बारामूला में झेलम नदी से देवी दुर्गा की प्राचीन मूर्ति मिलने से सनसनी फैल गई. एक मछुआरे के जाल में फंसी यह प्रतिमा 90 के दशक के उस काले दौर की याद दिलाती है, जब आतंकवाद के दौरान कई मंदिरों को नष्ट कर मूर्तियों को नदी में फेंक दिया गया था. पुलिस ने इस ऐतिहासिक धरोहर को पुरातत्व विभाग को सौंप दिया है. यह खोज कश्मीर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का बड़ा प्रमाण है.
कश्मीर की जीवनरेखा कही जाने वाली झेलम नदी ने आज अपने आगोश से एक ऐसा ऐतिहासिक सच बाहर निकाला है जिसने घाटी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है. शुक्रवार को बारामूला के जोग्यार इलाके में एक मछुआरा जब रोज की तरह नदी में जाल डाल रहा था तब उसे अंदाजा भी नहीं था कि आज उसके हाथ कोई मछली नहीं बल्कि सदियों पुरानी आस्था का प्रतीक लगने वाला है. पानी की गहराइयों से निकली देवी दुर्गा की यह पत्थर की मूर्ति घाटी के उस दौर की गवाही दे रही है जब आतंकवाद के काले साये ने कश्मीर की शांति और मंदिरों को लील लिया था.
मछुआरे के जाल में ‘शक्ति’
शालतांग निवासी नाजिर अहमद लातू नामक मछुआरे को मछली पकड़ते समय पत्थर की यह भारी मूर्ति मिली. उन्होंने बिना देरी किए इसकी सूचना शेरी पुलिस स्टेशन को दी. पुलिस ने तुरंत हरकत में आते हुए मूर्ति को अपनी सुरक्षा में लिया और पुरातत्व विभाग को सूचित किया. शुक्रवार को पूरी कानूनी प्रक्रिया के साथ इस प्रतिमा को श्रीनगर स्थित ‘अभिलेखागार, पुरातत्व और संग्रहालय निदेशालय’ को सौंप दिया गया. विशेषज्ञों की शुरुआती जांच में इसे देवी दुर्गा का स्वरूप माना जा रहा है.
90 के दशक का वो काला सच
इतिहासकारों और स्थानीय लोगों का मानना है कि यह मूर्ति 1990 के दशक के उस खौफनाक दौर की याद दिलाती है, जब कश्मीर में आतंकवाद चरम पर था. उस समय कश्मीरी पंडितों के घरों और प्राचीन मंदिरों को निशाना बनाया गया था. माना जा रहा है कि उन्माद के उस दौर में कई देवी-देवताओं की मूर्तियों को खंडित होने से बचाने के लिए या उपद्रवियों द्वारा नदियों में फेंक दिया गया था. झेलम ने दशकों तक इस अमानत को अपने सीने में दबाए रखा और अब इसे सुरक्षित वापस लौटा दिया है.
सांस्कृतिक विरासत का खजाना है कश्मीर
कश्मीर की धरती सदियों से शैव और वैष्णव परंपराओं का केंद्र रही है. चाहे वह श्रीनगर का शंकराचार्य मंदिर हो या नौवीं शताब्दी का विश्व प्रसिद्ध मार्तंड सूर्य मंदिर, यहाँ का कण-कण इतिहास समेटे हुए है. अवंतीपोरा के अवंतीस्वामी मंदिर से लेकर खीर भवानी तक, कश्मीर की सभ्यता बेहद प्राचीन है. पुलिस ने इस खोज के बाद नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें कोई भी ऐसी ऐतिहासिक वस्तु मिले, तो वे तुरंत प्रशासन को सूचित करें ताकि कश्मीर की गौरवशाली विरासत को संजोया जा सके.

