Site icon अग्नि आलोक

शिवराज जी! अकेले स्कूल शिक्षा में खाली हैं 70 हजार पद

Share

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार शिक्षा में सुधार का कितना भी ढिंढोरा पीट ले, लेकिन हालात किसी भी सूरत में ठीक नहीं कहे जा सकते। ज्ञान के मंदिरों की हालत बद से बदतर होते जा रही है। हां, कुछ वर्षों में सरकारी स्कूलों की संख्या में जरूर वृद्धि हुई है, लेकिन वहां पढ़ाने वाले शिक्षक ही नहीं हैं। यही वजह है कि कई सरकारी स्कूलों के रिजल्ट लगातार खराब आ रहे हैं। दूसरी ओर प्रदेश में बेरोजगारी का आलम यह है कि विभिन्न क्षेत्रों में दक्षता की डिग्रियां लेकर युवा दर-दर भटक रहे है लेकिन उन्हें नौकरियां नहीं मिल पा रही है। शिवराज जी ! सिर्फ कुछ महीनों को छोड़ दीजिए तो पिछले सत्रह वर्षों से आपकी सरकार ही प्रदेश में काबिज है।
इसके बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग में ही सबसे ज्यादा पद रिक्त है। हालांकि यहां वर्ग एक और दो के 30 हजार रिक्त पदों के लिए तीन साल पहले परीक्षा हुई थी लेकिन अभ्यर्थी आज भी नियुक्ति के लिए भटक रहे हैं। वे जिलों में आंदोलन भी कर चुके हैं। इसी तरह वर्ग तीन के फार्म भरवा लिए गए हैं। लेकिन परीक्षा की तारीख अभी तक घोषित नहीं की जा सकी। सूत्रों की मानें तो स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षकों के सत्तर हजार पद अभी खाली है। यही नहीं हालात यह हैं कि कई स्कूलों में तो प्रिंसिपल भी नहीं है। रिक्त पदों की समस्या से राजस्व विभाग, कौशल विकास विभाग, पुलिस विभाग के साथ ही अन्य विभाग भी जूझ रहे हैं। यदि इन विभागों की रिक्तियों को भी इसमें शामिल कर लिया जाए तो प्रदेश में 90 हजार से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। बहुत सारे विभाग तो ऐसे हैं जहां चयन होने के बाद भी उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र नहीं दिए जा रहे। यही वजह है कि उम्मीदवार नौकरी की आस में विभागों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
चयन के बाद भी अटकी नियुक्ति
वर्ष 2017 में पटवारी बनने के नौ हजार से ज्यादा पदों के लिए भर्ती निकली गई थी। इस परीक्षा में आठ लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए थे। प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड ने वर्ष 2018 में इसका परिणाम भी घोषित कर दिया। इसके बाद भी 12 सौ से ज्यादा उम्मीदवार अब भी वेटिंग में है। उसके बाद जून 2018 में काउंसलिंग हुई और करीब 1000 से ज्यादा पद रिक्त रह गए थे लेकिन बैटिंग वालों को मौका नहीं दिया गया। इसी तरह कौशल विकास विभाग में वर्ष 2018 में डिस्ट्रिक्ट फैसिलिटेटर के पद पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला गया था।
इसमें कई उम्मीदवारों का चयन भी हो गया था। वर्ष 2019 में आवेदकों का इंटरव्यू और वेरिफिकेशन भी कर लिया गया लेकिन नियुक्ति नहीं दी गई। इसमें 100 से ज्यादा अभ्यर्थी चयनित हुए थे। चयनित युवाओं ने कई बार विभाग में संपर्क किया लेकिन यह कहकर उन्हें चलता कर दिया गया कि प्रक्रिया अभी चल रही है। वहीं दूसरी ओर पुलिस विभाग में सबसे बड़ी समस्या आयु सीमा बढ़ाने को लेकर है। इसे लेकर युवाओं में नाराजगी भी है। पहले इन पदों के लिए आयु सीमा 33 वर्ष की गई थी लेकिन तीन साल से भर्ती ना होने की वजह से करीब तीन लाख उम्मीदवार ओवर एज हो गए हैं। आयु सीमा बढ़ाकर 37 वर्ष किए जाने को लेकर इन युवाओं ने आंदोलन भी किए। लेकिन अभी तक हल नहीं निकल सका। बता दें कि पुलिस आरक्षक की 9 हजार पदों के लिए भर्ती परीक्षा होना है।
रोजगार मेले भी नहीं दिला पाए काम
राज्य सरकार ने युवा बेरोजगारों को रोजगार देने के लिए मेले रोजगार मेलों के आयोजन भी किए। इनका  प्रचार-प्रसार भी खूब किया। कंपनियों को आमंत्रित किया लेकिन इन मेलों में कंपनियों ने आवेदकों के इंटरव्यू तो लिए लेकिन नियुक्ति में दिलचस्पी नहीं दिखाई। नतीजा बेरोजगारी की समस्या का समाधान नहीं निकला पाया। वहीं नौकरी की आस में युवा लगातार आंदोलन कर रहे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से भी कैंपेन चलाया जा रहा है। विभागों के चक्कर भी काट रहे हैं लेकिन बेरोजगारी का दामन अब भी युवाओं का पीछा नहीं छोड़ रहा।
डेढ़ करोड़ से ज्यादा हैं बेरोजगार
प्रदेश में पिछले तीन साल से कोई बड़ी भर्ती परीक्षा नहीं हुई है। निजी एजेंसियों के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में डेढ़ करोड़ बेरोजगार है। वहीं सरकार के रोजगार पोर्टल पर सिर्फ 35 लाख बेरोजगार ही रजिस्टर्ड है। इनमें से भी 92 फीसदी मध्यप्रदेश के मूल निवासी है।

Exit mobile version