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बारदाना की किल्लत, धान उठाव में देरी, वर्षात की खलल, खाते में राशि की टक -टकी कैसे रुके किसान की धक-धकी

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धान खरीदी केन्दों पर किसानों को कई समस्याओं और असमंजसों का सामना करना पड़ रहा है। एक महीने से ज्यादा की खरीदी में कई तरह की तस्वीर निकल कर सामने आई है, जिसे देखकर कहा जा सकता है कि प्रशासनिक निकम्मेपन के चलते व्यवस्थित रूप से धान की खरीदी नहीं हो पा रही है। खरीदी का मैसेज मिलने के इंतजार के असमंजस से किसानों की चिंता का दौर शुरू हो गया बाद में खरीदी केंद्रों पर पहुंचे किसानों को शुरुआती चरण से जिस तरह से बारदाना एक जटिल समस्या बनकर उभरा है वह अब तक जारी है। धान खरीदी केंद्र में अव्यवस्था व सरकार की नाकामी खोखले वादे के चलते किसान को अपनी मेहनत की कमाई को बेचने के लिए धान खरीदी केंद्र में लाइन लगाना पड़ रहा है, धक्का खाना पड़ रहा है तथा बारदाना उपलब्धता के लिए धान खरीदी केंद्र के चक्कर काट रहे हैं। सहकारी समितियों में बारदाने की कमी और लगातार उठाव न होने और परिवहन की गति धीमी होने के कारण किसानों की धान खरीदी में खलल पैदा हो रही है।
शासन द्वारा समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए केंद्र निर्धारित किए गए हैं तथा किसानों की समस्याओं और सुविधाओं के कागजी निर्देश भी है। पूरे प्रदेश सहित सीधी ज़िले में भी समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी जारी है, लेकिन किसानों को खुले आसमान के नीचे धान बेचना पड़ रहा है खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था के कारण किसान काफी परेशान हैं खरीदी केन्द्र में किसी भी प्रकार की व्यवस्था नहीं है न तो अलाव की व्यवस्था की गई है और न ही टेंट लगाकर शीत लहर से बचने क ही कोई इंतजाम है और न ही बैठने व पीने के लिए पानी की व्यवस्था है। अचानक मौसम में आए बदलाव के बाद किसान मुसीबत में फंस गए है।
जिले में धान खरीदी की शुरुआत हुए एक माह से ऊपर हो चुके हैं, 14 जनवरी तक धान खरीदी होनी है। शुरुआती दौर में जिन किसानों ने धान की बिक्री की है उनमें से भी कई किसानों की राशि उनके खाते में अभी तक महीने भर बाद नहीं आई है। समय पर खाते में राशि ना आने से किसान चिंता में है, चिंता है अगले सीजन की किसानी की, चिंता है लिए कर्ज पटाने की, चिंता है घर गृहस्थी चलाने की।
उमेश तिवारी सीधी (मध्य प्रदेश)

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