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इंदौर के रणजीत हनुमान मंदिर में चांदी से बनने वाले गर्भगृह का काम अटका

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इंदौर

इंदौर के एक प्राचीन मंदिर में चांदी से बनने वाले गर्भगृह का काम अटक गया है। कारीगरों की कमी इसका कारण है। काम पूरा नहीं होने के कारण राजस्थान (चुरु) के कारीगर भी चांदी से गर्भगृह बनाने का काम शुरू नहीं कर पा रहे हैं। चलिए आपको बताते हैं क्या है पूरा मामला…

मामला इंदौर के प्राचीन मंदिर रणजीत हनुमान का है। रणजीत हनुमान मंदिर में भगवान का रजत मय गर्भगृह तैयार होना है। इसमें लगभग 300 किलो से ज्यादा चांदी भी लगना है। इसके लिए राजस्थान (चूरु) के कारीगरों को काम भी सौंप दिया हैं। इसके पहले मंदिर में सागवान की लकड़ी से मंदिर में गेट और अन्य काम किया जा रहा था। इंदौर की ऐतिहासिक धरोहर राजबाड़ा और गोपाल मंदिर में लकड़ी का काम करने वाले कारीगर ही इस मंदिर के गेट, फ्रेम और अन्य काम कर रहे थे। मगर पिछले कई दिनों से मंदिर का काम रुका है। इसका कारण बताया जा रहा है कि राजबाड़ा में काम की अधिकता। इस वजह से वे कारीगर रणजीत हनुमान मंदिर में काम नहीं कर पा रहे है।
40% काम ही हुआ मंदिर में
देखा जाए तो रणजीत हनुमान मंदिर में सागवान की लकड़ी से जो काम होना था उसमें अभी तक 40% काम ही हुआ है, जबकि 60% काम होना बाकी है। लकड़ी की फ्रेम, गेट आदि काम होना है। इसमें से आधे से भी कम काम हुआ है। पंजाब के कारीगर इस मंदिर में काम कर रहे थे।

गर्भगृह में तांबे की शीट पर लगेगी चांदी
रणजीत हनुमान मंदिर के पुजारी पंडित दीपेश व्यास के मुताबिक लकड़ी का काम पूरा होने के साथ ही रणजीत हनुमान मंदिर में भगवान के सिंहासन और जमीन से तीन फीट ऊंचाई तक की दीवारों पर तांबे की शीट पर चांदी लगाने का काम किया जाएगा। इसमें करीब 300 किलो से ज्यादा चांदी लगेगी।

ये है मंदिर के गर्भगृह की लंबाई-चौड़ाई
मंदिर के गर्भगृह की बात करें तो संकट मोचन का गर्भगृह 10 फीट चौड़ा, 10 फीट गहरा और 15 फीट ऊंचा है। गर्भगृह में भगवान के जन्म से लेकर उनके राज्याभिषेक के प्रसंग को उकेरा जाना है। ये प्रसंग भगवान की परिक्रमा के दौरान भक्तों को दिखने को मिलेगा।

काम पूरा होते ही शुरू होगा चांदी का काम
मंदिर के पुजारी पंडित दीपेश व्यास ने कहा कि फिलहाल मंदिर में लकड़ी का काम पूरा नहीं हुआ है। इस संबंध में चर्चा की जा रही है। लकड़ी का काम पूरा होने पर राजस्थान के कारीगर आकर नाम लेकर इसका काम शुरू करेंगे।

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