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शिंदे के बयान ने महाराष्ट्र में सियासी पारा चढ़ा दिया

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मुंबई: महाराष्ट्र में महायुति की प्रचंड जीत के बाद नई सरकार के दो महीने पूरे कर चुकी है लेकिन बीजेपी और शिवसेना के बीच सबकुछ ठीक नहीं होने की चर्चा के बाद अब उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के बीच कोल्ड वॉर (शीत युद्ध) की चर्चाओं ने राजनीतिक हलकों में गर्मी बढ़ा दी है। इस सब के बीच उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का बयान सुर्खियों में जिसमें उन्होंने कहा है कि उन्हें हल्के में नहीं लिया जाए। शिंदे का कहना है कि आनंद दिघे और बाला साहेब ठाकरे के कार्यकर्ता हैं। 2022 में जिन लोग लोगों ने उन्हें हल्के में लिया था। उनका तांगा पलटा चुके है। शिंदे ने यह भी कहा कि विधानसभा चुनावों से पहले ही उन्होंने भविष्यवाणी कर दी कि महायुति को 200 से अधिक सीटें मिलेंगी। महायुति को चुनावों में 232 सीटें मिली हैं।

मेरा इशारा समझ लें..क्या महाराष्ट्र में सबकुछ ठीक नहीं? एकनाथ शिंदे के बयान ने बढ़ाया सियासी पारा.!

शिंदे की नाराजगी के कारण
ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या एकनाथ शिंदे 2022 में उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली सरकार को पलटाने का हवाला देकर बीजेपी को चेतावनी दे रहे हैं या फिर अपनी अहमियत गिना रहे हैं। राजनीतिक हलकों में जो चर्चाएं हैं उसके अनुसार शिंदे की नाराजगी की एक वजह नहीं है। विधानसभा चुनावों के बाद उन्हें सीएम बनने की उम्मीद थी। जब उन्हें सीएम की कुर्सी नहीं मिली तो वे चाहते थे कि गृह विभाग उन्हें मिले। फडणवीस ने यह विभाग अपने पास रखा। इसके बाद शिंदे को उम्मीद थी कि शिवसेना को सरकार में उचित सम्मान मिलेगा। इसके उलट दिसंबर में फडणवीस ने शिंदे की अगुवाई वाली सरकार के कई फैसला का रिव्यू कर दिया। बात यहीं पर खत्म नहीं हुई जब फडणवीस ने पालक मंत्री की नियुक्ति की तो इसमें भी शिवसेना की मांग के अनुरुप फैसले नहीं हुए। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अभी हाल ही में शिवसेना विधायकों की सुरक्षा घटाने की वजह से भी शिंदे नाराज है।
अपने गढ़ में असहज हैं शिंदे
शिंदे की नाराजगी की सिर्फ इतने कारण नहीं है बल्कि ठाणे में बीजेपी से जीतकर मंत्री बने गणेश नाईक को तवज्जो मिलने से भी वह खफा है। सोमवार को गणेश नाईक ने ठाणे में जनता दरबार लगाया। महाराष्ट्र की राजनीति पर पैनी नजर रखने वाले राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सीएम से डीसीएम होने पर शिंदे ने खुद को कॉमन मैन से डेडिकेटेड कॉमन मैन होने की बात कही थी लेकिन अभी तक वह स्वीकार नहीं कर पाए हैं कि वह अब राज्य के मुखिया नहीं है। यही वजह है कि खुद को महायुति सरकार में असहज महसूस कर रहे हैं। पालक मंत्रियों के मुद्दे पर वह गृह मंत्री अमित शाह तक से मिल चुके हैं, लेकिन एकनाथ शिंदे को सबसे ज्यादा दिक्कत ठाणे में गणेश नाईक और दूसरे बीजेपी नेताओं की सक्रियता से हुई है। अब देखना है कि फडणवीस के साथ उनका कोल्ड वार किस मोड़ पर खत्म होता है? क्योंकि आगे स्थानीय निकाय के चुनाव होने हैं। ठाणे में शिंदे जरूर चाहेंगे कि शिवसेना बड़े भाई की भूमिका में रहे क्योंकि लोकसभा चुनावों में जब बीजेपी ने खराब प्रदर्शन किया था तब भी शिंदे की शिवसेना का प्रदर्शन अच्छा रहा था।

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