Site icon अग्नि आलोक

श्रमिक जनता संघ (मराल) की कसरावद कोर्ट में बड़ी जीत

Share

मराल ओवरसीज लिमिटेड की ओर से मनोज पिता सुरेंद्र ठक्कर द्वारा आदेश 39 नियम 1 व 2 एवं धारा 151 सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के अंतर्गत कंपनी गेट से 500 मीटर तक श्रमिक जनता संघ के श्रमिक सदस्यों एवं यूनियन पदाधिकारियों की प्रबंधन के अवैध कृत्यों के विरोध ना कर पाने की नियत से रोक लगाने हेतु निषेधाज्ञा आदेश प्राप्त करने हेतु दावा लगाया गया था। उक्त दावे में कंपनी ने श्रमिक जनता संघ के पदाधिकारी एवं सदस्यों के विरुद्ध भीड़ इक्ट्ठा कर जोर – जोर से गाली गलोच कर धमकियां देना एवं बलपूर्वक फैक्ट्री बंद कर देने के आरोप लगाए एवं इस आधार पर कंपनी गेट से 500 मीटर तक यूनियन गतिविधि को रोक लगाने के लिए प्रार्थना की। उक्त दावे पर श्रमिक जनता संघ द्वारा विरोध करते हुए अपने अभिभाषक विजय शर्मा के द्वारा पक्ष रखते हुए कहा गया की मराल प्रबंधन विधि के प्रक्रिया के विपरीत मनमाने ढंग से संचालन कर श्रमिको के हक व अधिकारों का हनन करती है उसी तारतम्य में किसी अवैध कृत्य की पूर्ति करने के दुराशय से दुर्भावनापूर्वक  यह दावा प्रस्तुत किया है। वादी कंपनी द्वारा उक्त कथन कपोल कल्पित कल्पनाओं के आधार पर असत्य आधारों पर असत्य अभिवचन किए है। यूनियन द्वारा कोई अवैध कार्य नही किया गया है। प्रतिवादी क्रमांक 2 कामगार एकता संगठन द्वारा खुलम खुला कंपनी की मांग का समर्थन करते हुए अपने जवाब में कहा गया कि हम मराल प्रबंधन के साथ है। हम वादी कंपनी द्वारा चाही गई सहायता देने में कोई आपत्ती नही है।जिसके संबंध में उपाध्यक्ष अखलाक खान द्वारा शपथ पत्र पेश कर वादी कंपनी का समर्थन किया गया।
दोनो पक्षों की सुनवाई करते हुए दिनांक 19 जुलाई 2021 को माननीय व्यवहार न्यायाधीश, कसरावद द्वारा आदेश पारित करते हुए कहा कि वादी कंपनी को व्यादेश सिर्फ संभावनाओं के आधार पर जारी नही किया जा सकता। अतः वादी कंपनी के पक्ष में प्रथम दृष्टया मामला, सुविधा का संतुलन एवं अपूर्णीय क्षति के तथ्य प्रमाणित नहीं होने से वादी की ओर से प्रस्तुत आवेदन पत्र आदेश 39 नियम 1 व 2 एवं धारा 151 सीपीसी का निरस्त किया गया। श्रमिक जनता संघ की तरफ से अधिवक्ता विजय शर्मा द्वारा बहस की गई।

कसरावद कोर्ट के फैसले पर किसी की हार जीत का सवाल ही नहीं उठता है हमने कोर्ट से आग्रह किया था कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए श्रमिकों और उनकी यूनियन के पदाधिकारियों को फैक्ट्री से दूर रखा जाए लेकिन कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया कसरावद कोर्ट के फैसले को लेकर हम ऊपरी अदालत में अपील करेंगे

 मनोज ठक्कर 

मराल ओवरसीज लिमिटेड

Exit mobile version