शेयर बाजार में पूरा भौकाल रखने वाले सेबी के अधिकारी इस बार खुद डरे हुए हैं. इतना कि उन्होंने चेयरमैन से इसमें दखल देने की गुजारिश की है. आखिर हों भी क्यों न, मामला सीधे उनके पैसों और संपत्तियों से जुड़ा है. शेयर बाजार नियामक सेबी के चेयरमेन तुहिन कांत पांडेय ने खुद बताया कि उनके वरिष्ठ अधिकारी अपनी निजी संपत्तियों के खुलासे को लेकर चिंता में हैं. उनका गहना है कि इससे उनकी गोपनियता पर असर पड़ सकता है.
चेयरमैन ने कहा कि हितों के टकराव के प्रबंधन पर गठित समिति की रिपोर्ट को सेबी के निदेशक मंडल की अगली बैठक में चर्चा के लिए रखा जाएगा. इस समिति ने बाजार नियामक के वरिष्ठ अधिकारियों की संपत्ति और देनदारियों के विवरण को अनिवार्य रूप से सार्वजनिक करने की सिफारिश की है. इसका मतलब है कि अब सभी सेबी अधिकारियों को अपनी संपत्ति का विवरण सार्वजनिक करना होगा.
क्यों नहीं बताना चाहते संपत्ति
सेबी प्रमुख ने कहा कि अधिकारियों को इस बारे में गोपनीयता के आधार पर कुछ चिंताएं हैं. अधिकारी इस जानकारी को आंतरिक रूप से किसी स्वतंत्र इकाई को देने में हिचक नहीं रहे, लेकिन इसे सार्वजनिक करने को लेकर उन्हें आपत्ति है. इसका मतलब है कि सेबी को अपनी संपत्तियों का विवरण किसी एजेंसी को गुप्त रूप में देने से परेशानी नहीं है, लेकिन इसका विवरण आम आदमी के बीच शेयर करने से उन्हें दिक्कत हो सकती है
अब क्या होगा आगे
पांडेय ने कहा कि समिति की अधिकांश सिफारिशों से सेबी नेतृत्व सहमत है और उन पर जल्द ही निर्णय लिया जाएगा. चेयरमैन बनने के बाद पांडेय ने ही इस समिति का गठन किया था. इससे पहले की चेयरमैन माधबी पुरी बुच के खिलाफ हितों के टकराव और विवरणों के खुलासों में कमी को लेकर आरोप लगे थे. शायद यही वजह है कि कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने समिति का गठन किया. उन्होंने कहा कि सेबी कोष प्रबंधकों के लिए एकसमान विनियमन लाने पर विचार कर रहा है, जिसमें म्यूचुअल फंड, वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ), पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाएं (पीएमएस) और अन्य श्रेणियां शामिल होंगी. अभी अलग-अलग लाइसेंसों के लिए अलग-अलग योग्यता की जरूरत होती है, जिससे प्रक्रिया जटिल और महंगी हो जाती है. एकसमान नियम होने से अनुपालन लागत और समय दोनों कम होंगे.

