अग्नि आलोक

साहब अभी बस्ती मत उजाड़ो,भीषण गर्मी एवं बरसात में बच्चों सहित कहां जाएंगे

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रेल अधिकारियों का फरमान सुन एसडीओ को सुनाई फरियाद,मांगी मोहलत

जौरा— लगभग 34 वर्ष पूर्व सरकारी योजना के तहत सर पर छत मिलने से इन परिवारों की खुशियों का ठिकाना नहीं था। कई दशकों से यहां रह रहे बच्चे जहां अब जवान होकर अधेड़ होने की चौखट पर पहुंच गए हैं वही कई लोगों ने अपनी बुजुर्ग पीढ़ी भी यही गवां दी। मेहनत मजदूरी कर अभावों के बीच अपना गुजारा करने वाले 2 दर्जन से अधिक इन परिवारों की रही सही खुशियां 2 दिन पूर्व उस समय काफूर हो गई जब ब्रॉड गेज रेल लाइन का काम करा रहे अधिकारियों के दल ने बस्ती में पहुंचकर सभी रह वासियों को 2 दिन में अपना सामान समेटकर घर खाली करने का मौखिक फरमान सुनाया। बस्ती पुजारी जाने का फरमान सुनते ही इन गरीब परिवारों के हाथ पांव फूल गए। उन्होंने अपनी आदत के मुताबिक उपस्थित हाकिमों से गिड़गिड़ा कर कुछ दिनों की मोहलत मांगते हुए कहा कि भीषण गर्मी एवं आगे आने वाली बरसात के समय हम छोटे बच्चों के साथ कहां जाएंगे क्या करेंगे। इसका जवाब देने के बजाय रेल विभाग के अधिकारियों की त्योरियां और चढ़ गईं। रेल विभाग के अधिकारी गरीब परिवारों की गुहार को अनसुनी कर 2 दिन बाद बस्ती पर बुलडोजर चलाने का फरमान सुनाकर वहां से लौट गया। बेघर होने की चिंता से परेशान यह गरीब आदिवासी परिवार आज लामबंद होकर पूर्व विधायक महेश दत्त मिश्र के नेतृत्व में अनुविभागीय अधिकारी जोरा कार्यालय पहुंचे। अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय पहुंचने वाले इन आदिवासी परिवारों में महिला वृद्ध नौजवान एवं बच्चे शामिल थे। यहां पहुंच कर पीड़ित परिवारों ने अनुविभागीय अधिकारी के नाम एक ज्ञापन सौंपते हुए उनके पुनर्वास की व्यवस्था होने तक उन्हें  वेघर नहीं किए जाने की मांग की। गरीब आदिवासी परिवारों कहना है कि भीषण गर्मी एवं बरसात के दिनों में वे परिवार के छोटे-छोटे बच्चों के साथ आखिर जाएं तो कहां जाएं। उनके पास तो कोई व्यवस्था नहीं है। अनुविभागीय अधिकारी विनोद सिंह ने भी इन परिवारों को वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।

**कई लोगों के पास उपलब्ध हैं आवास के पट्टे**

रेल अधिकारियों द्वारा जिन आदिवासी परिवारों को आवास खाली किय जाने का फरमान सुनाया गया है उनमें से कई परिवारों के पास इन आवासों के स्थाई पट्टै भी है। वर्ष 1988 में कांग्रेस शासनकाल में इन गरीब आदिवासी परिवारों को तत्कालीन सरकार द्वारा इंदिरा आवास योजना के तहत आवास बनाकर उपलब्ध कराए गए थे। इनमें से कुछ लोगों ने आज भी इन अधिकार पत्रों की फोटो प्रति अनुविभागीय अधिकारी को दिखाई।

नहीं मिल रहा रिकॉर्ड

इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारी विनोद सिंह ने पूर्व विधायक मिश्र से चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने इस संबंध में जनपद पंचायत से रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के लिए कहा है। अभी तक उन्हें इस आवासीय कॉलोनी का रिकॉर्ड नहीं मिल सका है।

**न्यायालय के आदेशों की अवज्ञा**

पूर्व विधायक महेश दत्त मिश्रा इस संबंध में चर्चा करते हुए बताया के सरकारी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण किए जाने से पूर्व शासकीय सामूहिक आवासों में रहने वाले जनजातीय परिवारों का पुनर्रवास की व्यवस्था किए जाने के स्थाई आदेश आदेश उच्च न्यायालय द्वारा जारी किए गए हैं। इसके बावजूद रेल विभाग के अधिकारी अपनी मनमानी के चलते इन गरीब परिवारों को भीषण गर्मी एवं आगामी दिनों में होने वाली बरसात के दिनों में बेघर करने का आदेश दे रहे हैं। यह इन परिवारों के साथ अन्याय है। मिश्र ने इन परिवारों का पुनर्वास नहीं किए जाने पर रेल विभाग की मनमानी के विरोध में जन आंदोलन की बात कही है।

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