ट्रीय कानून में स्पष्ट रूप से तय है, इसके बावजूद पैरामेडिक्स को निशाना बनाना बेहद खतरनाक और अस्वीकार्य कदम है।
कुवैत ने संदिग्ध ड्रोन मार गिराया, बढ़ाई गई महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा
कुवैत की नेशनल गार्ड ने एक संदिग्ध ड्रोन को मार गिराने की जानकारी दी है। नेशनल गार्ड के आधिकारिक प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल जदान फदल जदान ने बताया कि यह कार्रवाई उस इलाके में की गई जहां सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी तय की गई थी। कुवैत की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार ड्रोन को गिराने का कदम सुरक्षा मजबूत करने और महत्वपूर्ण ठिकानों की रक्षा के लिए उठाया गया। अधिकारियों ने कहा कि संभावित खतरों को रोकने और देश की रणनीतिक जगहों को सुरक्षित रखने के लिए सुरक्षा एजेंसियां लगातार सतर्क हैं।
तेहरान में जोरदार धमाके, कई इलाकों में विस्फोट से दहला शहर
ईरान की राजधानी तेहरान में शनिवार रात जोरदार धमाकों से कई इलाके दहल गए। शहर के मध्य हिस्से के पास कई बड़े विस्फोट सुने गए, जिनसे आसपास के कई ब्लॉक तक झटके महसूस किए गए। यह धमाके उस इलाके के पास हुए जहां बड़ी संख्या में नागरिक रहते हैं। बताया जा रहा है कि एक धार्मिक ट्रस्ट की खाली इमारत को निशाना बनाया गया, जो एक नागरिक अस्पताल के काफी करीब स्थित है। विस्फोट से इमारत को भारी नुकसान पहुंचा है और अस्पताल भी प्रभावित हो सकता है। इसी दौरान शहर में सरकार के समर्थन में रोज की तरह सड़कों पर प्रदर्शन भी हो रहा था।
खैबर पख्तूनख्वा में पाकिस्तानी पुलिस ने मार गिराए छह आतंकवादी
पाकिस्तान पुलिस के आतंकवाद विरोधी विभाग ने शुक्रवार देर रात अशांत उत्तर पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में खुफिया जानकारी पर आधारित एक अभियान के दौरान छह आतंकवादियों को मार गिराया। आतंकवाद विरोधी विभाग (सीटीडी) के एक प्रवक्ता ने बताया कि यह अभियान लक्की मारवत जिले के शगाई क्षेत्र में चलाया गया था।
उन्होंने बताया कि जब सीटीडी टीम आतंकवादियों के ठिकाने के पास पहुंची तो आतंकवादियों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने जवाबी कार्रवाई में गोलीबारी की। उन्होंने आगे बताया कि गोलीबारी एक घंटे तक चली और छह आतंकवादियों के मारे जाने के साथ समाप्त हुई
प्रवक्ता ने कहा कि मारे गए आतंकवादियों की पहचान करने की प्रक्रिया चल रही है, जिसके बाद उनके मददगारों और सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आतंकवादियों के पास से मैगजीन और गोला-बारूद सहित चार क्लाश्निकोव राइफलें, दो 9 मिमी पिस्तौल, आठ हथगोले और एक विस्फोटक उपकरण बरामद किया गया।

