इंदौर
मानपुर क्षेत्र की अजनार नदी में प्रदूषण के मामले पकड़ाए आरोपी ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। अरुण ने पुलिस को बताया, जिस ढाबे के पीछे जमीन पर वह लोग जहरीला केमिकल बहाते थे, उसे नष्ट करने के लिए वह फैक्ट्रियों से 4 लाख रुपए लेता था। इसके बाद ढाबे वाले को 4 हजार रुपए देकर खाली जमीन पर केमिकल उड़ेल दिया करते थे। यही केमिकल जमीन में उतरकर नदी के पानी में मिलता था। पिछले 3 महीने में ही 150 से ज्यादा टैंकर खाली किए गए हैं। मामले में टीआई को हटा दिया गया था। वहीं 500 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया, प्रशासन और पुलिस दोनों ही अब असली दोषियों को बचाने का काम कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं द्वारा एसपी जैन से मानपुर थाने के प्रभारी हितेंद्र सिंह राठौर के खिलाफ भी शिकायत की गई। स्थानीय आदिवासियों ने एसपी से कहा, टीआई ने मामले के असली दोषियों को बचाने के लिए रूपरेखा बनाई है, क्योंकि वे इस इलाके के उद्यमी हैं। एसपी ने सार्वजनिक तौर पर टीआई को हटाने की बात कही। इसके अलावा, अगले कुछ दिनों में मामले के दोषियों पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
यह था मामला
इलाके की अजनार नदी में केमिकल डाल दिया था। इसके कारण जानवरों की मौत हो गई थी। नदी प्रदूषित हो गई थी। मुंबई से आई रिपोर्ट में बताया गया, यहां का पानी पीने योग्य नहीं है। इसके बाद भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नदी में जहरीले पानी को लेकर रविवार को जयस संगठन के महेंद्र सिंह कन्नौज के साथ सैकड़ों लोगों ने मानपुर थाने का घेराव कर दिया।
तीन किलोमीटर तक उन्होंने पैदल मार्च निकाला। इसके बाद थाने के बाहर धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शन में मेधा पाटकर भी थीं। पुलिस ने मामले को लेकर प्रदर्शनकारियों पर केस दर्ज कर लिया। उन पर आरोप है कि बिना मास्क के वो आए थे और अनुमति भी नहीं दी। समझाने के बाद भी प्रदर्शन करते रहे थे। इस कारण 500 लोगों पर प्रकरण दर्ज किया गया है।

