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‘संवेदनशील मुख्यमंत्री का असंवेदनशील कारिंदा’..मो. सुलेमान

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भोपाल। फजल ताबिश का एक शेर है कि “जाने वालों पर इस तरह ना हंसो, यह हंसी देर तक रुलाएगी” यह बात स्वास्थ्य विभाग के अपर प्रमुख सचिव मो. सुलेमान पर एकदम फिट बैठती है। दरअसल मोहम्मद सुलेमान का रवैया कोरोना संकट के इस दौर में भी असंवेदनशील और एकदम जुदा है। हालांकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बेहद संवेदनशील हैं। वे 24 घंटे प्रदेश में कोरोना से जनता की परेशानी पर नजर रखे हुए हैं। वे हर जिले की क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटी से वर्चुअल बैठकें कर रहे हैं।
अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर रहे हैं। वहीं सुलेमान प्रदेश की जनता को परेशान करके लाशों पर ठहाके लगा रहे हैं। दो दिन पूर्व सरकार द्वारा रखी गई प्रेस कांफ्रेंस में जब पत्रकारों ने सुलेमान से प्रदेश में ऑक्सीजन और रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी से जुड़ा सवाल पूछा तो उन्होंने हंस कर टाल दिया। यह प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के संवेदनशील अधिकारी का जवाब था। एक तरफ प्रदेश में आए दिन कोरोना से जहां हजारों लोगों की मौतें हो रही है लोग अस्पतालों में इलाज के लिए दर-बदर भटक रहे है ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के यह जिम्मेदार अफसर लाशों के ढेर पर बैठकर ठहाके लगा रहे हैं। यह प्रदेश की जनता का दुर्भाग्य नहीं तो क्या है, कि सरकार ने इतने प्रमुख विभाग की जिम्मेदारी एक लापरवाह और असंवेदनशील व्यक्ति के हाथ में दे रखी है जिसे लोगों के स्वास्थ्य की चिंता ही नहीं। यही नहीं सुलेमान मुख्यमंत्री के निर्देशों को भी अगम्भीरता से लेते हैं। इसका ताजा उदाहरण हाल ही में देखने मिला जब शनिवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऑक्सीजन की कमी को लेकर उनसे कहा कि ऑक्सीजन भिजवाएं तो उनका जबाव था कि सोमवार को भेज देंगे। इस पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें सख्त लहजे में कहा कि सोमवार को क्यों आज क्यों नहीं। आज ही ऑक्सीजन की व्यवस्था कराई जाए।
ऑक्सीजन और बिस्तर की व्यवस्था तक नहीं कर पाए अफसर
प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पर्याप्त समय मिलने के बाद भी प्रदेश के अस्पतालों में व्यवस्थाएं नहीं बनाई जा सकीं। आॅक्सीजन की कमी बनी हुई है। जिन अस्पतालों में लिक्विड ऑक्सीजन की की व्यवस्था थी वहां तो इंतजाम कर लिए गए लेकिन यह अक्सीजन सिलेंडर के माध्यम से अस्पतालों में कैसे पहुंचे। वहीं अस्पतालों में बैड उपलब्ध नहीं होने के लिए खबरें मिल रही हैं। जिम्मेदार कहते हैं कि जरूरतमंदों को बिस्तर मिले इसलिए अस्पताल प्रोटोकॉल लागू किया गया है। यदि यह व्यवस्था समय रहते कर ली जाती तो जितनी दिक्कत हो रही है उतनी शायद नहीं होती।
निजी अस्पतालों ने वसूले मनमाने दाम
कोरोना की दूसरी लहर बड़ी तेजी से फैली है। यही वजह रही कि दोबारा संक्रमण होने के बाद निजी अस्पतालों  ने मरीजों से मनमाने दाम वसूले और तब अफसर नींद में सोए थे। अब जाकर शासन स्तर पर अस्पतालों में जांचों की दरें तय की गई है। दरअसल दूसरी बार संक्रमण बढ़ने के दौरान अस्पतालों ने लोगों से जमकर राशि वसूली। हालांकि जांचों की दरें पहले से तय की जा सकती थी। रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए कंपनियों से अब सौदे किए जा रहे हैं, जबकि यह व्यवस्था पहले ही बनाई जा सकती थी।

मो. सुलेमान की अगंभीरता के कुछ कथन
सुलेमान उवाच …
– सुलेमान ने पत्रकारों से चर्चा में दावा किया है कि जिस रेडमेसिविर इजेंक्शन के लिए हायतौबा मचाई जा रही है उससे जान नहीं बचती है। उनके इस दावे को लेकर सभी लोग हतप्रभ तो हैं ही , साथ ही चिकित्सकों में भी भारी रोष है। डॉक्टरों का तो यहां तक कहना है कि दवा के बारे में आईएएस नहीं डॉक्टर ही जानते हैं। फिलहाल इस मामले में उनकी जमकर थू-थू हो रही है। हद तो यह है कि इस बार कोरोना संक्रमण काल में सरकार की सभी स्वास्थ्य व्यवस्थाएं ध्वस्त होती जा रही हैं। इस मामले में विभाग अपनी नाकामी छिपाने के लिए जमकर आंकड़ेबाजी भी कर रहा है।
– सरकारी रिकॉर्ड में हो रही मौतों के संबंध में स्वास्थ्य विभाग के एसीएस मोहम्मद सुलेमान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हम सौ फीसदी गारंटी नहीं देते कि हमारे द्वारा बताए गए आंकड़े एकदम सही ही होंगे। क्योंकि अब अस्पतालों की संख्या बढ़ गई है और हमें सभी अस्पतालों में कोविड-19 से होने वाली मौतों का पूरा आंकड़ा नहीं मिल पा रहा है। उल्लेखनीय है कि सरकार पर मौतों का आंकड़ा छिपाने का आरोप लगा है।

– हाल ही में फिर मोहम्मद सुलेमान ने कहा कि विकसित देशों का भी हाल देखना चाहिए। वहां भी तो कोरोना से दिक्कत हो रही है। हम कहीं से भी विफल नहीं है। जरूरत के अनुसार इंतजाम कर रहे हैं। वहीं सुलेमान के बारे में जनता कह रही है कि वह अफसर काहे का जो जनता के आंसुओं की कीमत और अपनों के खोने के गम को नहीं समझता हो।

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