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सिंहस्थ घोटाला ….सरकार बदलते ही जांच ठंडी पड़ गई…

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भोपाल। सरकार की जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू पर से अब लोगों का विश्वास कम होता जा रहा है, वजह है उसके पास लंबित जांचों में कोई कार्रवाई होते न दिखना। मामला कितना भी गंभीर क्यों न हो, यह एजेंसी अपने हिसाब से ही जांच को आगे बढ़ाती है। मामला ई टेंडर घोटाले का हो या फिर सिंहस्थ घोटाले का सब में उसका एक सा ही रुख बना रहता है। सिंहस्थ घोटाले के मामले में दो साल पहले कांग्रेस की सरकार के समय छह गंभीर शिकायतों की जांच ईओडब्ल्यू द्वारा अलग-अलग शुरू की गई थी, लेकिन सरकार बदलते ही यह जांच पूरी तरह से ठंडी पड़ गई है। यह जांच सिंहस्थ में की गई करोड़ों रुपए की खरीदी के मामले में शुरू की गई थी।
खास बात यह है कि इस मामले में ईओडब्ल्यू उज्जैन की संभागीय इकाई द्वारा तीन मामलों में प्राथमिकी भी दर्ज की गई थी। जिन मामलों की जांच ईओडब्ल्यू उज्जैन इकाई द्वारा वर्ष 2019 में शुरू की गई थी उसमें 40 करोड़ रुपए से अधिक की सामग्री सिंहस्थ खत्म होने के बाद सप्लाई करने से भी संबंधित है। इस मामले में कार्यपालन यंत्री व एसडीओ लोक निर्माण विभाग, मुख्य महाप्रबंधक व निरीक्षक लघु उद्योग विभाग, पीएचई, मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, नगर निगम उज्जैन, एचपीएल इलेक्ट्रॉनिक, अजंता वायर एंड फेब्रिकेशन वर्क्स उज्जैन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। ईओडब्ल्यू को मिली शिकायत में 2 हजार एलईडी लाइट्स 3.5 करोड़ में खरीदी गईं, लेकिन सिंहस्थ खत्म होने के बाद भी उनकी सप्लाई नहीं हुई थी।
इस मामले में इन बिजली उपकरण खरीदी संबंधी बिल और सिंहस्थ के बाद उपकरणों के उपयोग को लेकर बिजली कंपनी के अधिकारियों से दस्तावेज तलब किए गए थे, लेकिन कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी है। सूत्रों के मुताबिक सिंहस्थ एरिया में अस्थाई बिजली लाइन, बिजली ट्रांसफॉर्मर और खंभे लगाने का 17 करोड़ का ठेका दिया गया था। फिर इन्हें खोलने के लिए 4.5 करोड़ क अलग से ठेका दिया गया। जिन कंपनियों को ये ठेके दिए गए, इसके भी दस्तावेज तलब किए थे। मकोडिय़ा आम से खाक चौक और खाक चौक से मंगलनाथ मंदिर तक 2.9 किमी डिवाइडर बनाने, बिजली के खंभे और लाइट लगाने के लिए ठेका दिया गया था, लेकिन मंगलनाथ से सांदीपनि आश्रम तक 900 मीटर में ही काम हुआ। इनके अलावा प्रत्येक पड़ाव स्तर पर 500 शौचालय और 10 चेंजिंग रूम में लाइट लगाना था, लेकिन ऐसा किया ही नहीं गया।
होल्ड अप फेस के लिए अजंता बार्बड वायर एंड फेब्रिकेशन वर्क्स उज्जैन को वर्क ऑर्डर और लोगों के लिए पानी की टंकियां एवं स्टैंड खरीदे गए। लेकिन सिंहस्थ खत्म होने के बाद 434 पानी की टंकियां और स्टैंड स्टोर में जमा नहीं हुए। ये टंकियां और स्टैंड खरीदे गए या सिर्फ कागजों में यह काम हुआ इसकी फाइल भी नगर निगम से मांगी गई है। दरअसल टंकी, स्टैंड खरीदे गए थे तो सिंहस्थ समाप्त होने के बाद इन्हें स्टोर में जमा क्यों नहीं कराया, इस संबंध में जिम्मेदार अफसरों से लिखित में जवाब मांगा गया है। हालांकि इस मामले में ईओडब्ल्यू सूत्रों का कहना है कि जांच जारी है, लेकिन कोरोना के कारण इनकी जांच की रफ्तार कम हुई है। संबंधित विभागों से जानकारी आने के बाद दस्तावेजों का परीक्षण किया जाएगा उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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