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*SIR प्रक्रिया लोकतंत्र के मूल अधिकारों पर सीधा हमला-सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया)*

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सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) मानती है कि बिहार में चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को लेकर चलाई जा रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया लोकतंत्र के मूल अधिकारों पर सीधा हमला है। मतदाता सूची लोकतंत्र की आधारशिला है और इसमें किसी भी तरह की छेड़छाड़ आम जनता के मताधिकार से खिलवाड़ है।

हमें यह कहते हुए अफसोस है कि इस प्रक्रिया में व्यापक पैमाने पर गड़बड़ियाँ सामने आ रही हैं। गरीब, वंचित, किसान, मजदूर और हाशिए पर खड़े समाज के नाम सूची से काटे जा रहे हैं। नए नौजवान मतदाताओं को पंजीकरण में जानबूझकर परेशान किया जा रहा है। यह सब लोकतांत्रिक व्यवस्था की जड़ों को खोखला करने वाली साजिश है।

सुप्रीम कोर्ट ने कई अवसरों पर कहा है कि मतदान का अधिकार केवल कानूनी ही नहीं, बल्कि संवैधानिक महत्व का अधिकार है, और चुनाव आयोग की सबसे बड़ी जिम्मेदारी निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है। लेकिन वर्तमान में आयोग की भूमिका संदिग्ध और अलोकतांत्रिक दिखाई पड़ रही है। यह स्थिति चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर भी प्रश्नचिह्न खड़े करती है।

बिहार में चुनाव के चंद माह पूर्व और ऐसे समय में जब बिहार का बड़ा हिस्सा बाढ़ की चपेट में है और लोग अपने जान-माल की हिफ़ाज़त के लिए परेशान हैं, इस प्रक्रिया को करना यह दर्शाता है कि चुनाव आयोग ने बगैर सोचे समझे हड़बड़ी में यह कदम उठाया है।इसके अलावा इतनी कम अवधि में लगभग 7.5 करोड़ मतदाताओं की सूची का पुनरीक्षण करने पर तमाम तरह की ग़लतियाँ तो होनी ही हैं। 

अत: हम माँग करते हैं कि 

  1. SIR को तत्काल रोककर चुनाव के बाद उपयुक्त समय पर नए सिरे से पारदर्शी और न्यायसंगत ढंग से चलाया जाए।
  2. जिन मतदाताओं के नाम सूची से काटे गए हैं, उनकी पूरी सूची सार्वजनिक की जाए और उन्हें पुनः जोड़ा जाए।
  3. बिहार विधानसभा का आसन्न चुनाव SIR प्रक्रिया के पहले की मतदाता सूची के आधार पर हो।
  4. पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाया जाए ताकि गरीब और ग्रामीण मतदाताओं को अधिकार से वंचित न होना पड़े।
  5. यह सुनिश्चित करना चुनाव आयोग का दायित्व है कि मतदाता सूची में देश के एक भी वैध मतदाता का नाम दर्ज होने से न रह जाए।
  6. इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

अगर यह जनविरोधी और अलोकतांत्रिक रवैया बंद नहीं हुआ तो हम इसका विरोध जारी रखेंगे। लोकतंत्र की असली ताक़त जनता है, और जनता के मताधिकार पर कुठाराघात को किसी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

बसंत हेतमसरिया

राष्ट्रीय प्रवक्ता

सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया)

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