रीवा . प्रदेश के विभिन्न भागों में हो रहे अपने पुतला दहन को लेकर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा संबंधित कलेक्टरों पर जताई गई भारी नाराजगी को समाजवादी जन परिषद के नेता अजय खरे ने अलोकतांत्रिक प्रतिशोधत्मक सोच कहा है । श्री खरे ने कहा कि पूरी दुनिया में जहां कहीं भी लोकतंत्र है पुतला दहन , मुर्दाबाद के नारे और काले झंडे दिखाना कोई अपराध नहीं है । जनता को यह अधिकार है कि वह शांतिपूर्ण तरीके से इन तरीकों से अपना विरोध प्रदर्शन कर सके । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का यह कहना कि किसान यदि मेरा पुतला जलाते हैं तो मैं कलेक्टर को नहीं छोडूंगा , आखिरकार इस बात का क्या संदेश जा रहा है ? श्री खरे ने कहा कि ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री को लोकतंत्र में अपना पुतला दहन जरा भी बर्दाश्त नहीं है । किसी भी हालत में उनका पुतला दहन नहीं होने पाए और उसे रोकने के लिए कलेक्टर को गोली ही क्यों न चलवाना पड़े । इधर संपन्न हुई प्रदेश स्तरीय कलेक्टर-आयुक्त की वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यदि खाद वितरण में व्यवधान के कारण किसान मेरा पुतला जलाते हैं तो मैं कलेक्टर को छोड़ूगा नहीं । श्री खरे ने कहा कि प्रदेश के किसानों को खाद के लिए और न भटकना पड़े इस संबंध में सरकार को बेहतर व्यवस्था बनानी होगी । सिर्फ 1 वर्ष छोड़कर सन 2003 से प्रदेश में भाजपा का शासन चल रहा है जिसमें 15 वर्ष से शिवराज सिंह चौहान खुद मुख्यमंत्री हैं लेकिन किसानों की बदहाली में कोई कमी नहीं आई है। यह भारी विडंबना है कि इसके बावजूद सरकार की गलत नीतियों के चलते किसानों को भटकने के लिए मजबूर होना पड़ता है । मुख्यमंत्री चौहान बड़वानी और अशोकनगर कलेक्टर से नाराज नजर आए । इसके अलावा चौहान को दमोह के किसानों के द्वारा उनका पुतला फूंका जाना काफी नागवार गुजरा है ।
किसी जिले से ऐसी खबर मिलने पर कलेक्टरों की खैर नहीं ।
श्री खरे ने कहा कि भोपाल में 15 नवंबर को आयोजित स्वदेशी सम्मेलन के लिए बड़े पैमाने पर सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा भीड़ जुटाने के लिए सभी जिला कलेक्टरों को लक्ष्य निर्धारित किया गया है । इस बात का खुलासा भी वीडियो कॉन्फ्रेंस का कैमरा चालू रखे जाने से सामने आया है । इसे लेकर वीडियो कांफ्रेंस खत्म होने पर मुख्यमंत्री अचानक कांफ्रेंस रिकॉर्ड करने वाले कैमरामैन से नाराज हो गए । दरअसल, आधिकारिक वीसी खत्म हो चुका , इसके बाद अनौपचारिक तौर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 15 नवंबर को भोपाल में होने वाले स्वदेशी सम्मेलन के लिए कलेक्टरों को भीड़ लक्ष्य बांट रहे थे. लेकिन कैमरा बंद नहीं हुआ तो मुख्यमंत्री चौहान कैमरामैन पर सख्त हो गये । श्री खरे ने मुख्यमंत्री चौहान की इस नाराजगी को चोरी और सीनाजोरी कहा है ।

